NEET UG 2026: कैसे शुरू हुई नीट परीक्षा,पहले कैसे बनते थे डॉक्टर?
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला
- भारत में मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए अब नीट परीक्षा अनिवार्य है।
- साल 2013 में पहली बार NEET का आयोजन किया गया था।
- NEET से पहले छात्र नेशनल लेवल पर AIPMT की परीक्षा देते थे।
- कई राज्यों में दाखिले के लिए अपनी अलग प्रवेश परीक्षाएं होती थीं।
- अब देश भर में सिर्फ एक ही परीक्षा के जरिए एडमिशन होता है।
NEET UG परीक्षा क्या है
भारत में मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाना अब आसान नहीं रहा। अगर आप 12वीं के बाद डॉक्टर बनना चाहते हैं, तो आपको NEET देना होगा। एमबीबीएस और बीडीएस जैसे कोर्स (मेडिकल कोर्सेज) के लिए यह परीक्षा पास करना जरूरी है। बिना इस परीक्षा के किसी भी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलता है।
भारत में NEET UG की शुरुआत कब और कैसे हुई?
NEET UG को शुरू करने का विचार सबसे पहले साल 2012 में आया था। तब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (medical council of india) ने इसका प्रस्ताव सरकार को दिया था। हालांकि, कुछ कानूनी कारणों से इसमें एक साल की देरी हो गई। पहली बार यह परीक्षा साल 2013 में आयोजित की गई थी।
NEET का शुरुआती सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है। साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा को निरस्त कर दिया था। इस वजह से 2014 और 2015 में NEET परीक्षा नहीं हो सकी। छात्र फिर से पुरानी व्यवस्था के तहत ही परीक्षा देते रहे।
पहले मेडिकल प्रवेश परीक्षा का सिस्टम काफी पुराना और सीमित था। पुरानी परीक्षाओं में केवल हिंदी और अंग्रेजी का ही विकल्प मिलता था। भाषा की बाधा दूर करने के लिए NEET को लाया गया। अब यह परीक्षा कुल 13 अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में होती है।
2016 में NEET UG का दोबारा से आयोजन
साल 2016 में NEET परीक्षा को फिर से लागू किया गया। उस समय सीबीएसई इस परीक्षा को आयोजित करने की जिम्मेदारी निभाता था। इसके बाद साल 2019 में एक बड़ा बदलाव किया गया। अब NEET की परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आयोजित कराती है।
NEET से पहले कौन सा एग्जाम देना पड़ता था?
NEET से पहले देश में ऑल इंडिया पैरा मेडिकल टेस्ट होता था। इसे संक्षिप्त में छात्र एआईपीएमटी (AIPMT) के नाम से जानते थे। यह नेशनल लेवल की एक सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा थी। साल 1988 से लेकर 2012 तक इसी के जरिए मेडिकल में एडमिशन मिलते थे।
AIPMT के अलावा कई राज्य अपनी अलग परीक्षाएं भी लेते थे। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में सीपीएमटी (CPMT) परीक्षा होती थी। कई बड़े मेडिकल कॉलेज भी अपनी खुद की परीक्षा आयोजित करते थे। इससे छात्रों को कई अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे।
NEET UG में हर साल कितने छात्र होते हैं शामिल?
