भगवान शिव का अनोखा रूप और पांडवों के पापों से जुड़ा है केदारनाथ मंदिर का रहस्य
Aman Vaishnav | Nov 22, 2025, 12:56 IST
1 / 7
शिव जी का पहला मंदिरImage credit : Aman Vaishnav
भगवान शिव के साक्षात दर्शन होने पर पांडवों ने इस जगह पर पहला मंदिर बनवाया।
2 / 7
पंच कैदार का निर्माणImage credit : Aman Vaishnav
जब भगवान शिव बैल रूप में धरती में समाए तो उनके शरीर के भाग चार और स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं पांचों स्थानों पर पांडवों ने मंदिर बनाए जिन्हें आज पंच केदार के नाम से जाना जाता है।
3 / 7
धरती में समाय भगवान शिवImage credit : Aman Vaishnav
भीम ने अपने बल से भैंसे रूपी भगवान शिव को पकड़ने का प्रयास किया। इस प्रयास में भगवान शिव धरती में समा गए। जिससे उनका पिछला भाग (कूबड़) बाहर ही रह गया।
4 / 7
भगवान शिव की खोजImage credit : Aman Vaishnav
Kedarnath Temple: कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पांडवों ने अपने रिश्तेदारों को मारने का पाप महसूस किया। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान शिव की खोज शुरू की।
5 / 7
स्वर्ग जाने का मार्गImage credit : Aman Vaishnav
केदारनाथ धाम में शिव की पूजा और तपस्या करने के बाद पांडवों को उनके पापों से मुक्ति मिली। माना जाता है कि यहीं से पांडवों ने स्वर्ग जाने का मार्ग किया था।
6 / 7
त्रिकोणीय ज्योतिर्लिंग की पूजाImage credit : Aman Vaishnav
जिस स्थान पर शिव जी का कूबड़ प्रकट हुआ। पांडवों ने उस शिला की ही पूजा की। यही शिला आज त्रिकोणीय ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजी जाती है।
7 / 7
भगवान शिव का अनोखा रूपImage credit : Aman Vaishnav
Kedarnath Dham: पांडवों को दर्शन न देने के लिए भगवान शिव ने भैंसे का रूप धारण किया और केदारनाथ मंदिर में पशुओं के झुंड में छिप गए।