हनुमान अंश के बाद अब बनेगी देवरहा बाबा की बायोपिक, इंदिरा गांधी और जॉर्ज पंचम को दिया था खास आशीर्वाद
Deoraha Baba Biopic: भारतीय सिनेमा में इन दिनों धार्मिक कथाओं का दौर चल रहा है। लोग संतों के रहस्यों को जानने में रुचि ले रहे हैं। नीम करौरी बाबा से प्रेरित फिल्म हनुमान अंश सफल रही है। अब दर्शक एक और महान संत की गाथा देखेंगे।
यह कहानी देश के सबसे रहस्यमयी संत देवरहा बाबा की है। उन्हें लोग प्यार और श्रद्धा से मचान बाबा भी कहते थे। बड़े पर्दे पर उनके अलौकिक जीवन को उतारा जा रहा है। फिल्म का नाम मचान बाबा तय किया गया है। ओजस फिल्म्स इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही है। विदेश में रहने वाले भारतीय उद्यमी इसमें पैसा लगा रहे हैं। पूनम गुप्ता और विकल्प पालीवाल मिलकर इसे प्रोड्यूस करेंगे।
यह फिल्म दर्शकों को बाबा के अद्भूत चमत्कारों से रूबरू कराएगी। बाबा मचान पर बैठकर लोगों को आशीर्वाद दिया करते थे। वे अपने पैर के अंगूठे से भक्तों को आशीर्वाद देते थे। उनके पास देश और दुनिया की बड़ी हस्तियां आया करती थीं। अब उनकी यही अनोखी जीवन यात्रा बड़े पर्दे पर दिखेगी। लोग इस नई फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
हनुमान अंश के बाद नई तैयारी
बॉलीवुड में संतों की कहानियों को खूब पसंद किया जा रहा है। हाल ही में हनुमान अंश मूवी को बहुत सफलता मिली। अब निर्माता नए रहस्यमयी संत पर ध्यान दे रहे हैं। देवरहा बाबा की बायोपिक की तैयारी पूरी हो चुकी है। फिल्म के जरिए उनके अनोखे जीवन को दिखाया जाएगा। दर्शक सिनेमाघरों में बाबा के अद्भूत चमत्कार देख सकेंगे।
कौन थे रहस्यमयी मचान बाबा
देवरहा बाबा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले थे। उनका जन्म मइल गांव में होना माना जाता है। बाद में वे वृंदावन में आकर रहने लगे थे। वे यमुना और सरयू नदी के किनारे ही रहते थे।
वे 10 से 12 फीट ऊंचे लकड़ी के मचान पर रहते थे। वे केवल स्नान करने के लिए ही नीचे उतरते थे। इसी वजह से लोग उन्हें मचान बाबा भी कहते थे। उनका जीवन पूरी तरह सादगी और भक्ति से भरा था।
पैरों से देते थे आशीर्वाद
बाबा का आशीर्वाद देने का तरीका बिल्कुल अलग और अनोखा था। वे मचान के ऊपर ही बैठे रहते थे। नीचे आने वाले श्रद्धालुओं को पैर से आशीर्वाद देते थे। वे अपने पैर के अंगूठे को सिर पर रखते थे।
राजीव गांधी भी उनसे आशीर्वाद लेने मचान तक पहुंचे थे। हर वर्ग के लोग उनके दर्शन करने आया करते थे। बाबा की बोली में एक खास मिठास हुआ करती थी। लोग उनके एक दर्शन के लिए घंटों इंतजार करते थे।
इंदिरा गांधी से अटल तक का रिश्ता
बाबा से मिलने देश के बड़े नेता आते रहते थे। इंदिरा गांधी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक वहां पहुंचे। साल 1977 में चुनाव हारने के बाद इंदिरा गांधी आईं। बाबा ने उन्हें अपना खुला हाथ दिखाया था।
कहते हैं उसी के बाद कांग्रेस ने हाथ का पंजा चुना। इस ऐतिहासिक घटना का जिक्र फिल्म में भी मिलेगा। साल 1911 में ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम भी पहुंचे थे। वे बाबा से मिलने देवरिया आश्रम तक आए थे।
उम्र और पानी के चमत्कार का सच
बाबा की उम्र को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। लोग उनकी आयु 250 से 900 वर्ष मानते हैं। उन्होंने 19 जून 1990 को अपनी देह त्यागी थी। उनके पास कई अलौकिक और दैवीय शक्तियां थीं।
वे बिना पूछे मन की बात जान लेते थे। वे पानी पर आसानी से चल सकते थे। वे पानी के अंदर लंबे समय तक बिना सांस रह सकते थे। यमुना में आधे घंटे तक बिना सांस के रह लेते थे।
रिसर्च के साथ बनेगी पूरी बायोपिक
इस बायोपिक फिल्म को ओजस फिल्म्स बना रहा है। इसमें बाबा से जुड़े सभी तथ्यों को दिखाया जाएगा। ब्रिटेन की पूनम गुप्ता इसमें मुख्य भागीदार हैं। अमेरिका के कारोबारी विकल्प पालीवाल भी साथ में हैं।
फिल्म को पूरी रिसर्च और सबूतों के साथ पेश करेंगे। मचान पर रहने का अंदाज अच्छे से दिखाया जाएगा। महान हस्तियों से जुड़ाव भी स्क्रीन पर जीवंत होगा। यह फिल्म इंडियन कल्चर की महानता को भी दर्शाएगी।