शरद पूर्णिमा पर रातभर जागने वालों पर क्यों मेहरबान होती हैं मां लक्ष्मी? जानें 16 कलाओं और कोजागरी का सच

Kaushiki | Oct 22, 2026, 13:46 IST
शरद पूर्णिमा 2026
On Sharad Purnima, the moon displays all its 16 Kalas. Goddess Maa Lakshmi visits Earth asking Ko Jagarti. Discover the secret of Kojagari Purnima and its astrological math.
Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कलाएं पूरी करता है। इस रात चांद से अमृत जैसी किरणें धरती पर बरसती हैं। मां लक्ष्मी रात में धरती पर आकर सबको देखती हैं। संस्कृत शब्द को जागर्ति का अर्थ है कौन जाग रहा है। ब्रह्मवैवर्त और लिंग पुराण में इसका खास वर्णन मिलता है। पौराणिक कथाओं में इसे अमृत वर्षा की रात भी कहा गया है।

शरद पूर्णिमा की रात हवा में एक अलग तरह की ठंडक और मिठास होती है। लोग अपने घरों की छतों पर मीठी खीर बनाकर रखते हैं। मान्यता है कि चांद की किरणें खीर में अमृत घोल देती हैं। इस खीर को खाने से शरीर के सारे रोग दूर भागते हैं। लोग रात भर जागकर प्रभु का भजन और ध्यान करते हैं।



धार्मिक शास्त्रों में इस रात का महत्व बहुत विस्तार से बताया गया है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी स्वयं धरती पर भ्रमण करती हैं। वह घर-घर जाकर देखती हैं कि रात में कौन जाग रहा है। जो जागकर पूजा करता है उसपर देवी लक्ष्मी की कृपा बरसती है। इस बार 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाया जाएगा। तो ऐसे में आइए जानें इस पवित्र रात की पौराणिक कथा।



16 कलाओं का धार्मिक गणित

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और शीतलता का कारक माना गया है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर चमकता है। बाकी दिनों में चांद की कलाएं घटती या बढ़ती रहती हैं। मान्याता है कि केवल शरद पूर्णिमा पर ही यह अपनी पूरी सुंदरता के साथ प्रकट होता है।



शास्त्रों में इन सोलह कलाओं के नाम बहुत सुंदर और अर्थपूर्ण दिए गए हैं। इनके नाम अमृत, मानदा, पूषा, तुष्टि, पुष्टि, रति और धृति हैं। इसके अलावा शशिनी, चंद्रिका, कांति, ज्योत्स्ना, श्री, प्रीति, अंगदा, पूर्ण और पूर्णामृत भी हैं। यह सभी कलाएं जीवन को सुख और शांति प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।



भगवान श्रीकृष्ण को भी सभी सोलह कलाओं से पूर्ण माना गया है। उन्होंने शरद पूर्णिमा की रात ही वृंदावन में महारास रचाया था। उस रात उन्होंने अपनी दिव्य लीला से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था। इसलिए इस पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।



कोजागरी शब्द का असली अर्थ

शरद पूर्णिमा को कई जगहों पर कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। संस्कृत भाषा में को जागर्ति शब्द से ही यह नाम बना है। इसका सीधा और सरल अर्थ होता है कि कौन जाग रहा है। लिंग पुराण में इस बात का बहुत सुंदर वर्णन मिलता है।



रात के समय देवी लक्ष्मी आकाश मार्ग से पूरी पृथ्वी पर घूमती हैं। वह हर इंसान के घर जाकर धीरे से पूछती हैं कि कौन जाग रहा है। जो इंसान रात में जागकर भगवान की भक्ति करता है, देवी उसपर खुश होती हैं। देवी लक्ष्मी उसे धन और वैभव का वरदान देकर चली जाती हैं।



ब्रह्म वैवर्त पुराण में भी इस कथा का बहुत ही विस्तार से जिक्र मिलता है। जो लोग रात भर सोते रहते हैं, वे इस शुभ अवसर को खो देते हैं। इसलिए लोग इस रात में सोने की गलती नहीं करते हैं। सब मिलकर खीर बनाते हैं और पूजन करते हैं।



वैज्ञानिक और आध्यात्मिक लाभ

शरद पूर्णिमा की रात का वैज्ञानिक पहलू भी बहुत ही रोचक माना जाता है। इस समय चंद्रमा पृथ्वी के सबसे ज्यादा करीब स्थित होता है। चांद की सफेद किरणें औषधीय गुणों से पूरी तरह भरी होती हैं।



खुले आसमान के नीचे रखी खीर इन किरणों को अपने अंदर सोख लेती है। इस खीर को खाने से हमारी पाचन शक्ति बहुत मजबूत हो जाती है। आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी यह खीर बहुत मददगार साबित होती है। मन का तनाव और चिंता भी इस रात दूर हो जाती है।



इसलिए इस दिन का धार्मिक तथा स्वास्थ्य दोनों ही दृष्टि से महत्व है। आपको भी इस पावन रात का पूरा लाभ जरूर उठाना चाहिए। रात में जागकर भजन करें और अमृत रूपी प्रसाद को जरूर ग्रहण करें।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQs:



  1. शरद पूर्णिमा पर विशेष क्या होता है?
    शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, जिसे अमृत वर्षा की रात भी कहा जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और जो लोग रात में जागकर पूजा करते हैं, उनपर देवी की कृपा बरसती है।
  2. क्या शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने का कोई महत्व है?
    हां, शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर चांद की किरणों में रखी जाती है, मान्यता है कि चांद की किरणें खीर में अमृत घोल देती हैं और इसे खाने से शारीरिक रोग दूर होते हैं।
  3. शरद पूर्णिमा को 'कोजागरी पूर्णिमा' क्यों कहते हैं?
    शरद पूर्णिमा को 'कोजागरी पूर्णिमा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह 'को जागर्ति' शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है 'कौन जाग रहा है'। इस रात देवी लक्ष्मी जागने वालों से धन और वैभव का वरदान देती हैं।
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