JEE Advanced 2026: IIT में बेटियों ने रचा इतिहास, पहली बार 10 हजार से ज्यादा छात्राएं पास
JEE Advanced Result.जेईई एडवांस्ड 2026 के नतीजों में पहली बार 10 हजार 107 छात्राओं ने सफलता हासिल की है। परीक्षा में शामिल होने वाली लगभग हर चार में से एक छात्रा ने इस बार बाजी मारी है। साल 2019 के मुकाबले आईआईटी क्वालीफाई करने वाली लड़कियों की संख्या 89% बढ़ी है।
सरकार की सुपरन्यूमेररी सीट्स योजना (Supernumerary Seats Scheme) से यह बड़ा बदलाव आया है। लड़कियों का यह शानदार प्रदर्शन स्टेम (STEM) शिक्षा में लैंगिक समानता का एक बड़ा मील का पत्थर है।
2019 के मुकाबले पास छात्राओं में 89% का उछाल
अगर हम पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो यह बदलाव बेहद हैरान करने वाला और सुखद है। साल 2019 में आईआईटी परीक्षा पास करने वाली लड़कियों की संख्या केवल 5 हजार 356 थी। लेकिन साल 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर सीधे 10 हजार 107 पहुंच गया है। यानी इसमें पूरे 89 प्रतिशत की भारी बढ़त दर्ज की गई है।
| मुख्य मापदंड (Exam Matrix) | साल 2019 | साल 2026 | कुल बढ़त (Growth %) |
| परीक्षा में शामिल कुल छात्राएं | 33 हजार 249 | 40 हजार 562 | लगभग 22% |
| सफलता पाने वाली छात्राएं | 5 हजार 356 | 10 हजार 107 | लगभग 89% |
| छात्राओं का कुल पास प्रतिशत | 13.47% (2018) | 24.9% (2026) | रिकॉर्ड वृद्धि |
सुपरन्यूमेररी सीट्स योजना ने बदली तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि लड़कियों की इस सफलता के पीछे सरकार की एक खास नीति का बहुत बड़ा हाथ है। केंद्र सरकार ने साल 2018 में आईआईटी संस्थानों में लड़कियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सुपरन्यूमेररी सीट्स योजना (Supernumerary Seats Scheme) की शुरुआत की थी। इसके तहत केवल छात्राओं के लिए अतिरिक्त सीटें बनाई गई थीं।
इस योजना का मुख्य लक्ष्य पांच सालों के भीतर आईआईटी में लड़कियों का नामांकन (Enrolment) बढ़ाकर 20 फीसदी करना था। इस बार छात्राओं ने 20% के उस लक्ष्य को भी पार कर दिया है। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर शलभ ने बताया कि लड़कियों ने साबित कर दिया है कि वे आईआईटी की कठिन पढ़ाई को सफलतापूर्वक पूरा करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
क्या होती है सुपरन्यूमेरी सीटें
आईआईटी (IIT) में छात्राओं को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष व्यवस्था की गई है। यहां दाखिले के लिए सुपरन्यूमेरी सीटें तय की गई हैं। ये सीटें कॉलेज की सामान्य सीटों से बिल्कुल अलग होती हैं।
इनके होने से दूसरी कैटेगरीज की सीटों पर कोई असर नहीं पड़ता। किसी भी छात्र की नियमित सीट में कटौती नहीं की जाती है।
वर्तमान नियमों के तहत छात्राओं के लिए 20 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य तकनीकी शिक्षा में लड़कियों की संख्या बढ़ाना है। यह व्यवस्था बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित कर रही है।
इससे देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्राओं की भागीदारी बढ़ी है। यह नियम इंजीनियरिंग के क्षेत्र में लैंगिक असमानता को दूर करता है।
आईआईटी न मिलने पर भी बनेगा करियर
जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced Exam) की कॉमन रैंक लिस्ट में आने का मतलब यह नहीं है कि आईआईटी में सीट पक्की हो गई है। देश के सभी 23 आईआईटी संस्थानों में कुल मिलाकर करीब 20 हजार सीटें ही उपलब्ध हैं। लेकिन जिन छात्राओं को कम रैंक के कारण आईआईटी नहीं मिल पाएगा, वे भी निराश नहीं होंगी। वे अपने इसी शानदार स्कोर के दम पर देश के अन्य शीर्ष संस्थानों जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) या ट्रिपल आईटी (IIIT) में आसानी से प्रवेश पा सकेंगी।
नए कोर्सेज की तरफ बढ़ रही लड़कियां
आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर दीपांकर चौधरी ने बताया कि इंजीनियरिंग शिक्षा के बदलते स्वरूप ने भी लड़कियों को बहुत आकर्षित किया है। अब आईआईटी सिर्फ मैकेनिकल या सिविल जैसी पारंपरिक ब्रांचों तक ही सीमित नहीं रह गए हैं।
आज के समय में आईआईटी संस्थानों ने कई नए और इंटरडिसीप्लिनरी कोर्सेज (Interdisciplinary Programmes) शुरू किए हैं।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और डेटा साइंस।
- बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) और बायो-इंजीनियरिंग।
- एनर्जी स्टडीज और पर्यावरण विज्ञान (Environment Science)।
- फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में विशेष बैचलर ऑफ साइंस (BS) प्रोग्राम।
आमतौर पर कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी ब्रांचों में लड़कियां ज्यादा रुचि लेती थीं। लेकिन अब इन नए कोर्सेज के आने से उनके सामने करियर के विकल्पों की एक बहुत बड़ी रेंज मौजूद है।
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