क्या है सांवलिया सेठ का रहस्य, जब भगवान कृष्ण ने एक गड़रिए के सपने में बताया था अपना पता
Aman Vaishnav | Nov 28, 2025, 10:57 IST
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मंदिर की शुरुआत (1840)Image credit : Aman Vaishnav
मंडफिया सांवलिया सेठ: कहा जाता है कि लगभग 1840 के आस-पास राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गांव में एक गड़रिया था, जिसका नाम भोलाराम गुर्जर था। एक दिन उसे एक अजीब सपना आया। सपने में भगवान ने उसे बताया कि जमीन के नीचे तीन मूर्तियां दबी हुई हैं।
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गुप्त दान और हंडी परंपराImage credit : Aman Vaishnav
इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान इसकी 'हंडी' परंपरा है। भक्त अपने व्यापार में हुए फायदे का एक हिस्सा गुप्त रूप से इस हंडी में दान करते हैं।
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शानदार सांवलिया सेठ मंदिरImage credit : Aman Vaishnav
भक्तों की आस्था की वजह से, मंदिर अब बहुत बड़ा बन चुका है। यह मंदिर आधुनिक डिजाइन का एक शानदार उदाहरण है।
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मंदिर कहां है?Image credit : Aman Vaishnav
सांवलिया सेठ जी का यह मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मंडफिया गांव में बना हुआ है।
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19 नवंबर को खुला दानपात्रImage credit : Aman Vaishnav
Lord Sanwaliya Seth Temple in Rajasthan: हाल ही में 19 नवंबर को जब मंदिर का दानपात्र खोला गया, तो ₹51 करोड़ से ज्यादा की रिकॉर्ड तोड़ राशि और साथ में 207 किलो चांदी और 1.2 किलो सोना निकला। डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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भगवान कृष्ण का स्वरूपImage credit : Aman Vaishnav
मंडफिया में स्थापित मूल प्रतिमा काले पत्थर से बनी है। इन्हें मुख्य रूप से चार भुजाओं वाले भगवान कृष्ण के स्वरूप में पूजा जाता है।
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भगवान कृष्ण की मूर्तियांImage credit : Aman Vaishnav
चित्तौड़गढ़ का सांवलिया सेठ मंदिर: जब भोलाराम ने उस जगह खुदाई करवाई, तो उन्हें भगवान कृष्ण की तीन मूर्तियां मिलीं। आज ये तीनों मूर्तियां तीन अलग-अलग मंदिरों में हैं।
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'सांवलिया सेठ' नाम क्यों पड़ा?Image credit : Aman Vaishnav
भक्तों का विश्वास है कि भगवान कृष्ण खुद उनके व्यापार और धन-संपत्ति का ध्यान रखते हैं। इसलिए प्यार से सांवलिया सेठ कहने लगे।