अब 9वीं के छात्र सीखेंगे पैसों का हिसाब, NCERT की किताब में जुड़ा स्टार्टअप और पर्सनल फाइनेंस का पाठ
इनमें पर्सनल फाइनेंस और एंटरप्रेन्योरशिप की जानकारी दी गई है। इस बदलाव की जानकारी अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने दी। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नई किताबों की जानकारी साझा की।
उनके मुताबिक, किताबों में जोखिम उठाने और नए विचारों पर जोर दिया गया है। बिजनेस एक्टिविटी को भी सकारात्मक तरीके से समझाया गया है। इससे बच्चों को रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली बातें सीखने को मिलेंगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हुआ बदलाव
NCERT ने यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया है। इसमें नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 का भी ध्यान रखा गया है। इसका मकसद पढ़ाई को बच्चों की असली जिंदगी से जोड़ना है। भारत में फाइनेंशियल अवेयरनेस तेजी से बढ़ रही है। SIP निवेश और स्टार्टअप से जुड़ी गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। छोटे और मध्यम उद्योगों का अर्थव्यवस्था में अहम योगदान है। इसलिए बच्चों को इन विषयों की जानकारी दी जा रही है।
नई किताबों से बच्चों को बचत और निवेश की समझ मिलेगी। वे टैक्स और बिजनेस के बारे में भी जानेंगे। इससे उन्हें पैसों से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलेगी। भविष्य में वे अपना कारोबार शुरू करने के बारे में भी सोच सकेंगे।
कम उम्र से ही पैसों का हिसाब करना सीखेंगे बच्चे
नई किताब में पर्सनल फाइनेंस से जुड़ा एक नया अध्याय जोड़ा गया है। इसका मकसद बच्चों को बचत और निवेश की समझ देना है। इसमें बताया जाएगा कि पैसों का सही इस्तेमाल कैसे किया जाता है। इस अध्याय में छात्र फिक्स्ड डिपॉजिट के बारे में जानेंगे। वे सरकारी बचत योजनाओं, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड भी समझेंगे।
इसके साथ ही उन्हें शेयर बाजार की जानकारी भी मिलेगी। बच्चे जानेंगे कि हर निवेश का तरीका अलग होता है। किताब में जोखिम और रिटर्न का संबंध भी समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि कम जोखिम वाले निवेश में रिटर्न कम मिलता है। वहीं, ज्यादा जोखिम वाले निवेश में अधिक रिटर्न मिल सकता है।
हालांकि, ऐसे निवेश में नुकसान का खतरा भी रहता है। बच्चों को महंगाई यानी इन्फ्लेशन के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। वे समझेंगे कि समय के साथ चीजों की कीमतें बढ़ती हैं। इससे पैसों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। किताब में कंपाउंडिंग की जानकारी भी दी जाएगी। इससे बच्चे समझेंगे कि निवेश पर रिटर्न कैसे बढ़ता है। समय के साथ यह बढ़ोतरी और ज्यादा हो सकती है।
इनकम टैक्स, EMI और क्रेडिट कार्ड की भी मिलेगी जानकारी
नई किताब में केवल बचत और निवेश की बातें ही शामिल नहीं हैं। इसमें रोजमर्रा के फाइनेंशियल टास्क की जानकारी भी दी गई है। छात्र लोन चुकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली EMI के बारे में जानेंगे। इसके साथ ही उन्हें क्रेडिट कार्ड कैसे काम करता है, यह भी समझाया जाएगा। अध्याय (chapter) में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स के बीच का अंतर भी बताया गया है।
साथ ही बच्चों को समझाया जाएगा कि इन दोनों तरह के टैक्स में क्या फर्क होता है। इसके अलावा नई टैक्स रिजीम के तहत पर्सनल इनकम टैक्स स्लैब की जानकारी भी दी गई है। किताब में टैक्स की देनदारी समझाने के लिए आसान उदाहरण शामिल किए गए हैं। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी व्यक्ति की आय पर टैक्स की गणना कैसे होती है।
स्कूल में नींबू पानी का स्टॉल लगाकर सीखेंगे बिजनेस
नई किताब का दूसरा चैप्टर एंटरप्रेन्योरशिप पर आधारित है। इसमें छात्र बिजनेस आइडिया तैयार करना सीखेंगे। साथ ही जानेंगे कि एक स्टार्टअप कैसे काम करता है। इस अध्याय में एक आसान गतिविधि दी गई है। इसमें छात्रों को स्कूल मेले की कल्पना करनी होगी। वे मेले में नींबू पानी का स्टॉल लगाएंगे। यह गतिविधि यंग एंटरप्रेन्योर्स चैलेंज का हिस्सा है।
छात्रों को स्टॉल के सामान की लागत निकालनी होगी। इसके बाद उन्हें नींबू पानी की कीमत तय करनी होगी। फिर वे कुल खर्च और बिक्री का हिसाब लगाएंगे। इससे उन्हें मुनाफे की गणना करना भी आएगा। इस गतिविधि से बच्चों को बिजनेस की शुरुआती समझ मिलेगी।
वे जानेंगे कि कारोबार शुरू करने से पहले क्या जरूरी है। साथ ही खर्च का हिसाब रखना भी सीखेंगे। उन्हें मुनाफे और नुकसान का अंतर भी समझ आएगा। किताब में बेकरी का उदाहरण भी शामिल किया गया है। इससे छात्रों को प्रॉफिट और लॉस की जानकारी मिलेगी। इस तरह बच्चे गतिविधियों से बिजनेस करना सीखेंगे।
बिजनेस को रोजगार बढ़ाने का जरिया बताया गया
इकॉनॉमिस्ट संजीव सान्याल ने इस बदलाव को अहम बताया है। उनके मुताबिक, पुरानी किताबों में जमाखोरी और कालाबाजारी पर ज्यादा जोर था। नई किताबों में कारोबार को सकारात्मक नजरिए से दिखाया गया है। इसमें जोखिम उठाने और नए विचारों को बढ़ावा दिया गया है।
बिजनेस को इकोनॉमी और रोजगार बढ़ाने का जरिया बताया गया है। इस बदलाव से बच्चों को कारोबार की बेहतर समझ मिलेगी। वे जानेंगे कि नया विचार बिजनेस में कैसे बदलता है। छोटे कारोबार भी रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं।
FAQs
- NCERT ने कक्षा 9 की किताब में क्या बदलाव किया है?
NCERT ने सोशल साइंस की किताब के इकोनॉमिक्स खंड में पर्सनल फाइनेंस और एंटरप्रेन्योरशिप से संबंधित दो नए अध्याय जोड़े हैं। - कक्षा 9 के छात्र पर्सनल फाइनेंस में क्या सीखेंगे?
छात्र फिक्स्ड डिपॉजिट, सरकारी बचत योजनाओं, म्यूचुअल फंड, बॉंड, शेयर बाजार, निवेश के जोखिम, और महंगाई जैसे विषयों के बारे में जानेंगे। - नई किताब में टैक्स और लोन से जुड़ी क्या जानकारी है?
नई किताब में EMI, क्रेडिट कार्ड, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स की जानकारी शामिल है, साथ ही नई टैक्स रिजीम के तहत पर्सनल इनकम टैक्स स्लैब की जानकारी भी दी गई है।