MP Online Education: अब 40% कोर्स ऑनलाइन कर सकेंगे कॉलेज छात्र
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में कॉलेज के छात्र अब अपना 40 प्रतिशत कोर्स ऑनलाइन पढ़ सकेंगे।
- ऑनलाइन पढ़ाई के क्रेडिट छात्रों की रेगुलर मुख्य डिग्री में जोड़ दिए जाएंगे।
- इस नई व्यवस्था से राज्य के करीब 4.85 लाख छात्र लाभान्वित होंगे।
- जरूरी क्रेडिट समय से पहले पूरे करके छात्र जल्दी डिग्री पा सकेंगे।
- उच्च शिक्षा विभाग नए सत्र से इस नए डिजिटल नियम को लागू करेगा।
MP के कॉलेज छात्रों के लिए पढ़ाई का नया नियम
मध्यप्रदेश के कॉलेज में पढ़ने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर आई है। उच्च शिक्षा विभाग पढ़ाई का तरीका बदलने जा रहा है। अब छात्र अपने कोर्स का बड़ा हिस्सा घर बैठे पढ़ सकेंगे।
सरकार ने 40 प्रतिशत कोर्स ऑनलाइन करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से प्रदेश के लाखों छात्र डिजिटल लर्निंग से जुड़ेंगे। विभाग नए सत्र से इस ऐतिहासिक नियम को लागू करने की तैयारी में है।
छात्र कम समय में पूरी कर पाएंगे डिग्री
इस नए फैसले का सबसे बड़ा फायदा यूजी और पीजी के छात्रों को होगा। राज्य के करीब 4.85 लाख विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलने वाला है। बीयू सहित कई बड़े विश्वविद्यालय इसकी तैयारियों में जुट गए हैं।
यदि कोई छात्र तेजी से पढ़ाई करके अपने क्रेडिट पूरे कर लेता है। तो वह अपनी तीन साल की स्नातक डिग्री ढाई साल में पूरी कर सकेगा। इससे छात्रों का कीमती समय बचेगा और वे आगे बढ़ सकेंगे।
NPTEL और सरकारी पोर्टल के ऑनलाइन कोर्सेज की मदद
ऑनलाइन पढ़ाई (online education) के लिए उच्च शिक्षा विभाग विशेष इंतजाम कर रहा है। इसके लिए एनपीटीईएल (NPTEL) पर उपलब्ध शानदार कोर्सेज की मदद ली जाएगी। विश्वविद्यालय खुद भी नए कोर्स और परीक्षाओं का खाका तैयार करेंगे।
इसके लिए कॉलेजों के मुख्य विषयों की मैपिंग का काम शुरू हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक मैपिंग की यह प्रक्रिया एक महीने में पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद मान्य ऑनलाइन कोर्स की एक विस्तृत सूची जारी होगी।
शॉर्ट टर्म कोर्स करने से मिलेंगे ढेर सारे क्रेडिट
छात्र अपनी रेगुलर कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ यह ऑनलाइन कोर्सेस करेंगे। ये शॉर्ट-टर्म कोर्स छात्रों को अतिरिक्त क्रेडिट पॉइंट दिलाने में मदद करेंगे। परीक्षा पास करने के बाद यह क्रेडिट मुख्य मार्कशीट में जुड़ जाएंगे।
यह पूरी व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल तकनीक पर आधारित होगी। उच्च शिक्षा विभाग का बोर्ड ऑफ स्टडीज इस पर नजर रख रहा है। वे तय कर रहे हैं कि कौन से कोर्स सबसे ज्यादा उपयोगी हैं।
यूजीसी की गाइडलाइन से आयोजित होंगी सभी परीक्षाएं
ऑनलाइन कोर्स की परीक्षा और क्रेडिट सिस्टम के लिए नियम तय हैं। सभी विश्वविद्यालयों को अनिवार्य रूप से यूजीसी (UGC) की गाइडलाइन अपनानी होगी। इससे डिग्री की मान्यता पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा।
इस नए डिजिटल सिस्टम से कॉपियों का मूल्यांकन भी बहुत तेज होगा। छात्रों को क्रेडिट ट्रांसफर लागू करने में किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग जल्द ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करेगा।
नौकरी के नए अवसर खुलेंगे
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य युवाओं की स्किल्स को बेहतर करना है। ऑनलाइन माध्यम से छात्र इंडस्ट्री और मार्केट की जरूरत के हिसाब से कोर्स चुन सकेंगे। इससे कॉलेज पास करने के बाद उनकी रोजगार क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
अब छात्रों को देश के बड़े संस्थानों के कोर्स घर बैठे करने को मिलेंगे। डिजिटल लर्निंग का यह मॉडल शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाएगा। गाँव और छोटे शहरों के बच्चे भी अब बेहतरीन शिक्षा पा सकेंगे।
उच्च शिक्षा विभाग के आला अधिकारी ने क्या कहा?
उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) IAS अनुपम राजन ने पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था पर बहुत तेजी से काम चल रहा है। जल्द ही मान्य कोर्सेज की पूरी लिस्ट सार्वजनिक की जाएगी।
नया सत्र शुरू होते ही छात्र ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प चुन सकेंगे। सरकार का यह कदम आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के सपने को पूरा करने में मददगार साबित होगा। छात्रों को इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए।
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