सीबीएसई का बड़ा फैसला: 9वीं के छात्रों को बोलने और सुनने पर मिलेंगे ज्यादा नंबर

Manya Jain | Jul 04, 2026, 12:32 IST
cbse class 9 third language rule spoken
सीबीएसई ने कक्षा 9 की तीसरी भाषा के मूल्यांकन में बदलाव किया है। अब बोलने और सुनने को सबसे ज्यादा 40 अंक मिलेंगे। नया नियम सत्र 2026-27 से लागू होगा।

सीबीएसई की ओर से स्कूली शिक्षा में एक नया बदलाव किया गया है। कक्षा नौवीं में तीसरी भाषा के मूल्यांकन का तरीका अब पूरी तरह बदल गया है। अब विद्यार्थियों को लिखने-पढ़ने से ज्यादा बोलने और सुनने पर अंक मिलेंगे।



यह बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत किया गया है। सीबीएसई ने इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया है। इसका मकसद बच्चों को भाषा में सहज बनाना है।



सबसे ज्यादा अंक बोलने के

बोर्ड ने ‘ओरल-फर्स्ट पेडागोजी’ (मौखिक-प्रथम शिक्षण पद्धति) अपनाई है। इसके तहत 100 अंकों के मूल्यांकन में 40 अंक लिसनिंग और स्पीकिंग के लिए रखे गए हैं। यह सबसे बड़ा हिस्सा है।



बाकी अंकों का बंटवारा भी तय है। रीडिंग को 20 अंक मिलेंगे। रचनात्मक लेखन को 15, पाठ्यपुस्तक आधारित लेखन को 10 और प्रोजेक्ट वर्क को 15 अंक दिए गए हैं।



यह पाठ्यक्रम एनसीईआरटी (NCERT – National Council of Educational Research and Training) ने तैयार किया है। मकसद है कि बच्चे पहले भाषा सुनें, फिर समझें। इसके बाद वे आत्मविश्वास से बोल सकें।



साल भर चलेगा मूल्यांकन

लिसनिंग और स्पीकिंग की परीक्षा एक दिन में नहीं होगी। यह पूरे सत्र में अलग-अलग गतिविधियों से होगी। शिक्षकों को आठ गतिविधियां चुननी होंगी।



हर गतिविधि के पांच अंक तय हैं। इस तरह कुल 40 अंक पूरे होंगे। गतिविधियों में सुनकर जवाब देना शामिल है।



चित्र वर्णन, समूह चर्चा और रोल प्ले भी होंगे। परिवार का परिचय देना और वाद-विवाद भी शामिल है। दैनिक जीवन के संवाद भी अंक देंगे।



स्कूलों को छूट दी गई है। वे छात्रों की रुचि के अनुसार गतिविधि चुन सकते हैं। इससे बच्चों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।



पढ़ने-लिखने का हिस्सा भी तय

रीडिंग के लिए दो गद्यांश दिए जाएंगे। हर गद्यांश करीब 100 शब्दों का होगा। इन पर बहुविकल्पीय और लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे।



रचनात्मक लेखन में भी कई हिस्से हैं। इसमें 30-40 शब्दों का निमंत्रण या संदेश शामिल है। चित्र वर्णन और छोटी कहानी भी लिखनी होगी।



पाठ्यपुस्तक आधारित लेखन के लिए अलग से 10 अंक हैं। इसमें लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न होंगे। यह हिस्सा पाठ्यक्रम पर आधारित रहेगा।



प्रोजेक्ट में सजावट नहीं, सोच जरूरी

प्रोजेक्ट वर्क के लिए 15 अंक तय हैं। इसमें स्थानीय त्योहार, लोक कला और क्षेत्रीय संस्कृति जैसे विषय सुझाए गए हैं। स्थानीय साहित्यकार पर भी प्रोजेक्ट बन सकता है।



बोर्ड ने साफ कहा है, सजावट पर अंक नहीं मिलेंगे। मौलिकता और शोध को अहमियत दी जाएगी। विषयवस्तु की गुणवत्ता ही मायने रखेगी।



प्रोजेक्ट के साथ मौखिक परीक्षण भी होगा। इसके पांच अंक अलग से तय हैं। यानी प्रोजेक्ट और वाइवा मिलाकर पूरे 20 अंक बनते हैं, हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए 15 अंक ही निर्धारित हैं।



स्कूलों को मिले निर्देश

सीबीएसई ने सभी प्राचार्यों को निर्देश भेजे हैं। नया ढांचा प्रभावी तरीके से लागू करने को कहा गया है। अध्ययन सामग्री एनसीईआरटी की वेबसाइट पर डाल दी गई है।



बोर्ड ने स्कूलों से सुझाव भी मांगे हैं। सामग्री इस्तेमाल करने के बाद फीडबैक भेजना होगा। इससे भविष्य में सुधार किया जा सकेगा।



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