महंगी किताबों का खेल खत्म, NHRC ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर 30 दिन में मांगा जवाब
News In Short
- NCERT ने कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों के बीच एकेडमिक भेदभाव खत्म होगा, सभी जगह NCERT किताबें अनिवार्य होंगी।
- प्राइवेट पब्लिशर्स की 10 गुना महंगी किताबों की जगह अब सस्ती NCERT किताबों से पढ़ाई होगी।
- आयोग ने शिक्षा मंत्रालय और राज्य सरकारों से 30 दिन के भीतर ऑडिट रिपोर्ट तलब की है।
- नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के तहत भारी बस्ते लादने वाले स्कूलों पर अब सीधे कार्रवाई की जाएगी।
- आगामी शैक्षणिक सत्र के प्रवेश और किताबों की खरीद का पूरा डेटा प्रशासन को जांचना होगा।
News In Detail
देश के निजी स्कूलों की मनमानी और हर साल अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने के बनाए जाने वाले दबाव पर अब लगाम लगने जा रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस गंभीर विषय पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने कहा कि चाहे सरकारी स्कूल हो या निजी, बच्चों के साथ एकेडमिक डिस्क्रिमिनेशन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने दो टूक कहा है कि स्कूलों में अब केवल NCERT की किताबों से ही शिक्षा दी जाएगी।
प्राइवेट पब्लिशर्स का खेल खत्म
देशभर से मिली लगातार शिकायतों के बाद मानवाधिकार आयोग ने यह बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने शिक्षा मंत्रालय और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर इस दिशा में की गई कार्रवाई पर 30 दिन के अंदर डिटेल्ड रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, नमो फाउंडेशन की ओर से की गई एक शिकायत में यह खुलासा हुआ था कि प्राइवेट स्कूल जानबूझकर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें कोर्स में शामिल करते हैं। ये किताबें एनसीईआरटी की तुलना में 10 गुना तक महंगी होती हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।
स्कूलों का होगा ऑडिट
मानवाधिकार आयोग ने प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि अगले 30 दिनों के भीतर हर स्कूल का ऑडिट किया जाए। इसके साथ ही नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020 (National School Bag Policy 2020) को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग का मानना है कि प्राइवेट पब्लिशर्स की ढेर सारी किताबों के कारण बच्चों के कंधों पर बस्ते का बोझ बढ़ रहा है। आयोग ने साफ कर दिया है कि यदि किसी स्कूल में NCERT के अलावा अन्य किताबें पाई जाती हैं, तो स्कूल प्रबंधन को इसका जवाब देना होगा और भारी बोझ लादने वाले स्कूलों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आयोग के तीखे सवाल
अपनी जांच के दायरे को बढ़ाते हुए आयोग ने शिक्षा अधिकारियों से मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है:
- क्या शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों को अनिवार्य रूप से NCERT किताबें पढ़ाने का लिखित आदेश दिया है? यदि नहीं, तो तुरंत आदेश जारी कर बुक लिस्ट की जांच की जाए।
- शैक्षणिक सत्र 2025-26 में निजी और सरकारी स्कूलों में कुल कितने बच्चों ने प्रवेश लिया है?
- इन छात्रों के अनुपात में कितनी किताबें खरीदी गई हैं, इसका पूरा डेटा उपलब्ध कराया जाए।
आयोग ने राज्यों से इन 3 बिंदुओं में मांगे जवाब
- क्या स्कूलों में भारी बस्तों के बोझ को कम करने के लिए तय नीति का पालन हो रहा है?
- शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) की धारा 29 के तहत निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं और मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है या नहीं?
- निजी स्कूलों में NCERT की जगह निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें चलाने के पीछे क्या ठोस आधार है?
अभिभावकों को मिलेगी बड़ी राहत
मानवाधिकार आयोग की इस पहल से उन लाखों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो हर साल मार्च-अप्रैल के महीने में निजी स्कूलों और बुक सेलर्स के गठजोड़ के कारण ठगे महसूस करते हैं। आयोग ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि शिक्षा का अधिकार केवल किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि वह गुणवत्तापूर्ण और सस्ती भी हो।
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