MP के कॉलेजों में काउंसलर जरूरी: 6 से 8 जुलाई के बीच शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीमकोर्ट ने कॉलेजों मेंछात्रों के मानसिकस्वास्थ्य को लेकरसख्त गाइडलाइनजारी की है।
- इसके बादमध्यप्रदेश के उच्च शिक्षाविभाग ने सभी कॉलेजों को नएनिर्देश दिए हैं।
- 6से 8 जुलाई के बीचप्रदेशभर केशिक्षकों औरकर्मचारियों को ऑनलाइन ट्रेनिंगदी जाएगी।
- हरकॉलेज में काउंसलररखना अब जरूरी होगा।
- जाति, लिंग यायोग्यता के आधार परभेदभाव रोकने केउपाय भी अनिवार्य किएगए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों के लिए एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अब सभी कॉलेजों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
इस आदेश के बाद मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने नए नियम जारी किए हैं। इसके तहत प्रदेशभर के शिक्षकों और कर्मचारियों को विशेष ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।
यह ट्रेनिंग 6 से 8 जुलाई 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। अब हर कॉलेज में एक प्रोफेशनल काउंसलर का होना बिल्कुल अनिवार्य होगा।
कॉलेज कैंपस में जाति या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। छात्रों की योग्यता को लेकर भी किसी तरह की मानसिक प्रताड़ना नहीं दी जाएगी।
तीन दिन, तीन चरण
इस सत्र के लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने ट्रेनिंग को तीन चरणों में बांटा है। 6 जुलाई को सरकारी महाविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग होगी। वहीं 7 जुलाई को निजी महाविद्यालयों की बारी होगी। 8 जुलाई को प्रदेश के विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
यह दोघंटे का ऑनलाइनकार्यक्रम होगा। भोपाल सेइसका सीधा प्रसारणहोगा। सभी शिक्षक औरकर्मचारी अपने कॉलेज केनिर्धारित हॉल में एकत्रहोकर इस सत्र मेंशामिल होंगे।
शत-प्रतिशत हाजिरी अनिवार्य
विभाग नेसभी कॉलेजों कोस्पष्ट निर्देशदिए हैं। हरसंस्थान को सौफीसदी उपस्थितिसुनिश्चित करनीहोगी। ट्रेनिंगकी फोटो औरवीडियोग्राफी अनिवार्यकी गई है। सभीप्रतिभागियों कीहस्ताक्षरयुक्त (signed) उपस्थितिपत्र विभाग कोभेजना होगा। 9जुलाई तक पूरेकार्यक्रम कीविस्तृत रिपोर्ट भीजमा करनी होगी।
हर कॉलेज में होंगे काउंसलर
सुप्रीमकोर्ट कीगाइडलाइन के तहत हरशिक्षण संस्थान कोकई बदलाव करनेहोंगे। हर कॉलेजमें प्रशिक्षितपरामर्शदाता यानीकाउंसलर(Counsellor) रखना जरूरीहोगा। इसके साथही मानसिकस्वास्थ्य नीति बनानीहोगी और नियमितमानसिक स्वास्थ्य जांच भी करानी होगी।
उत्पीड़नविरोधी तंत्रविकसित करना होगा।आत्मघाती कदम रोकनेके लिए विशेषसहायता व्यवस्थाभी अनिवार्यकी गई है।
भेदभाव पर लगेगी रोक
कोर्ट केनिर्देशों में भेदभावरोकने पर खास जोरदिया गया है।जाति, लिंग यायोग्यता के आधार परकिसी भी तरह काभेदभाव अब बर्दाश्तनहीं होगा।रचनात्मक मूल्यांकनप्रणाली अपनाई जाएगी।
खेल और कला को भी मिलेगी जगह
कॉलेजपरिसरों में खेल,कला और मनोरंजनगतिविधियों को बढ़ावादेने का भीनिर्देश दिया गयाहै। विभाग कामानना है कि इनउपायों से परिसरोंमें सुरक्षित,संवेदनशील और सकारात्मकवातावरण तैयार होगा।तनाव में घिरेछात्रों को एकभरोसेमंद जगह मिलेगी।
इससे क्या बदलाव होगा
यहपहल सिर्फट्रेनिंग तक सीमितनहीं है। विभागचाहता है कि हरशिक्षक औरकर्मचारी छात्रों केमानसिक संकट कोपहचान सकेंगे। समय परमदद मिल पाएगी। औरकोई भी छात्रअकेला महसूस न करे।
नए शैक्षणिकसत्र की शुरुआतसे पहले यह कदमउठाना बताता है किसरकार इस मुद्दे कोगंभीरता से ले रहीहै।
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