शारदीय नवरात्रि का छठा दिन: अन्याय और ट्रोल्स के खिलाफ आवाज उठाना सिखाती हैं मां कात्यायनी, जानें महिषासुरमर्दिनी की अमर कथा
Maa Katyayani Puja Vidhi: शारदीय नवरात्रि का पर्व देशभर में बहुत उत्साह से मनाया जा रहा है। ऐसे में पंचाग के मुताबिक, आज 16 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। यह दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को पूरी तरह समर्पित होता है।
मां कात्यायनी असीम साहस, शक्ति और अधिकारों की देवी मानी जाती हैं। उन्होंने दुष्ट महिषासुर का वध करके देवताओं को भयमुक्त किया था। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से देवी प्रसन्न हुई थीं। उन्होंने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेकर यह नाम पाया।
मां कात्यायनी की पूजा करने से साधक को कभी डर महसूस नहीं होता। यह दिन हमें अपने विचारों को मजबूती से रखना सिखाता है। हमें जीवन में गलत बातों के खिलाफ मुखर होना चाहिए। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि, पौराणिक कथा और नियमों की पूरी जानकारी।
मां कात्यायनी की पौराणिक कथा
देवी भागवत पुराण के मुताबिक, महिषासुर के अत्याचारों से जब तीनों लोक कांप उठे और देवता बेबस हो गए, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से एक दिव्य शक्ति का प्राकट्य हुआ।
सबसे पहले महर्षि कात्यायन ने अपने कठोर तप के बल पर इस महाशक्ति की आराधना की। उनकी निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर देवी भगवती ने उनके आश्रम में उनकी पुत्री के रूप में अवतार लिया।
महर्षि कात्यायन की पुत्री कहलाने के कारण ही देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। महर्षि कात्यायन ने आश्विन शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी तक तीन दिनों तक देवी की पूरे विधि-विधान से पूजा की।
इसके बाद दशमी के दिन मां कात्यायनी ने अपने प्रचंड रूप, दिव्य अस्त्रों और निर्भीक पराक्रम से दुष्ट महिषासुर का वध कर दिया। देवी भागवत पुराण में मां कात्यायनी को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाली कल्याणी देवी माना गया है। जब महिषासुर का अत्याचार बहुत बढ़ गया, तब देवी ने उसका अंत किया। इसलिए देवी को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
- सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े (पीले या लाल) पहनें और मां कात्यायनी की पूजा का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और शुद्ध देसी घी का दीपक और धूप जलाएं।
- देवी मां को रोली, अक्षत (चावल), हल्दी और लाल या पीले रंग के फूल (विशेषकर कनेर या गेंदे) अर्पित करें।
- मां कात्यायनी को सबसे प्रिय शहद या शहद से बनी चीजों का भोग लगाएं।
- "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः" मंत्र का एक माला जाप करें और अंत में माँ की आरती उतारकर सभी में प्रसाद बांटें।
मां का पसंदीदा भोग और प्रिय रंग
देवी भागवत पुराण के मुताबिक, मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना सबसे प्रिय माना जाता है। भोग लगाने से साधक को सुंदर रूप और सेहत मिलती है। इस दिन लाल या पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना गया है। यह रंग मन में ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है।
मां कात्यायनी का मंत्र
"ॐ देवी कात्यायन्यै नमः"
अर्थ: जिनके हाथों में चंद्रहास नामक दिव्य और चमकदार खड्ग (तलवार) सुशोभित है। जो सिंह (शेर) की सवारी पर विराजमान हैं। जो दुष्ट राक्षसों और दानवों का संहार करने वाली हैं। ऐसी मां कात्यायनी हमारे जीवन में हमेशा शुभता, सफलता और कल्याण प्रदान करें।
पूजा में क्या करें और क्या न करें
- पूजा के दिन पीले, लाल या नारंगी रंग के साफ वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- मां कात्यायनी को शहद या शहद से बनी चीजों का भोग अवश्य अर्पित करें।
- देवी को पीले और लाल रंग के फूल (विशेषकर गेंदे या कनेर) चढ़ाएं।
- इस दिन कन्याओं, महिलाओं और बुजुर्गों का दिल से सम्मान करें और उनसे आशीर्वाद लें।
क्या न करें
- पूजा के दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें।
- पूजा में काले या बहुत गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
- किसी के प्रति क्रोध, ईर्ष्या, छल या कटु वचनों का प्रयोग न करें।
- यदि अखंड ज्योति जलाई है, तो ध्यान रखें कि हवा या तेल की कमी से वह बुझे नहीं।
- संकल्प लेने के बाद पूजा को बीच में छोड़कर न उठें, पूरी विधि के बाद ही क्षमा प्रार्थना करके उठें।
मां कात्यायनी हमें क्या सिखाती हैं
मां कात्यायनी का स्वरूप हमें आत्मरक्षा, निडरता और अपने विचारों पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है। देवी की साधना हमें यह सिखाती है कि सही बात के लिए आवाज उठाना और किसी भी प्रकार के अन्याय या शोषण के सामने न झुकना ही सच्चा धर्म है।
आज के आधुनिक युग में सोशल मीडिया पर ट्रोल्स और नकारात्मक तत्वों का डटकर मुकाबला करना आत्मसम्मान की पहली शर्त है। अपनी मानसिक शांति और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जीवन में "ना" कहना सीखना बहुत जरूरी है।
हर गलत बात पर सहमति जताना केवल तनाव को बढ़ाता है। इसलिए टॉक्सिक और नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूरी बनाकर अपनी सीमाएं तय करना आवश्यक है। इसके साथ ही, मां कात्यायनी का सीधा संबंध प्रकृति, जंगलों और जड़ी-बूटियों के संरक्षण से भी है। पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना देवी की सच्ची आराधना मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्रि के छठे दिन मां की विधिवत पूजा करने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। साथ ही, नौकरी और बिजनेस में सफलता मिलने से करियर में तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं।
मां कात्यायनी की आरती
जय जय कात्यायनि माता।
कीर्ति तुम्हारी जग में विख्याता॥
जय सर्वव्यापी जय जगद्धात्री।
महाशक्ति जय जय जगन्माता॥
कात्यायन ऋषि के घर आई।
ऋषियों की तुम विपदा मिटाई॥
ब्रह्मा विष्णु महेश भी ध्यावें।
नारद शारद शीश नवावें॥
सिंह सवारी अति मन भावे।
स्वर्ण कांति तन पर छवि छावे॥
चार भुजाएं सोहैं भारी।
खड्ग-कमल धारे त्रिपुरारी॥
महिषासुर को तुम ने मारा।
देवों का कष्ट तुमने टारा॥
सच्चे मन से जो तुम्हें ध्यावे।
जन्म-मरण से मुक्ति पावे॥
कन्याएं जो व्रत तुम्हारा करें।
सुयोग्य वर की प्राप्ति करें॥
दुख-दरिद्र सब दूर भगाओ।
सुख-संपत्ति का वास कराओ॥
जय जय कात्यायनि महामाई।
भक्तों पर कृपा करो सदाई॥
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
- मां कात्यायनी की पूजा क्यों की जाती है?
मां कात्यायनी की पूजा असीम साहस, शक्ति और अधिकारों की देवी के रूप में की जाती है। यह पूजा करने से साधक को डर महसूस नहीं होता और यह सही बात के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। - मां कात्यायनी की पूजा विधि क्या है?
मां कात्यायनी की पूजा विधि में सुबह जल्दी स्नान कर साफ पीले या लाल कपड़े पहनना, देवी की मूर्ति या चित्र स्थापित करना, देसी घी का दीपक जलाना, शहद का भोग लगाना और 'ॐ देवी कात्यायन्यै नमः' मंत्र का जाप करना शामिल है। - मां कात्यायनी के पूजन में क्या न करना चाहिए?
पूजा के दिन लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनने, किसी के प्रति क्रोध या कटु वचन बोलने से भी बचना चाहिए।