कौन हैं सार्थक सिद्धांत? जिन्होंने सरकारी टेंडर्स के डेटा से मचाया हड़कंप
समझें क्या है पूरा मामला...
- कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने सरकारी खरीद के 1.66 करोड़ रिकॉर्ड सार्वजनिक किए हैं।
- यह डेटा केंद्र सरकार के सीपीपी पोर्टल से लिया गया है।
- सार्थक पहले सीबीएसई टेंडर विश्लेषण के कारण चर्चा में आए थे।
- उनके निष्कर्ष संसद तक पहुंचे और उन्होंने स्थायी समिति के सामने प्रस्तुति दी।
- अब सार्थक ने सरकारी खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने का बड़ा अभियान शुरू किया है।
एक छात्र की शुरुआत, बड़ा असर
सार्थकसिद्धांत अभी12वीं में पढ़तेहैं। उम्रमें छोटे, लेकिनसोच में बड़े।उन्होंने वह काम कियाजो बड़े-बड़ेसंस्थान नहीं करपाए। सरकारी खरीद केलाखोंरिकॉर्ड, जो पहलेबिखरे पड़े थे,उन्हें एक जगह लाकरपब्लिक कर दिया।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सपर उन्होंनेलिखा किपारदर्शिता आसानी सेमिलनी चाहिए। औरअब वह मिलरही है।
CPP पोर्टल से कैसे लिया डेटा
सार्थक नेकेंद्रीय सार्वजनिक खरीदयानी सीपीपी(CPP – CentralPublicProcurement) पोर्टल सेकरीब 1.66करोड़ रिकॉर्डनिकाले। यह कामउन्होंने महज दोहफ्तों में किया।
यह डेटाअब नागरिकों,पत्रकारों और शोधकर्ताओं के लिएखुला है।उन्होंनेलोगों से कहा हैकि वे खुद डेटाबेसडाउनलोड करें। अपने हिसाबसे रिकॉर्डखंगालें। सरकारीखर्च पर नजर रखें।
सिर्फ जानकारी नहीं, जवाबदेही का हथियार
यह पोर्टलसिर्फ डेटा काभंडार नहीं है।सार्थक का कहना हैकि इससे सरकारीजवाबदेही बढ़ेगी। अबकोई भी नागरिक यहदेख सकता है किसरकार कहां, कितनाऔर किस पर खर्च कर रहीहै।
पत्रकारोंके लिए यह जांचपत्रकारिता यानीइन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म(InvestigativeJournalism) का बड़ा साधनबन सकता है। शोधकर्ताभी इस डेटा सेनीतियों का विश्लेषण करसकते हैं।
CBSE टेंडर से हुई थी शुरुआत
सार्थककी यहयात्रा एक निजी अनुभवसे शुरू हुई।उन्होंने अपनी आंसरकॉपी की स्कैन कॉपीदेखी। अंकोंमें फर्क दिखा।बात वहीं नहीं रुकी।उन्होंने सीबीएसईके ऑन स्क्रीन मार्किंगयानीओएसएम (OSM –On-Screen Marking)सिस्टम कोखंगाला।
टेंडरदस्तावेजों केअलग-अलग संस्करणोंकी तुलनाकी। प्रदर्शनशर्तों और प्रमाणननियमों में हुएबदलावों को नोटकिया।उनकाकहना है कि इनबदलावों से खरीदप्रक्रिया पर सवाल खड़े होतेहैं।
संसद तक पहुंची बात
सार्थक केनिष्कर्ष केवलसोशल मीडिया तकसीमित नहीं रहे।शिक्षा संबंधीसंसदीय स्थायीसमिति नेउन्हें अपने सामनेबुलाया।उन्होंने वहांमूल्यांकन प्रणालीऔर खरीदप्रक्रिया पर अपनी बातरखी।यह एकअसाधारण बात है।किसी छात्र का इसतरह संसदीयसमिति के सामने पेशहोना बहुत कमसुनने को मिलताहै।
आगे क्या है योजना?
सार्थकने इसे एक बड़ेपारदर्शिता अभियान कीशुरुआत बताया है। अभीसरकारी खरीदके रिकॉर्डपब्लिक किए गए हैं।आगे और क्षेत्रोंमें यही काम होसकता है।उनकासंदेश साफ है।सरकारी डेटा आम लोगों काहक है। उसे आसानऔर सुलभ होना चाहिए।
FAQ
- सार्थक सिद्धांत ने कौन सा पोर्टल बनाया और इसमें क्या है?
सार्थक ने एक पब्लिक पोर्टल बनाया है जिसमें सरकार के CPP पोर्टल से लिए गए करीब 1.66 करोड़ खरीद रिकॉर्ड हैं। यह डेटा नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं के लिए मुफ्त उपलब्ध है। कोई भी इसे डाउनलोड करके सरकारी खर्च की जांच कर सकता है। - सार्थक पहले किस वजह से चर्चा में आए थे?
सार्थक ने CBSE के OSM सिस्टम और डिजिटल मूल्यांकन से जुड़े टेंडर दस्तावेजों का विश्लेषण किया था। उनके निष्कर्षों पर शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन्हें बुलाया। वहां उन्होंने मूल्यांकन प्रणाली पर अपनी बात रखी। - इस पोर्टल से आम नागरिक को क्या फायदा होगा?
इस पोर्टल से कोई भी नागरिक सरकारी खरीद का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकता है। इससे सरकारी खर्च पर जवाबदेही बढ़ेगी। पत्रकार और शोधकर्ता भी इस डेटा से जांच और विश्लेषण कर सकते हैं।
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