CBSE री-इवैल्यूएशन डेडलाइन बढ़ी: अब 7 जून तक कर सकते हैं आवेदन
समझें क्या है पूरा मामला
- CBSE ने 12वीं बोर्ड आंसर शीट वेरिफिकेशन की आखिरी तारीख बढ़ाकर 7 जून कर दी।
- यह फैसला पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों और साइबर हमलों के कारण लिया गया।
- 4 जून तक कुल 70 हजार 433 आवेदन प्राप्त हो चुके थे, जिनमें 63 हजार 119 री-इवैल्यूएशन के थे।
- साइबर हमले के बाद CBSE ने दिल्ली पुलिस में FIR दर्ज कराई है।
- OSM सिस्टम में गड़बड़ी के आरोपों के बाद चेयरमैन और सचिव का तबादला किया गया।
डेडलाइन क्यों बढ़ाई?
CBSE ने 2 जून को पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल शुरू किया था। पोर्टल खुलते ही छात्रों को दिक्कतें आने लगीं। कई छात्र आवेदन नहीं कर पाए। इसी को देखते हुए बोर्ड ने आखिरी तारीख एक दिन बढ़ा दी।
बोर्ड ने साफ किया कि यह फैसला छात्रों की परेशानी को ध्यान में रखकर लिया गया है। तकनीकी समस्याओं की वजह से कई आवेदन अटके हुए थे।
साइबर हमले की पूरी कहानी
पोर्टल शुरू होते ही कुछ लोगों ने इसे ठप करने की कोशिश की। उन्होंने 'डिनायल ऑफ सर्विस' यानी DoS हमला किया। महज दो मिनट में वेबसाइट पर 15 लाख हिट्स आ गईं।
इसके अलावा एक लाख से ज्यादा बार बिना अनुमति फाइल खोलने की कोशिश की गई। बोर्ड ने बताया कि तीन दिनों तक लगातार हमले हुए, लेकिन सभी को समय रहते रोक लिया गया।
किसी भी तरह का डेटा लीक नहीं हुआ। अनधिकृत पहुंच का भी कोई मामला सामने नहीं आया। CBSE ने दिल्ली पुलिस में FIR दर्ज कराई और जांच शुरू हो गई है।
किन एजेंसियों ने बचाया पोर्टल?
साइबर हमलों से निपटने के लिए कई बड़ी संस्थाओं की मदद ली गई। IIT कानपुर, IIT मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC), I4C, CERT-In और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की साइबर सुरक्षा टीमों ने मिलकर पोर्टल की रक्षा की।
यह दिखाता है कि बोर्ड ने स्थिति को गंभीरता से लिया। देश की शीर्ष तकनीकी संस्थाओं को इस काम में लगाया गया।
रिजल्ट के बाद से क्यों घिरा है CBSE?
CBSE ने इस बार पहली बार OSM यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (CBSE Revaluation) लागू किया था। इसमें छात्रों की कॉपियां स्कैन करके डिजिटल तरीके से जांची गईं। बोर्ड ने दावा किया था कि इससे मूल्यांकन ज्यादा पारदर्शी होगा।
13 मई 2026 को 12वीं का रिजल्ट आया। इस बार पास प्रतिशत 85.20 रहा। पिछले साल यानी 2025 में यह 88.39 था। यानी 3.19 प्रतिशत की गिरावट आई।
रिजल्ट आते ही सोशल मीडिया पर छात्रों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ ने कहा कि उनकी स्कैन की गई कॉपियां धुंधली थीं। कुछ का दावा था कि उनके कुछ जवाब चेक ही नहीं हुए। और कई छात्रों को उम्मीद से बहुत कम अंक मिले।
वेदांत की कॉपी विवाद ने बदल दी बात
दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव के मामले ने पूरे विवाद को नई दिशा दी। वेदांत ने दावा किया कि री-इवैल्यूएशन में उसे फिजिक्स की अपनी कॉपी की जगह किसी दूसरे छात्र की कॉपी भेज दी गई।
CBSE ने गलती मानी और सही कॉपी उपलब्ध कराई। लेकिन इस घटना ने OSM सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। लोगों ने पूछा कि अगर एक मामले में यह गलती हुई, तो और कितने मामलों में हुई होगी।
चेयरमैन का तबादला, जांच के आदेश
CBSE को घेरते विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया। बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया। साथ ही OSM सिस्टम से जुड़ी खरीद प्रक्रिया और तकनीकी खामियों की जांच के आदेश भी दिए गए।
यह पहली बार है जब किसी बोर्ड रिजल्ट के बाद इतने बड़े प्रशासनिक बदलाव हुए हों। छात्रों और अभिभावकों के गुस्से ने सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर किया।
अब आगे क्या?
जिन छात्रों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, उनके पास 7 जून तक का मौका है। री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया जारी है। जांच भी चल रही है। आने वाले हफ्तों में यह साफ होगा कि OSM सिस्टम में वाकई कितनी बड़ी खामियां थीं।
ये भी पढ़ें...
क्यों मनाया जाता है World Food Safety Day, क्या है इसका महत्व
पेपरलेस काम के लिए तुरंत डाउनलोड करें ये Government Apps
Foreign Scholarships 2026: भारतीय छात्रों को विदेश में फ्री पढ़ाई का मौका
MP में फास्ट ट्रैक ग्रेजुएशन: अब 3 साल की डिग्री 2 साल में मिलेगी, जानें नया नियम