अब सिर्फ टीचिंग डिप्लोमा वाले ही कर सकेंगे एमपी भोज यूनिवर्सिटी से बीएड, 5 मई तक करें अप्लाई

Kaushiki | Apr 22, 2026, 11:15 IST
mp bhoj university
भोज मुक्त विश्वविद्यालय ने बीएड एडमिशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सिर्फ टीचिंग डिप्लोमा धारक ही बीएड प्रवेश परीक्षा 2026 के लिए आवेदन कर सकेंगे।

MP Bhoj University: मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय (Madhya Pradesh Bhoj Open University) ने नया एकेडमिक सेशन शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने सेशन 2026-28 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। ये आवेदन बीएड और डीएलएड डिस्टेंस एजुकेशन कोर्सेज के लिए हैं। लेकिन इस बार बीएड करने वाले छात्रों के लिए नियम बदल गए हैं।



नियमों में ये बदलाव एनसीटीई की नई गाइडलाइन के कारण हुआ है। अब केवल ग्रेजुएशन डिग्री होना बीएड के लिए काफी नहीं होगा। उम्मीदवारों के पास एलीमेंट्री एजुकेशन में डिप्लोमा होना जरूरी कर दिया गया है। यानी डीएलएड या बीटीआई वाले ही अब बीएड कर सकेंगे। इस फैसले से सीधे ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को झटका लगा है। वे अब सीधे भोज विवि के बीएड कोर्स में आवेदन नहीं पाएंगे।



एंट्रेंस एग्जाम और एप्लीकेशन की डेट

भोज यूनिवर्सिटी ने आवेदन की समय सीमा भी तय कर दी है। कैंडिडेट 5 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके बाद 6 जून 2026 को प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी।



ये परीक्षा प्रदेश के निर्धारित ऑनलाइन केंद्रों पर ही संपन्न होगी। समय पर अप्लाई न करने वाले छात्र इस मौके से चूक जाएंगे। इसलिए एलिजिबिलिटी की जांच करके तुरंत फॉर्म भर दें।



फीस की बात करें तो बीएड कोर्स के लिए कुल फीस लगभग 30 हजार रुपए तय है। वहीं डीएलएड कोर्स के लिए फीस 19 हजार 200 रुपए के करीब है।



क्या है न्यू एलिजिबिलिटी रूल्स

वाईस चांसलर डॉ. रतन सूर्यवंशी ने एलिजिबिलिटी पर जानकारी दी है। बीएड के लिए ग्रेजुएट में कम से कम 50% नंबर चाहिए। पोस्ट ग्रेजुएशन वाले भी 50% नंबर के साथ एलिजिबल माने जाएंगे।



इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए 55% नंबर अनिवार्य रखे गए हैं। सबसे जरूरी शर्त टीचिंग सर्टिफिकेट का होना ही है। इसके बिना ऑनलाइन पोर्टल आपका फॉर्म एक्सेप्ट नहीं करेगा। डीएलएड के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया पहले की तरह ही रखे गए हैं। छात्र अपनी योग्यता के मुताबिक ही कोर्स का चुनाव करें।



क्यों बदले गए बीएड एंट्री के नियम

एनसीटीई (NCTE) ने मान्यता देने के लिए ये सख्त शर्त रखी थी। टीचर एजुकेशन कौंसिल ने नियमों में ट्रांसपेरेंसी लाने पर जोर दिया है। डिस्टेंस एजुकेशन से बीएड करने के लिए अनुभव जरूरी माना गया है।



इसीलिए टीचिंग सर्टिफिकेट कोर्स (NCTE Guidelines)को आवेदन के लिए जरूरी किया गया है। यूनिवर्सिटी अब केवल योग्य शिक्षकों को ही आगे बढ़ाना चाहता है। इस एनसीटीई गाइडलाइन केबदलाव से क्वालिटी ऑफ एजुकेशन में सुधार आने की उम्मीद है।



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