भारत में तेजी से बढ़ रहा टेंपल मैनेजमेंट क्रेज, एआई और मंदी का नहीं होगा असर

Manya Jain | Jul 05, 2026, 13:10 IST
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भारत में मंदिर मैनेजमेंट एक नया और सुरक्षित करियर विकल्प बनकर उभरा है। 6 यूनिवर्सिटीज में यह कोर्स शुरू है। अब मध्यप्रदेश सरकार भी इसे अपने राज्य की यूनिवर्सिटीज में लागू करेगी।

भारत में टेंपल मैनेजमेंट एक नया करियर विकल्प बनकर उभर रहा है। इसे AI और मंदी दोनों से सुरक्षित माना जा रहा है। पुणे के 18 साल के परथ कुरंडाले और नासिक के 60 साल के रिटायर्ड इंजीनियर श्रीकांत पंढरीपांडे एक ही क्लास में पढ़ रहे हैं।



देश की करीब आधा दर्जन यूनिवर्सिटीज में यह कोर्स शुरू हो चुका है। मध्य प्रदेश सरकार भी इसे राज्य की यूनिवर्सिटीज में लाने की तैयारी कर रही है।



युवा से लेकर रिटायर्ड तक की दिलचस्पी

परथ कुरंडाले भक्ति भरे माहौल में पले-बढ़े हैं। उनके पिता कीर्तन टोली से जुड़े हैं। बारहवीं पास करते ही उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में यह कोर्स चुना। उन्होंने पुणे के मशहूर मंदिरों में श्रद्धालुओं की परेशानियां करीब से देखी थीं।



श्रीकांत पंढरीपांडे 40 साल इंजीनियरिंग में काम कर चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्हें सामान्य एमबीए के बजाय कुछ नया चाहिए था। उन्हें मंदिर मैनेजमेंट सबसे दिलचस्प विकल्प लगा। वे नासिक के खरमवाड़ी में ग्राउंड लेवल ट्रेनिंग भी ले रहे हैं।



कहां-कहां चल रहा है कोर्स

यह कोर्स तमिल यूनिवर्सिटी, आईसीपीएस भोपाल, मुंबई यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों में पढ़ाया जा रहा है। इनमें गुजरात का यूनी ट्रस्ट महिला आर्ट्स कॉलेज और तिरुपति की नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी भी शामिल है।



मुंबई का वेलिंगकर इंस्टीट्यूट और वाराणसी की संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय भी यह कोर्स ऑफर करते हैं। यह कोर्स पिछले कुछ सालों में ही शुरू हुआ है।



कोर्स में क्या पढ़ाया जाता है

यह कोर्स छह महीने से एक साल तक का होता है। वाराणसी की संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में इसकी फीस 11 हजार रुपए है। मुंबई के वेलिंगकर इंस्टीट्यूट में यह छह महीने का कोर्स 26 हजार रुपए में उपलब्ध है। छात्रों को अनिवार्य इंटर्नशिप भी करनी होती है, जो 120 घंटे से लेकर तीन महीने तक की हो सकती है।



कोर्स में मंदिर की आर्थिक व्यवस्था, पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट और सामाजिक स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल हैं। इसके साथ फाइनेंस, लीगल कंप्लायंस, एचआर और इवेंट मैनेजमेंट भी सिखाया जाता है। साथ ही परंपरा, अनुष्ठान और विरासत संरक्षण पर भी खास ध्यान दिया जाता है।



सामान्य एमबीए से कैसे अलग है यह कोर्स

वेलिंगकर इंस्टीट्यूट के एक अधिकारी के मुताबिक यह कोर्स कॉरपोरेट नौकरियों के बजाय धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन पर केंद्रित है। सामान्य मैनेजमेंट कोर्स मार्केटिंग, फाइनेंस और एचआर पर फोकस करते हैं। लेकिन यह कोर्स सीधे मंदिर प्रशासन से जुड़ा है।



क्लासरूम में दिख रही विविधता

परंपरागत रूप से मंदिर प्रबंधन और पूजा-पाठ का काम ब्राह्मण और ऊंची जातियों तक सीमित रहा है। लेकिन इस कोर्स की क्लास में दलित और ब्राह्मण दोनों तरह के छात्र मौजूद हैं। कोर्स में करीब एक तिहाई छात्राएं भी शामिल हैं। जबकि मंदिरों में ज्यादातर काम पुरुष पुजारी और स्टाफ ही संभालते रहे हैं।



बढ़ती मंदिर इकोनॉमी से बढ़ेगा स्कोप

पिछले महीने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य की यूनिवर्सिटीज में मंदिर मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने का ऐलान किया। उनका कहना है कि सही मंदिर प्रबंधन से आर्थिक गतिविधियां बढ़ाई जा सकती हैं। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।



देश-विदेश में नए मंदिर बन रहे हैं और उनके आसपास कारोबार भी बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशिक्षित पेशेवरों की जरूरत भी बढ़ रही है। अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 30 लाख मंदिर हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या 2017 के 67 लाख से बढ़कर 2024 में करीब 11 करोड़ हो गई। तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर में भी यह संख्या 2019 के 2.3 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 3 करोड़ पार कर गई।



प्लेसमेंट को लेकर अभी सवाल बरकरार

कई यूनिवर्सिटीज में अभी पहला बैच ही पढ़ रहा है। इसलिए प्लेसमेंट को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। मुंबई यूनिवर्सिटी ने प्लेसमेंट का वादा तो किया है, लेकिन अभी तक औपचारिक रूप से यह शुरू नहीं हुआ। हालांकि टेंपल कनेक्ट जैसी संस्थाएं छात्रों को मंदिरों से जोड़ने का काम कर रही हैं। यह संस्था छात्रों के सीवी मंदिरों तक पहुंचाती है और इंटर्नशिप व नौकरी में मदद करती है।



पुणे के एक बैच में यूपीएससी की तैयारी कर रहे एक छात्र ने इस कोर्स को अपना बैकअप विकल्प बताया। उनकी नजर आने वाले कुंभ मेले पर भी है। लोग अच्छे और बुरे दोनों समय में भगवान की शरण में जाते हैं। इसलिए यह कोर्स आने वाले समय में मंदिरों के अनुभव को भी बेहतर बना सकता है।



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