अब उज्जैन महाकाल मंदिर से खाली हाथ नहीं लौटेंगे श्रद्धालु, भक्तों को फ्री में मिलेगा बाबा का प्रसाद और बेलपत्र

Kaushiki | Oct 03, 2026, 11:00 IST
उज्जैन में भक्तों के लिए महाकाल समिति का बड़ा उपहार
उज्जैन के महाकाल मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन करने आने वाला कोई भी भक्त अब खाली हाथ वापस नहीं लौटेगा। मंदिर में प्रवेश करने वाले हर श्रद्धालु को बाबा का आशीर्वाद मिलेगा। मंदिर प्रबंध समिति ने दो अक्टूबर से निःशुल्क प्रसाद वितरण अभियान शुरू कर दिया है। आइए जानें इस नई पहल के बारे में...
No devotee will return empty handed from Mahakal Mandir Ujjain. Free prasad distribution has started for all pilgrims.

मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। अब बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद कोई भी भक्त खाली हाथ वापस नहीं जाएगा। मंदिर में आने वाले हर श्रद्धालु को बाबा का प्रसाद दिया जाएगा।



मंदिर प्रबंध समिति ने शुक्रवार से मुफ्त प्रसाद बांटने की नई व्यवस्था शुरू की है। यानी अब दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्रसाद के रूप में भी मिलेगा। आइए जानते हैं, मंदिर की इस नई पहल में क्या खास है और श्रद्धालुओं को प्रसाद कैसे मिलेगा।



महाकाल मंदिर की नई व्यवस्था

उज्जैन के महाकाल मंदिर में अब बड़ा बदलाव हुआ है। अब दर्शन के बाद हर भक्त को प्रसाद मिलेगा। दो अक्टूबर से इस खास योजना का शुभारंभ कर दिया गया है। मंदिर के पुजारियों ने पहले बाबा को भोग लगाया। सवा क्विंटल प्रसादी का महाभोग भगवान को अर्पित किया गया। इसके बाद आम श्रद्धालुओं में इसे बांटा गया। भक्तों को अब प्रसाद के लिए पैसे नहीं देने होंगे। यह सेवा पूरी तरह निश्शुल्क रखी गई है। मंदिर समिति का यह कदम काफी सराहनीय माना जा रहा है।



उज्जैन में भक्तों के लिए सुविधा

मंदिर प्रशासन ने निकास मार्ग के पास काउंटर बनाए हैं। एग्जिट टनल और एग्जिट रैंप के पास यह सुविधा है। नंदी हॉल से बाहर निकलते ही काउंटर दिखेगा। श्रद्धालुओं को कतार में खड़े होकर आसानी से प्रसाद मिल जाएगा। इससे भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। किसी को कोई असुविधा नहीं होगी। दूर से आए श्रद्धालुओं के लिए यह बड़ी राहत है। वे अब भगवान का आशीर्वाद अपने घर ले जा सकेंगे। इससे उनकी यात्रा बेहद यादगार और सुखद बन जाएगी।



निःशुल्क प्रसाद के साथ बेलपत्र

इस योजना में एक और खास बात जोड़ी गई है। भक्तों को सिर्फ खाने का प्रसाद ही नहीं मिलेगा। उन्हें भगवान महाकाल पर चढ़ाया गया बेलपत्र भी मिलेगा। साथ ही बाबा का फूल भी आशीर्वाद स्वरूप दिए जाएंगे। इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और अधिक गहरी होगी। पहले मंदिर में केवल लड्डू प्रसाद की बिक्री होती थी। बेसन और सूजी के लड्डू काउंटर पर बिकते थे।



महाकाल परिसर में अन्य बदलाव

अब इस योजना को स्थायी रूप से चलाया जाएगा। रोजाना आने वाले लाखों भक्तों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। मंदिर समिति ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके अलावा मंदिर में निःशुल्क कलावा भी बांधा जाता है। हालांकि वहां अभी सूचना बोर्ड नहीं लगे हैं। भक्तों की मांग है कि वहां बोर्ड लगाए जाएं। बोर्ड लगने से लोग दानपेटी में स्वेच्छा से दान दे सकेंगे।



इससे मंदिर की आय में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। व्यवस्थाएं और अधिक बेहतर हो सकेंगी। आपको बता दें कि सीएम मोहन यादव की पहल पर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए तिलक और प्रसाद वितरण की पुरानी व्यवस्था फिर से शुरू की जा रही है। उप प्रशासक सिम्मी यादव के मुताबिक, इस इनोवेशन का मेन ऑब्जेक्टिव सभी भक्तों तक भगवान की कृपा और प्रसाद आसानी से पहुंचाना है।



उज्जैन महाकाल के दर्शन का महत्व

महाकाल मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। त्योहारों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। ऐसे में सभी को आसानी से प्रसाद मिलना बहुत बड़ी बात है। मंदिर समिति के इस फैसले की हर जगह तारीफ हो रही है। भक्त बेहद खुश नजर आ रहे हैं। अगर आप भी उज्जैन जाने का प्लान बना रहे हैं। तो अब आपको बाबा का दिव्य आशीर्वाद जरूर मिलेगा। आपकी उज्जैन यात्रा अब और भी खास होने वाली है।



  1. महाकालेश्वर मंदिर में नई व्यवस्था कब लागू हुई?
    महाकालेश्वर मंदिर में नई व्यवस्था दो अक्टूबर से लागू हुई है।
  2. इस नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को क्या मिलेगा?
    इस नई व्यवस्था के तहत हर श्रद्धालु को दर्शन के बाद निश्शुल्क प्रसाद मिलेगा, जिसमें भगवान महाकाल पर चढ़ाया गया बेलपत्र और पवित्र पुष्प भी शामिल हैं।
  3. यह नई प्रसाद वितरण व्यवस्था भक्तों के लिए कैसे फायदेमंद है?
    यह नई प्रसाद वितरण व्यवस्था भक्तों के लिए फायदेमंद है क्योंकि इससे उन्हें आसानी से प्रसाद मिल सकेगा और उनकी यात्रा को यादगार और सुखद बनाने में मदद मिलेगी।
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