कैसे शुरु हुआ भाई-बहन के पवित्र प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन, जानें इसका पौराणिक इतिहास
Kaushiki | Aug 09, 2025, 08:21 IST
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मां लक्ष्मी और राजा बलि की कथाImage credit : Kaushiki
दूसरी प्रमुख कथा भगवान विष्णु के भक्त राजा बलि से जुड़ी है, जो बहुत दानी थे। भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और उन्हें पाताल में निवास करने के लिए कहा। इससे राजा बलि को अपना सब कुछ गंवाना पड़ा।
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रक्षासूत्र की शुरुआतImage credit : Kaushiki
द्रौपदी के इस उपकार के बदले में, भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा उनकी रक्षा का वचन दिया था। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी घटना के बाद से रक्षासूत्र या राखी बांधने की परंपरा की शुरुआत हुई, जहां भाई अपनी बहन की सुरक्षा का संकल्प लेते हैं।
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खून के रिश्ते से बढ़करImage credit : Kaushiki
ये कथाएं बताती हैं कि रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का पर्व केवल सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं है। यह प्रेम, विश्वास, त्याग और एक-दूसरे की रक्षा के वचन का प्रतीक है, जो किसी भी रिश्ते में निस्वार्थ भाव से निभाया जा सकता है।
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रक्षाबंधनImage credit : Kaushiki
रक्षाबंधन, भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट रिश्ते का एक ऐसा पर्व है, जिसकी जड़ें सदियों पुरानी परंपराओं और गहरी पौराणिक कथाओं में बसी हैं। यह सिर्फ एक धागा बांधने का रिवाज नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे की सुरक्षा की कामना का प्रतीक है। आइए जानते हैं, कैसे शुरू हुआ यह पावन त्योहार और कौन सी कहानियां इसे इतना खास बनाती हैं।
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आज भी कायम है परंपराImage credit : Kaushiki
सदियों पुरानी ये पौराणिक कथाएं आज भी रक्षाबंधन (रक्षाबंधन 2025) के त्योहार की नींव हैं। जब बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं, तो वे इन्हीं प्राचीन प्रतिज्ञाओं और प्रेम की भावना को जीवंत करती हैं, जिससे यह परंपरा हमेशा पवित्र और महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
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रक्षाबंधन का असली अर्थImage credit : Kaushiki
यह त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक है। बहनें भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा, लंबी आयु और सफलता की कामना करती हैं। यह सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि स्नेह और सुरक्षा का एक मजबूत बंधन है।
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श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कहानीImage credit : Kaushiki
महाभारत में एक बार शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी। खून बहता देख द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी। यह निःस्वार्थ काम प्रेम और सेवा का सर्वोच्च उदाहरण था।
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राखी की शक्तिImage credit : Kaushiki
भगवान विष्णु के पाताल में रहने से चिंतित मां लक्ष्मी ने एक गरीब महिला का वेष धारण कर राजा बलि को राखी बांधी। राखी के बदले में राजा ने उनकी इच्छा पूछी, जिस पर मां लक्ष्मी अपने असली रूप में आईं और भगवान विष्णु को वापस मांगा। राखी का मान रखते हुए राजा बलि ने भगवान विष्णु को वापस जाने दिया।