एमपी के छात्रों को राहत: अब 20 दिन में आएगा री-इवैल्यूएशन रिजल्ट, नया नियम लागू
मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़ी चार सेवाओं को अब लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल कर दिया गया है। इसके तहत कॉलेजों को अब 20 दिन में पुनर्मूल्यांकन परिणाम जारी करना होगा। यूनिवर्सिटी को भी 20 दिन में अंक सूची कॉलेजों तक भेजनी होगी। छात्रवृत्ति आवेदनों की जांच अब 30 दिन में पूरी करनी होगी। इससे विद्यार्थियों को समय पर परिणाम और सुविधाएं मिलने की राहत मिलेगी।
भोपाल से पत्रिका न्यूज नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के विश्वविद्यालयों और स्वशासी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए यह नया कदम उठाया गया है। उच्च शिक्षा (Higher Education) विभाग से जुड़ी अधिसूचना शुक्रवार को शासन ने जारी की है।
छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत
अब तक परीक्षा परिणाम और पुनर्मूल्यांकन जैसे कामों के लिए कोई तय समय सीमा नहीं थी। इस वजह से विद्यार्थियों को अक्सर लंबा इंतजार करना पड़ता था। नई अधिसूचना के बाद अब यह समय सीमा साफ तौर पर तय कर दी गई है।
इससे विद्यार्थियों को यह भरोसा मिलेगा कि उनका काम तय समय के भीतर पूरा हो जाएगा। देरी होने पर अब जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब भी मांगा जा सकेगा।
किन चार सेवाओं में लागू हुई समय सीमा
सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार चार सेवाओं को लोक सेवा गारंटी (Lok Seva Guarantee – Public Service Guarantee) के दायरे में लाया गया है। पहली सेवा के तहत परिणाम घोषित होने के बाद यूनिवर्सिटी को 20 दिन के भीतर अंक सूची कॉलेज तक भेजनी होगी।
दूसरी सेवा में छात्रवृत्ति आवेदनों की जांच 30 दिन में पूरी करनी होगी। तीसरी सेवा के तहत पुनर्मूल्यांकन का परिणाम अब 20 दिन के भीतर जारी करना अनिवार्य होगा। चौथी सेवा में उपाधि यानी डिग्री को डिजिलॉकर (DigiLocker – Digital Locker) पर 15 दिन के अंदर अपलोड करना होगा।
किसकी होगी जिम्मेदारी
राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार इन सेवाओं को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी सहायक कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को दी गई है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अंक सूची 20 दिन में कॉलेजों तक पहुंचानी होगी।
वहीं डिग्री को डिजिलॉकर पर अपलोड करने के लिए भी 15 दिन की सीमा तय की गई है। छात्रवृत्ति के सत्यापन का काम भी 30 दिन में पूरा करना होगा। इसके लिए संबंधित कॉलेज के प्राचार्य को जिम्मेदार बनाया गया है।
पुरानी सेवाओं में भी हुआ बदलाव
इस नई व्यवस्था के साथ ही कुछ पुरानी सेवाओं में भी संशोधन किया गया है। प्रोविजनल उपाधि और इंटरनल अंक सूची में सुधार अब 7 दिन में करना होगा। वहीं अंक सूची में संशोधन के लिए 10 दिन का समय तय किया गया है।
शोध प्रबंध और थीसिस जमा करने के बाद पीएचडी की उपाधि अब 120 दिन के भीतर देनी होगी। इसके अलावा स्थानांतरण प्रमाण पत्र और चरित्र प्रमाण पत्र दोनों को अब 7-7 दिन के भीतर जारी करना अनिवार्य कर दिया गया है।
FAQ
- पुनर्मूल्यांकन परिणाम अब कितने दिन में मिलेगा?
नई अधिसूचना के अनुसार अब पुनर्मूल्यांकन परिणाम 20 दिन के भीतर जारी करना अनिवार्य होगा। पहले इसकी कोई तय समय सीमा नहीं थी। - डिजिलॉकर पर डिग्री कब तक अपलोड होगी?
कॉलेजों को अब उपाधि यानी डिग्री 15 दिन के भीतर डिजिलॉकर पर अपलोड करनी होगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज को दी गई है। - छात्रवृत्ति आवेदनों की जांच में कितना समय लगेगा?
छात्रवृत्ति आवेदनों की जांच अब 30 दिन के भीतर पूरी करनी होगी। इसके सत्यापन की जिम्मेदारी कॉलेज के प्राचार्य को दी गई है।
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