NEET UG परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक इस साल 20 लाख से ज्यादा छात्र पराक्षा में बैठे थे। डॉक्टर बनने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए यह सबसे बड़ी परीक्षा है। इसके साथ ही कॉम्पिटिशन का स्तर भी हर साल बढ़ता जा रहा है।
पेपर लीक से NEET परीक्षा 2026 रद्द
पेपर लीक का मामला अभी सुर्खियों में है। परीक्षा से ठीक पहले एक गेस पेपर वायरल होने का दावा किया गया, जिसके बाद जांच एजेंसियां एक्टिव हो गईं और मामले की गहन जांच चल रही है। खबरें हैं कि इस गेस पेपर में करीब 125 सवाल असली पेपर से बिल्कुल मेल खा रहे हैं।
अब NEET UG 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई है। इससे पहले भी नीट परीक्षा कराने वाली एजेंसी NTA की परीक्षाएं कई बार कैंसिल या पोस्टपोन हो चुकी हैं। चलिए जानतें हैं इससे पहले कब-कब NEET की परीक्षा रद्द हो चुकी है।
अब तक NEET की कितनी परीक्षाएं स्थगित हुई
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 2018 में अपनी शुरुआत के बाद से अब तक कम से कम 16 परीक्षाएं स्थगित की हैं। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय ने 2024 में लोकसभा में दी थी। उस समय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि के सवाल के लिखित जवाब में बताया कि NTA ने अब तक 240 से ज्यादा परीक्षाएं आयोजित की हैं, जिसमें 5.4 करोड़ से ज्यादा छात्र शामिल हुए।
मंत्री ने यह भी कहा कि NTA द्वारा आयोजित कई परीक्षाएं कई विषयों, शिफ्टों और दिनों तक होती हैं। ऐसे में कोविड महामारी, तकनीकी गड़बड़ियों, प्रशासनिक कारणों, कानूनी आदेशों और लॉजिस्टिक चुनौतियों के चलते कई बार तय तारीखों पर परीक्षाएं नहीं हो पाई हैं।
कौन सी परीक्षाएं स्थगित की गईं
- कोविड महामारी के कारण JEE Main 2020, NEET-UG 2020, JEE Main 2021 और NEET-UG 2021 की परीक्षाएं स्थगित हुईं।
- CSIR UGC-NET 2020, UGC-NET दिसंबर 2020, UGC-NET मई 2021 और ICAR AIEEA 2020 की परीक्षाएं कोविड और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण टल गईं।
- दिल्ली विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया रुकने के कारण DUET 2020 परीक्षा स्थगित हुई।
- AICTE द्वारा परीक्षा पैटर्न में बदलाव के कारण CMAT 2021 परीक्षा टाली गई।
- कोविड महामारी के चलते All India Ayush Post Graduate Entrance Test (AIAPGET) 2021 और Joint Integrated Programme in Management Admission Test (JIPMAT) 2021 भी स्थगित करनी पड़ीं।
- 2022 में IGNOU PhD Entrance परीक्षा प्रशासनिक कारणों से टली।
- 2023 में Graduate Aptitude Test Biotechnology (GAT-B) परीक्षा क्षेत्रीय बायोटेक्नोलॉजी केंद्रों से सलाह के बाद स्थगित की गई।
- 2024 में National Common Entrance Test (NCET) परीक्षा तकनीकी कारणों से और CSIR-NET परीक्षा लॉजिस्टिक कारणों से टालनी पड़ी।
FAQ
- NEET UG परीक्षा भारत में पहली बार आधिकारिक तौर पर कब आयोजित की गई थी?
नीट यूजी की शुरुआत का प्रस्ताव 2012 में रखा गया था, लेकिन कानूनी अड़चनों के बाद इसे पहली बार मई 2013 में आयोजित किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे बीच में रोका गया और फिर साल 2016 से इसे अनिवार्य रूप से पूरे देश में लागू कर दिया गया। 2019 से इसकी कमान एनटीए को सौंप दी गई। - नीट और एआईपीएमटी (AIPMT) परीक्षा के बीच मुख्य अंतर क्या है?
एआईपीएमटी मुख्य रूप से सीबीएसई द्वारा संचालित की जाती थी और इसमें केवल 15% ऑल इंडिया कोटा की सीटें भरी जाती थीं। बाकी सीटों के लिए राज्यों को अपनी परीक्षा लेनी पड़ती थी। जबकि नीट एक एकीकृत परीक्षा है, जो पूरे भारत के सभी सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की 100% सीटों पर प्रवेश के लिए एकमात्र आधार है। - क्या नीट परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी भाषा में ही दी जा सकती है?
जी नहीं, नीट परीक्षा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भाषाई विविधता है। वर्तमान में यह परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 11 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित होती है। इसमें तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, गुजराती, असमिया, कन्नड़, ओडिया, पंजाबी, उर्दू और मलयालम शामिल हैं। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार केंद्र चुन सकते हैं।
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