IC 814 वेब सीरीज विवाद, सरकार ने नेटफ्लिक्स की कंटेंट हेड को किया तलब
फिल्म निर्माता अनुभव सिन्हा की नई वेब सीरीज ( Anubhav Sinha New Web Series ) ‘IC 814: द कंधार हाईजैक स्टोरी’ ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। सीरीज को लेकर विवाद ( IC 814 Web Series Controversy ) बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ( Information and Broadcasting Ministry ) ने नेटफ्लिक्स की कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल ( NetflixContent Head Monica Shergill ) को तलब किया है, क्योंकि फिल्म में विमान अपहरणकर्ताओं को हिंदू नाम दिए जाने पर आपत्ति जताई जा रही है।
वेब सीरीज ‘IC 814: द कंधार हाईजैक स्टोरी’
लोगों की प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अपहरणकर्ताओं के चित्रण ने विवाद को जन्म दिया है। कई दर्शकों ने अपराधियों को ‘मानवीय’ रूप में दिखाए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि किसी को भी देश की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है। भारतीय संस्कृति और सभ्यता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। कुछ लोगों का सवाल है कि क्या हमें अपनी सांस्कृतिक मूल्यों के साथ छेड़छाड़ की अनुमति देनी चाहिए?
सरकारी बयान में आतंकियों के नाम
6 जनवरी 2000 को केंद्रीय गृह मंत्री के बयान में कहा गया था कि हाईजैकर्स के नाम इब्राहिम अतहर, शाहिद अख्तर सईद, सनी अहमद काजी, मिस्त्री जहूर इब्राहिम, और शाकिर थे। लेकिन इन आतंकियों ने हाईजैक विमान के यात्रियों के सामने ‘भोला’, ‘शंकर’, डॉक्टर, बर्गर, और चीफ जैसे कोड वर्ड्स का उपयोग किया था।
सवालों के घेरे में फिल्में और वेब सीरीज
अब सवाल यह उठता है कि क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर हिंदू नामों का गलत इस्तेमाल ( Misrepresentation of Hindu Names ) क्यों किया जा रहा है? यह पहली बार नहीं है जब अनुभव सिन्हा विवादों में घिरे हैं। उनकी पिछली फिल्म ‘भीड़’ को भी तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के लिए विरोध का सामना करना पड़ा था। हालांकि, यह केवल अनुभव सिन्हा का मामला नहीं है, भारत में अक्सर फिल्मों और वेब सीरीज में किरदारों के नामों को लेकर विवाद खड़े होते रहते हैं।
पहले भी विवादों में घिरी हैं कई फिल्में
ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी सीरीज या फिल्म को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी ‘पद्मावत’, ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘पीके’, ‘तांडव’, ‘लैला’, ‘ए सूटेबल बॉय’, और ‘लक्ष्मी’ जैसी कई फिल्मों पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाया जा चुका है। भारत में अक्सर निर्माता और निर्देशक रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर लोगों, खासकर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करते रहे हैं। ऐसे मामलों को सख्ती से संभालने का समय आ गया है।
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