इन्वेस्टमेंट बैंकर बनकर कमा सकते हैं करोड़ों, जानें कोर्स, स्किल और सैलरी रोडमैप
फाइनेंस की पढ़ाई करने वाले युवाओं में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग का करियर सबसे आकर्षक माना जाता है। इस फील्ड में करोड़ों की कमाई और बड़ी ग्लोबल डील्स में काम करने का मौका मिलता है।
लेकिन इस करियर का रास्ता आसान नहीं, इसमें मजबूत फाइनेंस ज्ञान और कई स्किल जरूरी हैं। CEO अश्विनी बजाज के मुताबिक CA, CFA और MBA जैसे कोर्स इस फील्ड के लिए मजबूत आधार बनाते हैं। करियर एनालिस्ट से शुरू होकर मैनेजिंग डायरेक्टर तक पहुंचता है, जहां सैलरी करोड़ों में होती है।
क्या होता है इन्वेस्टमेंट बैंकर का काम
इन्वेस्टमेंट बैंकर का मुख्य काम कंपनियों को वित्तीय सलाह देना है। ये बैंकर कंपनियों को पूंजी जुटाने में मदद करते हैं। आईपीओ (IPO – Initial Public Offering) लाने में भी इनकी अहम भूमिका होती है। दो कंपनियों के मर्जर और बड़ी फाइनेंस डील में भी ये सलाहकार के रूप में काम करते हैं।
लेवरेज्ड ग्रोथ के सीईओ अश्विनी बजाज के मुताबिक यह सिर्फ नंबरों का खेल नहीं है। इसमें फाइनेंस की समझ के साथ कम्युनिकेशन और नेगोशिएशन भी जरूरी है। एनालिटिकल स्किल भी इस काम का अहम हिस्सा हैं।
कोई एक तय रास्ता नहीं
इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में जाने का कोई एक तय रास्ता नहीं है। लेकिन कुछ चीजें हमेशा मायने रखती हैं। फाइनेंस में मजबूत आधार बनाना सबसे पहली शर्त है। यह सिर्फ शुरुआत है, असली काम इसके बाद होता है।
सीएफए (CFA – Chartered Financial Analyst) जैसी क्वालिफिकेशन काफी मददगार होती है। यह इक्विटी रिसर्च और वैल्यूएशन में अच्छी समझ बनाती है। फिक्स्ड इनकम और कॉर्पोरेट फाइनेंस की जानकारी भी इसमें मिलती है।
MBA का रोल भी अहम
किसी अच्छे संस्थान से एमबीए (MBA – Master of Business Administration) करना भी फायदेमंद है। इससे इंडस्ट्री का सीधा अनुभव मिलता है। साथियों से सीखने और प्रोफेशनल ग्रूमिंग का मौका भी मिलता है। टॉप संस्थानों से अच्छे प्लेसमेंट के अवसर भी खुलते हैं। लेकिन असली फर्क प्रैक्टिकल अनुभव से आता है। डिग्रियां सिर्फ दरवाजा खोलती हैं। असली काम तभी शुरू होता है जब आप मैदान में उतरते हैं।
इक्विटी रिसर्च से करें शुरुआत
बहुत से इच्छुक इन्वेस्टमेंट बैंकर पहले छोटी भूमिकाओं से शुरुआत करते हैं। इक्विटी रिसर्च, वैल्यूएशन या फाइनेंशियल मॉडलिंग इसके अच्छे रास्ते हैं। ट्रांजैक्शन एडवाइजरी की भूमिका भी मजबूत आधार बनाती है। इन कामों से किताबी ज्ञान असली बिजनेस की समझ में बदलता है।
यह फील्ड नेटवर्क पर भी बहुत निर्भर करती है। यहां अच्छी सेल्स स्किल जरूरी हैं। प्रोफेशनल्स अपना ज्यादातर समय क्लाइंट और इन्वेस्टर से बात करने में बिताते हैं। सीनियर मैनेजमेंट के साथ भी लगातार बातचीत होती रहती है।
12वीं के बाद कौन सा कोर्स चुनें
फाइनेंस सेक्टर में जाने वाले छात्रों के लिए कई विकल्प हैं। सीए (CA – Chartered Accountancy) एक मजबूत रास्ता है। यह कोर्स अकाउंटिंग, टैक्सेशन और कॉस्टिंग में मजबूत आधार देता है। साथ ही लॉ और ऑडिटिंग की समझ भी बनती है।
मार्केट और कोर फाइनेंस में रुचि है तो सीएफए बेहतर है। इस प्रोग्राम में इक्विटी और फिक्स्ड इनकम की पढ़ाई होती है। अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट की जानकारी भी मिलती है। कॉर्पोरेट फाइनेंस का गहरा ज्ञान भी हासिल होता है।
टॉप क्वालिफिकेशन का कॉम्बिनेशन
टॉप संस्थान से एमबीए करना भी अच्छा विकल्प है। इसमें मार्केटिंग और एचआर (HR – Human Resources) की समझ बनती है। ऑपरेशन्स और ऑर्गनाइजेशनल बिहेवियर पर भी फोकस होता है। कैंपस प्लेसमेंट के बेहतरीन मौके भी मिलते हैं।
कई प्रोफेशनल्स की राय है कि कॉम्बिनेशन सबसे मजबूत है। CA+CFA+MBA जैसा मिश्रण असरदार माना जाता है। यह टेक्निकल ज्ञान देता है और कॉर्पोरेट लीडरशिप के लिए भी तैयार करता है।
सामान्य ग्रेजुएशन वालों का रास्ता
12वीं के बाद सामान्य ग्रेजुएशन करने वाले भी इस फील्ड में आ सकते हैं। टॉप बीकॉम (BCom – Bachelor of Commerce) कॉलेजों से इंटर्नशिप के जरिए रास्ता खुलता है। कई लोग बिग 4 या कंसल्टिंग रोल से करियर शुरू करते हैं। वैल्यूएशन या एडवाइजरी में अनुभव लेकर वे धीरे-धीरे इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में आते हैं।
कौन सी स्किल हैं जरूरी
इस फील्ड में कई स्किल का तालमेल जरूरी है। अच्छी कम्युनिकेशन और इंटरपर्सनल स्किल पहली शर्त है। डेटा को व्यवस्थित करने की टेक्निकल स्किल भी अहम है। एआई (AI – Artificial Intelligence) मॉडल की समझ भी अब जरूरी हो गई है। फाइनेंस के कॉन्सेप्ट पर मजबूत पकड़ होनी चाहिए। एक्सेल और फाइनेंशियल मॉडलिंग में महारत भी जरूरी है। यह वैल्यूएशन के काम में सीधे इस्तेमाल होती है।
करियर ग्रोथ का रास्ता
इस फील्ड में करियर का सफर लंबा और चढ़ाई वाला है। शुरुआत आमतौर पर एनालिस्ट के पद से होती है। फिर एसोसिएट और वाइस प्रेसिडेंट का स्तर आता है। आगे डायरेक्टर और फिर मैनेजिंग डायरेक्टर तक का सफर होता है।
जिम्मेदारियां भी हर स्तर पर बदलती हैं। शुरुआत में काम पूरा करने और एनालिसिस पर फोकस होता है। बाद में क्लाइंट मैनेजमेंट और डील शुरू करने का काम मिलता है। बिजनेस डेवलपमेंट भी सीनियर स्तर पर अहम जिम्मेदारी बन जाता है।
सैलरी का पूरा गणित
सैलरी रोल, अनुभव और संस्थान के हिसाब से अलग-अलग होती है। एंट्री लेवल के सपोर्ट रोल में सालाना 5 से 10 लाख मिल सकते हैं। मुख्य इन्वेस्टमेंट बैंकिंग रोल में सैलरी इससे काफी ज्यादा होती है।
सीनियर स्तर पर सैलरी का बड़ा हिस्सा बोनस से आता है। परफॉर्मेंस आधारित पेमेंट भी इसमें जुड़ता है। बैंकर आईपीओ, एमएंडए (M&A – Mergers and Acquisitions) और फंड जुटाने जैसी डील पर काम करते हैं। बड़ी कॉर्पोरेट डील पर भी इनकी अहम भूमिका होती है।
करोड़ों तक पहुंचती है कमाई
इनकी आय में फिक्स्ड सैलरी कमी होती है। परफॉर्मेंस बोनस और डील बोनस इसमें बड़ा हिस्सा होते हैं। लॉन्ग टर्म इंसेंटिव भी कमाई का हिस्सा हैं। वीपी (VP – Vice President), डायरेक्टर और एमडी (MD – Managing Director) के पदों पर कमाई कई गुना बढ़ जाती है। बड़े ग्लोबल बैंकों में सालाना कमाई करोड़ों में पहुंच जाती है।
फायदे के साथ चुनौतियां भी
यह फील्ड जितनी कमाई देती है, उतनी ही डिमांडिंग भी है। यहां लंबे समय तक काम करना पड़ता है। काम का दबाव बहुत ज्यादा होता है। लगातार नई चीजें सीखते रहना पड़ता है।
इसलिए सिर्फ कमाई के लिए यह करियर मत चुनिए। फाइनेंस, बिजनेस और प्रॉब्लम-सॉल्विंग में सच्ची रुचि होनी चाहिए। लोगों से जुड़ने का स्वभाव भी जरूरी है। यहां सफलता उन्हीं को मिलती है जो टेक्निकल और कम्युनिकेशन स्किल का तालमेल बना लेते हैं।
ये भी पढ़ें...
डिफेंस और एयरोस्पेस में जॉब के लिए कैसे सीखें रशियन भाषा, यहां से लें स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
लग्जरी ब्रांड्स, डिजाइनिंग और फूड इंडस्ट्री में जॉब के लिए कैसे सीखें Italian Language
कौन हैं सार्थक सिद्धांत? जिन्होंने सरकारी टेंडर्स के डेटा से मचाया हड़कंप
भारतीय छात्रों में क्यों कम हो रहा अमेरिका का क्रेज, यूरोपीय देशों की तरफ बढ़े छात्र