जन्माष्टमी, तीज से गणेश उत्सव तक, देखें सितंबर महीने का पूरा फेस्टिवल कैलेंडर

Kaushiki | Sept 01, 2026, 07:00 IST
September Festival List 2026
सितंबर 2026 धार्मिक दृष्टि से बेहद पावन रहने वाला है। इस महीने श्री कृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और पितृपक्ष जैसे बड़े पर्व आ रहे हैं। इस लेख में पूरे सितंबर महीने के सभी प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट देखें।

September 2026 Festival Calendar: धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से सितंबर 2026 का महीना बहुत ही पावन रहने वाला है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, यह महीना भाद्रपद और आश्विन मास के जोड़ पर पड़ता है। इस पूरे महीने में देशभर में भक्ति और उत्सव का माहौल रहेगा। इसमें सबसे पहले कान्हा की बाल लीलाओं का उत्सव आएगा।



इसके बाद भगवान गणेश के आगमन की खुशियां पूरे देश में मनाई जाएंगी। सितंबर के महीने में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। वहीं माताएं अपनी संतान की अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए विशेष पूजा करेंगी। इस महीने जैन धर्म का पर्युषण पर्व और विश्वकर्मा पूजा भी धूमधाम से मनाया जाएगा।



महीने के अंतिम दिनों में पूर्वजों को याद करने का पावन समय पितृपक्ष शुरू होगा। इस दौरान लोग अपने पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और दान-पुण्य करेंगे। अगर आप भी सितंबर में आने वाले व्रतों की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। आइए जानें सितंबर 2026 के व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट।



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सितंबर के व्रत और त्योहार

  • 1 सितंबर: नागपंचमी (गुजरात)
    गुजरात में यह पर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की विशेष पूजा की जाती है। लोग नाग देव को दूध अर्पित कर परिवार की रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
  • 2 सितंबर: हल षष्ठी एवं रांधण छठ
    हल षष्ठी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इस दिन बिना हल जुते अन्न का सेवन किया जाता है। गुजरात में रांधण छठ पर शीतला माता के लिए भोजन बनता है।
  • 3 सितंबर: शीतला सातम
    इस दिन शीतला माता की बासोड़ा पूजा की परंपरा निभाई जाती है। लोग एक दिन पहले बना ठंडा भोजन माता को अर्पित करते हैं। ऐसा करने से शरीर रोगों और बीमारियों से दूर रहता है।
  • 4 सितंबर: श्री कृष्ण जन्माष्टमी
    भाद्रपद अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भक्त दिन भर व्रत रखकर मध्यरात्रि कान्हा का जन्म कराते हैं। मंदिरों में भव्य झांकियां सजाई जाती हैं।
  • 5 सितंबर: दही हांडी और गोगा नवमी
    जन्माष्टमी के अगले दिन जगह-जगह दही हांडी प्रतियोगिता आयोजित होती है। युवा मटकियां फोड़कर माखन चोरी की लीला को दर्शाते हैं। गोगा नवमी पर गोगा देव की पूजा होती है।
  • 7 सितंबर: बछ बारस और अजा एकादशी
    बछ बारस पर माताएं संतान के कल्याण के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा का विशेष महत्व है। अजा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है।
  • 8 सितंबर: पर्युषण पर्व आरंभ एवं प्रदोष
    जैन समुदाय के सबसे पवित्र पर्युषण पर्व की शुरुआत इस दिन से होगी। इसमें आत्म-शुद्धि, जप और उपवास का विशेष महत्व होता है। साथ ही भौम प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।
  • 9-11 सितंबर: शिवरात्रि, अमावस्या और पोला
    9 सितंबर को मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव की कृपा दिलाता है। 10 और 11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या और पोला पर्व मनाया जाएगा। पोला पर बैल-पूजा का रिवाज है।
  • 13 सितंबर: वराह जयंती
    भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह देव की पूजा इस दिन की जाती है। उन्होंने पृथ्वी को जल से बाहर निकालकर रक्षा की थी। इस दिन विष्णु जी की कथा सुनी जाती है।
  • 14 सितंबर: हरतालिका तीज और गणेश उत्सव
    हरतालिका तीज व्रत पर सुहागिनें शिव-पार्वती की पूजा कर पति की लंबी उम्र मांगती हैं। इसी दिन घर-घर में प्रथम पूज्य गणपति बप्पा की स्थापना की जाएगी।
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  • 15 सितंबर: ऋषि पंचमी
    ऋषि पंचमी पर सप्तऋषियों का पूजन और स्मरण किया जाता है। अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित के लिए यह व्रत रखा जाता है। महिलाएं इस दिन नदियों में स्नान करती हैं।
  • 16 सितंबर: बलराम पूजा
    16 सितंबर को भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी की जयंती मनाई जाएगी।
  • 17 सितंबर: विश्वकर्मा पूजा
    17 सितंबर को शिल्पकला के देवता भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा की जाएगी।
  • 19 सितंबर: राधा अष्टमी
    19 सितंबर को बरसाने की लाडली श्री राधा रानी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
  • 19 सितंबर: महालक्ष्मी व्रत का आरंभ
    इस दिन से 16 दिनों तक चलने वाला महालक्ष्मी व्रत शुरू होगा। मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य और समृद्धि आती है। परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
  • 22 सितंबर: परिवर्तिनी एकादशी
    भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में लीन भगवान विष्णु इस दिन अपनी करवट बदलते हैं।
  • 23 सितंबर: वामन जयंती
    यह दिन भगवान विष्णु के पांचवें अवतार श्री वामन देव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन वामन देव की विशेष पूजा की जाती है और दान-पुण्य करने का विधान है।
  • 24 सितंबर: गुरु प्रदोष व्रत
    गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को 'गुरु प्रदोष' कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित होता है।
  • 25 सितंबर: अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन
    दस दिनों तक चले गणेशोत्सव का समापन इस दिन विसर्जन के साथ होगा। भक्त बप्पा को अगले बरस जल्दी आने की विदाई देंगे। साथ ही अनंत धागा बांधा जाएगा।
  • 26 सितंबर: पूर्णिमा श्राद्ध
    भाद्रपद पूर्णिमा पर ऋषि-मुनियों और पूर्वजों के निमित्त तर्पण किया जाता है। इसके साथ ही एक महीने के सत्यनारायण व्रतों का समापन भी इस पावन तिथि पर होता है।
  • 27-30 सितंबर: पितृपक्ष की शुरुआत
    27 सितंबर से आश्विन माह के पितृपक्ष की विधिवत शुरुआत हो जाएगी। इस दौरान प्रतिपदा से पंचमी तक के पितरों का श्राद्ध कर्म करके पितरों को याद किया जाएगा।
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सितंबर 2026 में ग्रह गोचर

