सैलरी डेटा देने में NTA के छूटे पसीने, RTI में कानून का हवाला देकर पल्ला झाड़ा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA देश की सबसे बड़ी परीक्षाएं कराती है। इंडिया टुडे ने RTI दाखिल कर NTA के 198 कर्मचारियों की सैलरी और खर्च की जानकारी मांगी। एनटीए ने 13 जून 2026 को जवाब दिया कि यह डेटा मांगे गए फॉर्मेट में उपलब्ध नहीं है।
एजेंसी ने RTI एक्ट की धारा 2(f) का हवाला दिया। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार NTA में 138 कर्मचारी आउटसोर्स हैं, जो राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों के उलट है।
NTA से RTI में क्या पूछा गया?
इंडिया टुडे ने NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से एक अहम RTI दाखिल की। इसमें शुरुआत से अब तक सालाना आधार पर सैलरी, भत्तों और स्टाफ पर कुल खर्च की जानकारी मांगी गई थी। साथ ही NTA के 10 सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले अधिकारियों के पद, सालाना वेतन और भत्तों का पूरा ब्योरा भी मांगा गया।
यह जानकारी इसलिए जरूरी थी क्योंकि NTA नीट, जेईई मेन (JEE Main) और CUET जैसी परीक्षाएं कराती है। इन परीक्षाओं में करोड़ों छात्र बैठते हैं।
NTA ने क्या जवाब दिया?
13 जून 2026 को NTA ने RTI का जवाब दिया। एजेंसी ने साफ कह दिया कि मांगी गई जानकारी उस फॉर्मेट में उपलब्ध नहीं है जिसमें आवेदक ने मांगी है।
NTA ने RTI अधिनियम, 2005 की धारा 2(f) का हवाला दिया। एजेंसी का तर्क था कि इस कानून के तहत केवल वही जानकारी देनी होती है जो पहले से रिकॉर्ड में मौजूद हो। अलग-अलग स्रोतों से डेटा इकट्ठा कर देना नई जानकारी बनाने जैसा है। और यह काम आरटीआई कानून की सीमा से बाहर है।
असली सवाल क्या है?
NTA का यह जवाब कई सवाल खड़े करता है। एजेंसी ने यह नहीं कहा कि सैलरी का डेटा उसके पास है ही नहीं। उसने सिर्फ यह कहा कि डेटा उस फॉर्मेट में नहीं है।
यह फर्क बड़ा है। मतलब यह है कि जानकारी मौजूद है लेकिन साझा करने से इनकार किया जा रहा है। जो संस्था करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाएं कराती है, उससे खर्च की जानकारी मांगना जनहित में है।
NTA का स्टाफ ढांचा क्या है?
दिसंबर 2024 में शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया था कि NTA में कुल 198 कर्मचारी हैं। इनमें से 22 प्रतिनियुक्ति पर हैं, 38 अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट पर हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 138 आउटसोर्स कर्मचारी एजेंसियों के जरिए काम कर रहे हैं।
मतलब यह है कि NTA की कुल टीम का 70 फीसद से ज्यादा हिस्सा या तो अनुबंध पर है या बाहरी एजेंसियों के जरिए।
राधाकृष्णन कमेटी ने क्या कहा था?
साल 2024 में परीक्षाओं से जुड़े बड़े विवादों के बाद केंद्र सरकार ने के. राधाकृष्णन की अगुआई में एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने एक अहम सिफारिश की थी।
कमेटी ने कहा था कि परीक्षा कार्य में आउटसोर्सिंग जितनी हो सके उतनी कम की जाए। इतने बड़े पैमाने की परीक्षाओं को अस्थाई या कम निगरानी वाले स्टाफ के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। लेकिन NTA का मौजूदा ढांचा इस सिफारिश के उलट है।
पारदर्शिता की मांग क्यों जरूरी?
NTA पर पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं। पेपर लीक के मामलों ने संस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा असर डाला। ऐसे में NTA के स्टाफ पर होने वाले खर्च और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी का खुलासा आम जनता और छात्रों के लिए जरूरी माना जा रहा है।
सवाल यह है कि जब संसद में स्टाफ की संख्या बताई जा सकती है, तो सैलरी का ब्योरा देने में क्या दिक्कत है?
FAQ
- NTA में कुल कितने कर्मचारी हैं और वे किस आधार पर काम करते हैं?
दिसंबर 2024 में संसद में शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि NTA में 198 कर्मचारी हैं। इनमें 22 प्रतिनियुक्ति पर, 38 अनुबंध पर और 138 आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए कार्यरत हैं। यानी कुल स्टाफ का 70 फीसद से ज्यादा स्थाई नहीं है। - NTA ने RTI में सैलरी की जानकारी क्यों नहीं दी?
NTA ने RTI अधिनियम, 2005 की धारा 2(f) का हवाला दिया। एजेंसी का कहना था कि मांगी गई जानकारी उस फॉर्मेट में उपलब्ध नहीं है जिसमें मांगी गई थी। एजेंसी के मुताबिक अलग-अलग स्रोतों से डेटा इकट्ठा करना नई जानकारी बनाने जैसा है, जो RTI कानून के दायरे से बाहर है।
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