बिहार के छोटे से गांव का लड़का मनोज बाजपेयी कैसे बना बॉलीवुड का नेशनल अवॉर्ड विनर?

Anjali Dwivedi | Apr 23, 2026, 17:41 IST
manoj bajpayee
मनोज बाजपेयी आज अपना 57वां जन्मदिन मना रहे हैं। बिहार के छोटे गांव से निकलकर चार नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीतने वाले मनोज की सत्या से गुलमोहर तक की कहानी बेहद प्रेरणादायक है।

Entertainment News.हिंदी सिनेमा में जब भी बेहतरीन और सच्चे अभिनय का जिक्र होता है, तो मनोज बाजपेयी का नाम सबसे पहले आता है। आज यानी 23 अप्रैल को मनोज अपना 57वां जन्मदिन मना रहे हैं।



बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर नेशनल अवॉर्ड्स के मंच तक पहुंचने की उनकी कहानी किसी फिल्म की कहानी जैसी ही दिलचस्प है। चार बार नेशनल अवॉर्ड जीतकर उन्होंने यह पक्का कर दिया कि अगर हुनर हो, तो कामयाबी मिलकर ही रहती है।



जब NSD ने तीन बार फेरा मुंह

23 अप्रैल, 1969 को बिहार के बेलवा गांव में जन्मे (manoj bajpayee birthday) मनोज के लिए एक्टिंग महज एक शौक नहीं, जुनून था। लेकिन मंजिल इतनी आसान नहीं थी। उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से एक नहीं, बल्कि तीन बार रिजेक्शन झेलना पड़ा। निराशा के उन दिनों में भी उन्होंने हार नहीं मानी और बैरी जॉन के ड्रामा स्कूल से थिएटर की बारीकियां सीखीं। संघर्ष के इसी दौर ने उन्हें आज का मास्टर एक्टर बनाया है।



सत्या ने रातों-रात बनाया सुपरस्टार

मनोज ने छोटे पर्दे के सीरियल स्वाभिमान से शुरुआत की और 1994 में बैंडिट क्वीन से बड़े पर्दे पर कदम रखा। लेकिन असली धमाका साल 1998 में हुआ। रामगोपाल वर्मा की फिल्म सत्या में भीकू म्हात्रे के किरदार ने हिंदी सिनेमा की परिभाषा बदल दी। इस शानदार परफॉर्मेंस के लिए साल 1999 में उन्हें उनका पहला बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला।



छोटे से गांव से निकलकर बना बॉलीवुड स्टार, 4 नेशनल अवॉर्ड जीतकर सबको पीछे छोड़ गया ये एक्टर


पिंजर और भोंसले की एक्टिंग से मिली नई पहचान

2004 में मनोज ने फिल्म पिंजर के लिए अपना दूसरा नेशनल अवॉर्ड हासिल किया। साल 2003 में आई इस फिल्म में राशिद के किरदार के लिए उन्हें स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिला।



सफर यहीं नहीं रुका, साल 2021 में फिल्म भोंसले के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का तीसरा नेशनल अवॉर्ड दिया गया। गणपत भोंसले के जटिल किरदार में उन्होंने जो जान फूंकी, उसने समीक्षकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।



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गुलमोहर के साथ कायम है बादशाहत

मनोज बाजपेयी की जीत का सिलसिला हाल ही में साल 2024 में भी जारी रहा। ओटीटी पर रिलीज हुई फिल्म गुलमोहर के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में स्पेशल मेंशन से नवाजा गया। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म को बेस्ट हिंदी फिल्म का खिताब भी मिला। 57 की उम्र में भी मनोज जिस ऊर्जा के साथ पर्दे पर उतरते हैं, वह नए कलाकारों के लिए एक मिसाल है।



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