सावन 2025: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों और शिव पुराण का इसका आध्यात्मिक महत्व
Kaushiki | Jul 11, 2025, 08:08 IST
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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्रImage credit : Kaushiki
माना जाता है कि यह 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग है, जिसका नाम भक्त घुष्मा के नाम पर रखा गया है और यह भोलेनाथ की अनन्य भक्ति का प्रतीक है।
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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात)Image credit : Kaushiki
माना जाता है कि नागों के देवता शिव के इस मंदिर में सर्प दोष से मुक्ति के लिए विशेष पूजा की जाती है और श्रद्धालु यहां विशेष अनुष्ठान करते हैं।
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12 ज्योतिर्लिंगImage credit : Kaushiki
धर्म ज्योतिष न्यूज: 12 ज्योतिर्लिंगों (12 Jyotirlinga) में भगवान शिव का दिव्य स्वरूप मौजूद है, जिनकी पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव पुराण के अध्ययन से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मिलता है
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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु)Image credit : Kaushiki
ऐसा माना जाता है कि, स्वयं भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित यह ज्योतिर्लिंग चार धामों में से एक है और इसकी पूजा करने से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है।
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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)Image credit : Kaushiki
ऐसा माना जाता है कि, सह्याद्रि पर्वत पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव भी कहते हैं और यह शिवभक्तों की श्रद्धा का केंद्र है।
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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश)Image credit : Kaushiki
कृष्णा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर दक्षिण का कैलाश कहलाता है और ऐसा माना जाता है कि अश्वमेघ यज्ञ के बराबर पुण्य प्रदान करता है।
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वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (झारखंड)Image credit : Kaushiki
ऐसा माना जाता है कि, इसे चिताभूमि कहा जाता है और यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का हृदय गिरा था, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व बढ़ जाता है।
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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)Image credit : Kaushiki
ऐसा माना जाता है कि, यह गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के पास स्थित है और इसे दक्षिण भारत में गंगा के समान पवित्र माना जाता है।
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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)Image credit : Kaushiki
यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के तट पर स्थित है और इसका आकार 'ॐ' की आकृति बनाता है, जिससे इसकी दिव्यता और बढ़ जाती है।
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केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड)Image credit : Kaushiki
हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित यह ज्योतिर्लिंग कठिन यात्रा के बाद प्राप्त होता है और तीर्थयात्रियों के लिए आध्यात्मिक शांति का केंद्र है।