शारदीय नवरात्रि 2026: घटस्थापना से विजयादशमी तक, जानें हर दिन का धार्मिक महत्व
Sept 24, 2026, 15:58 IST
1 / 6
नवदुर्गा के नौ रूपों की उपासनाImage credit : Sootr Assets, google
इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की प्रतिदिन आराधना होती है। प्रथम शैलपुत्री से लेकर सिद्धदात्री तक हर रूप का अपना विशेष महत्व और भोग है। मान्यता है कि नवदुर्गा की पूजा से जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं।
2 / 6
डांडिया और गरबा का उत्सवImage credit : Sootr Assets, google
नवरात्रि के दौरान गुजरात और महाराष्ट्र समेत देशभर में गरबा-डांडिया की धूम रहती है। लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनकर मां की भक्ति में रातभर नृत्य और उत्सव मनाते हैं। यह उत्सव केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी अद्भुत प्रतीक है।
3 / 6
दशहरा और विजयादशमीImage credit : Sootr Assets, google
दसवें दिन यानी विजयादशमी को मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इसी दिन भगवान राम द्वारा रावण वध की खुशी में अधर्म पर धर्म की जीत का जश्न मनाते हैं। दशहरे के दिन रावण दहन कर अच्छाई के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया जाता है।
4 / 6
कन्या पूजन की पावन परंपराImage credit : Sootr Assets, google
अष्टमी या नवमी के दिन छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है। कन्याओं के पैर धोकर उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं। यह परंपरा समाज में नारी शक्ति के सम्मान और पूजा के महत्व को दर्शाती है।
5 / 6
महाअष्टमी और महानवमी का महत्वImage credit : Sootr Assets, google
नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष विधान होता है। इस दिन माता रानी को हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद अर्पित किया जाता है। कई श्रद्धालु इन तिथियों पर व्रत का पारण कर मां का विशेष आशीर्वाद लेते हैं।
6 / 6
नवरात्रि की शुरुआत और घटस्थापनाImage credit : Sootr Assets, google
साल 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है और अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है। भक्त नौ दिनों तक जौ बोकर मां भगवती का स्वागत करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं।