Wired Earphones Return: क्या वायर्ड इयरफोन का नया ट्रेंड सच में वायरलेस ईयरबड्स को मात दे रहा है?

Anjali Dwivedi | May 26, 2026, 18:22 IST
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गैजेट्स की दुनिया में पुराना ट्रेंड लौट आया है। ब्लूटूथ ईयरबड्स के कनेक्शन और चार्जिंग के झंझट से तंग आकर लोग फिर से वायर्ड इयरफोन अपना रहे हैं। कई बड़ी हस्तियों के बाद अब युवा भी इसे एक कूल स्टाइल के तौर पर देख रहे हैं।

कुछ समय पहले तक ऐसा लग रहा था कि तार वाले यानी वायर्ड इयरफोन अब गुजरे जमाने की बात हो गए हैं। उनकी जगह ब्लूटूथ वाले वायरलेस ईयरबड्स (TWS) ने ले ली थी। लेकिन अब टेक की दुनिया में यह ट्रेंड बिल्कुल उल्टा होता दिख रहा है।



भारत समेत पूरी दुनिया में बड़े celebrity और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स फिर से वायर्ड इयरफोन में नजर आ रहे हैं। इसके बाद इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या वायर्ड इयरफोन सेहत के लिए ज्यादा सुरक्षित हैं।



आजकल की नई पीढ़ी यानी जेन-जी (Gen-Z) के युवा इसे एक नया और कूल स्टाइल मान रहे हैं। उनका कहना है कि तार वाले इयरफोन बेहद आसान और झंझट मुक्त होते हैं। इन्हें बस फोन में प्लग करो और तुरंत अपना पसंदीदा संगीत सुनना शुरू कर दो।



इसमें न तो ब्लूटूथ पेयरिंग की कोई समस्या होती है और न ही बार-बार बैटरी चार्ज करने की टेंशन रहती है। असल में वायरलेस ईयरबड्स के साथ यूजर्स को कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।



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वायरलेस ईयरबड्स से कौन सी परेशानियां हो रही हैं?

वायरलेस ईयरबड्स इस्तेमाल करने वाले कई लोगों ने लगातार कनेक्शन टूटने की शिकायत की है। इसके अलावा इनमें बैटरी जल्दी खत्म होने और वीडियो देखते समय आवाज के अटकने (ऑडियो लैग) जैसी समस्याएं भी आती हैं।



लंबे समय तक कानों में इन्हें ठूसकर रखने से दर्द और बेचैनी भी महसूस होती है। यही वजह है कि लोग अब पुराने और भरोसेमंद वायर्ड इयरफोन की तरफ लौट रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या वायरलेस ईयरबड्स सच में हमारी सेहत को नुकसान पहुँचाते हैं।



इंटरनेट पर ईयरबड्स के रेडिएशन को लेकर काफी अफवाहें और डर का माहौल बना हुआ है। कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि ब्लूटूथ ईयरबड्स सीधे हमारे कान के पास रेडिएशन छोड़ते हैं जिससे दिमाग पर असर पड़ता है।



हालांकि डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला है। सामान्य इस्तेमाल में ये गैजेट्स किसी भी तरह से खतरनाक नहीं होते हैं। इनसे निकलने वाला रेडिएशन बेहद कम स्तर का होता है।



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वायर्ड और वायरलेस कौन इयरफोन सुरक्षित?

चिकित्सकों का मानना है कि कानों के लिए असली खतरा रेडिएशन नहीं बल्कि म्यूजिक की तेज आवाज है। आप चाहे तार वाला इयरफोन इस्तेमाल करें या ब्लूटूथ वाला ईयरबड्स, दोनों ही सेहत बिगाड़ सकते हैं।



अगर आप बहुत लंबे समय तक तेज आवाज में गाने सुनेंगे, तो आपकी सुनने की क्षमता हमेशा के लिए कमजोर हो सकती है। इसलिए आवाज को हमेशा धीमा रखना सबसे जरूरी काम है। हालांकि ब्लूटूथ ईयरबड्स के साथ कानों के इन्फेक्शन का खतरा थोड़ा ज्यादा रहता है।



वायरलेस ईयरबड्स कान के छेद के काफी अंदर तक फिट होते हैं। इस वजह से कान के अंदर हवा नहीं पहुंच पाती और वहां ईयरवैक्स यानी गंदगी जमा होने लगती है। इससे कानों में खुजली, जलन या फंगल इन्फेक्शन होने का रिस्क काफी बढ़ जाता है।



दूसरी तरफ वायर्ड इयरफोन कान के बहुत ज्यादा अंदर तक नहीं जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वायर्ड इयरफोन में कोई बैटरी नहीं होती है। इसलिए इनमें ओवरहीटिंग या ब्लास्ट होने का कोई डर नहीं रहता।



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ईयरबड्स के इस्तेमाल से क्या खतरा है?

अक्सर सोशल मीडिया पर यह डरावनी बहस भी देखने को मिलती है कि ईयरबड्स से कैंसर हो सकता है। कैंसर विशेषज्ञों ने इस बात को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि हमारे मोबाइल फोन या ईयरबड्स से जो तरंगे निकलती हैं, वे बहुत कमजोर होती हैं।



इनसे सामान्य तौर पर कैंसर होने का कोई खतरा नहीं होता है। इसके लिए दुनिया भर में कई बड़े टेस्ट और रिसर्च भी हो चुके हैं। हालांकि लोकल और बिना ब्रांड वाले प्रोडक्ट्स के रेडिएशन से जरूर बचना चाहिए।



इस नए ट्रेंड के पीछे एक लाइफस्टाइल और मानसिक शांति का एंगल भी जुड़ा हुआ है। आजकल लोग 24 घंटे इंटरनेट और गैजेट्स से जुड़े रहने के कारण मानसिक रूप से थक चुके हैं।



ऐसे में वायर्ड इयरफोन लोगों को एक छोटा सा डिजिटल ब्रेक लेने में मदद करते हैं। इसके अलावा आजकल पुरानी चीजों का फैशन यानी रेट्रो ट्रेंड भी वापस आ रहा है। लोग पुराने जमाने के गैजेट्स को इस्तेमाल करना स्टेटस सिंबल मान रहे हैं और इसे पसंद कर रहे हैं।



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साउंड क्वालिटी के मामले में दोनों इयरफोन्स में क्या अंतर है

अगर हम आवाज की शुद्धता यानी ऑडियो क्वालिटी की बात करें, तो एक्सपर्ट्स आज भी वायर्ड इयरफोन को ही सबसे बेहतर मानते हैं। तार वाले इयरफोन में आवाज बिना किसी रुकावट के और बिल्कुल क्लियर सुनाई देती है।



यही कारण है कि प्रोफेशनल गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और म्यूजिक रिकॉर्डिंग जैसे बड़े कामों में आज भी वायर्ड ऑडियो को ही पहली पसंद माना जाता है। हालांकि पोर्टेबिलिटी के मामले में वायरलेस ईयरबड्स भी अपनी जगह काफी शानदार और आरामदायक माने जाते हैं।



वायरलेस ईयरबड्स में बाहर का शोर रोकने के लिए एक्टिव नॉइज कैंसलेशन जैसे बेहतरीन फीचर्स मिलते हैं। ये सफर के दौरान या जिम में कसरत करते समय काफी काम आते हैं। कुल मिलाकर दोनों ही तरह के इयरफोन्स के अपने फायदे और नुकसान हैं।



कई रिसर्च से यह बात साफ हो चुकी है कि कोई भी इयरफोन जो कान के बहुत अंदर जाता है, वह नुकसानदेह हो सकता है। सुरक्षित रहने का सबसे सीधा नियम यही है कि हमेशा वॉल्यूम कम रखें और कम समय के लिए इस्तेमाल करें।



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