सितंबर 2026 में चार प्रमुख ग्रहों का महागोचर होने जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, इस दौरान मालव्य, भद्र, बुधादित्य और लक्ष्मी नारायण जैसे शुभ राजयोग बनेंगे।



  • 2 सितंबर (शुक्र गोचर): शुक्र अपनी स्वराशि तुला में प्रवेश करेंगे, जिससे मालव्य राजयोग का निर्माण होगा।
  • 7 सितंबर (बुध गोचर): बुध अपनी उच्च राशि कन्या में प्रवेश करेंगे, जिससे भद्र राजयोग बनेगा।
  • 17 सितंबर (सूर्य गोचर): सूर्य कन्या राशि में प्रवेश कर बुध के साथ युति बनाएंगे, जिससे बुधादित्य राजयोग बनेगा।
  • 18 सितंबर (मंगल गोचर): मंगल ग्रह कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
  • 26 सितंबर (बुध गोचर): बुध तुला राशि में प्रवेश कर शुक्र के साथ मिलकर लक्ष्मी नारायण राजयोग बनाएंगे।

जीवन और राशियों पर मुख्य प्रभाव:



  • आर्थिक लाभ और धन वृद्धि: मालव्य और लक्ष्मी नारायण योग से वृषभ, मिथुन, तुला और कर्क राशि के जातकों को अचानक धन लाभ और आर्थिक मजबूती मिलेगी।
  • करियर और व्यापार में तरक्की: भद्र और बुधादित्य राजयोग के प्रभाव से नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति मिलेगी और व्यापारियों को नई डील से मुनाफा होगा।

तो सितंबर 2026 का ये महीना भक्ति, उपवास और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का एक अलौकिक संगम लेकर आ रहा है। इस दौरान आने वाले व्रत-त्योहार न केवल हमारे जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेंगे बल्कि सुख, समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।



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