11 साल बाद लौटा 2015 जैसा सावन, जानें सोमवार और रक्षाबंधन की तारीखें
Sawan 2026 Calendar: सावन माह भगवान शिव के भक्तों के लिए सबसे खास होता है। इस साल 30 जुलाई से शुरू हो रहा सावन का कैलेंडर एक बड़ा सरप्राइज लेकर आया है। ज्योतिषियों और वैज्ञानिकों की मानें तो यह कैलेंडर हमें ठीक 11 साल पुरानी यादों में ले जाता है।
वर्ष 2015 की तरह ही इस बार भी सावन के चारों सोमवार बिल्कुल उन्हीं तारीखों पर पड़ रहे हैं। यह ग्रेगोरियन यानी अंग्रेजी कैलेंडर और चंद्र पंचांग का मेल है। लीप ईयर और दिनों की गणना की वजह से कैलेंडर का पैटर्न दोहराता है। हालांकि सोमवार की तारीखें वही हैं, लेकिन रक्षाबंधन की तिथि में छोटा सा बदलाव आया है।
इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में सावन की शुरुआत अलग समय पर होती है। उत्तर भारत में पूर्णिमा के बाद सावन शुरू होता है। वहीं महाराष्ट्र और गुजरात में अमावस्या के अगले दिन से सावन मानते हैं। आइए इस संयोग और सावन की सभी खास तारीखों के गणित को समझें।
11 साल बाद लौटा पुराना सावन
इस साल 30 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो चुका है, जो 11 साल पुरानी यादें ताजा कर रहा है। ज्योतिषियों और वैज्ञानिकों की मानें तो वर्ष 2015 की तरह ही इस बार भी सावन के चारों सोमवार की तारीखें बिल्कुल वही आई हैं। भक्तों के लिए यह बहुत ही सुखद और अनोखा संयोग है।
- सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा।
- इसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त को आएगा।
- वहीं तीसरा सोमवार 17 अगस्त को होगा।
- चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा।
अंग्रेजी कैलेंडर और चंद्र पंचांग के इस मैथमेटिकल मैच की वजह से पूरे 11 साल (शिव और सावन)बाद ऐसा सुंदर और अद्भुत मौका फिर से आया है। सावन के सभी सोमवार पर भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।
इस बार रक्षाबंधन एक दिन पहले
सावन सोमवार की तारीखें भले ही 11 साल पुराने यानी 2015 वाले कैलेंडर से पूरी तरह मैच कर रही हैं। लेकिन रक्षाबंधन के त्योहार में एक छोटा सा बदलाव देखने को मिल रहा है।
साल 2015 में भाई-बहन के पवित्र प्रेम का यह महापर्व 29 अगस्त को मनाया गया था। हालांकि, इस साल यानी 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि इस बार रक्षाबंधन 2015 की तुलना में पूरे एक दिन पहले आ रहा है। यह बदलाव मुख्य रूप से चंद्र पंचांग और तिथियों की लगातार बदलती चाल की वजह से हुआ है।
हिंदू धर्म में तिथियों की घट-बढ़ बहुत ही स्वाभाविक मानी जाती है। तिथि के इसी मामूली उतार-चढ़ाव की वजह से इस बार रक्षाबंधन की तारीख 29 के बजाय 28 अगस्त पड़ रही है।
भले ही कैलेंडर में एक दिन का यह अंतर आया हो, लेकिन सावन मास की भव्यता, मंदिरों की रौनक और श्रद्धालुओं की असीम भक्ति में कोई कमी नहीं आएगी। पूरे देश में रक्षाबंधन का त्योहार उसी उत्साह, मिठास और आनंद के साथ मनाया जाएगा।
कैसे बना यह अद्भुत ज्योतिषीय संयोग
ज्योतिषाचार्य स्मिता पंडित ने इस खास गणित के बारे में बताया। साधारण साल में 365 दिन होते हैं। इसलिए हर साल किसी भी तारीख का वार एक दिन आगे बढ़ता है। लीप ईयर में 366 दिन होने से वार दो दिन खिसकते हैं।
इसी वजह से कुछ सालों बाद कैलेंडर का पैटर्न दोबारा आ जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर में अक्सर 6, 11 या 28 साल में ऐसा होता है। तारीखें और वार लगभग उसी क्रम में दोबारा दिखाई देने लगते हैं। 2015 और इस साल का संयोग इसी गणित का नतीजा है।
मराठी-गुजराती समाज का सावन अलग
देश भर में सावन मनाने के तरीके और तिथियां अलग हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में अमांत पंचांग माना जाता है। वहां सावन का महीना 13 अगस्त से शुरू होकर 10 सितंबर तक चलेगा। वहां सावन के सोमवार 17, 24, 31 अगस्त को होंगे।
इसके अलावा वहां चौथा सोमवार 7 सितंबर को पड़ेगा। इसका मुख्य कारण पंचांग की गणना का तरीका है। वहां अमावस्या के अगले दिन से सावन मास गिना जाता है। उत्तर भारत में पूर्णिमा के अगले दिन से सावन शुरू होता है।
रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा की तैयारी
28 अगस्त को रक्षाबंधन का पावन पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देते हैं। सावन पूर्णिमा के दिन ही यह पावन पर्व मनाया जाता है।
इस दिन मंदिरों में भी विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान होते हैं। पूरे देश में त्योहार की खुशी और मिठास देखने को मिलेगी। कैलेंडर का यह अनोखा मेल इस बार के सावन को और खास बनाता है। ऐसे में 11 साल पुराना यह संयोग लोगों को बहुत पसंद आ रहा है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- इस साल सावन का कैलेंडर 11 साल पुराने यानी 2015 जैसा क्यों है?
साधारण वर्ष 365 दिन का होता है और लीप ईयर 366 दिन का। दिनों की इस गणना और चंद्र पंचांग के गणितीय मेल के कारण अंग्रेजी कैलेंडर में 11 साल के अंतराल पर तारीखें और वार का क्रम दोबारा वही बन जाता है। - इस साल सावन में चारों सोमवार किस-किस तारीख को पड़ रहे हैं?
इस साल सावन के चारों सोमवार बिल्कुल 2015 वाली तारीखों में आ रहे हैं। पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा तथा अंतिम सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा। - उत्तर भारत और गुजरात-महाराष्ट्र में सावन शुरू होने की तारीख में अंतर क्यों है?
उत्तर भारत में पूर्णिमा के अगले दिन से सावन की शुरुआत होती है। जबकि महाराष्ट्र और गुजरात में अमांत पंचांग मानने के कारण अमावस्या के अगले दिन यानी 13 अगस्त से सावन मास शुरू होगा।
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