क्या आप भी ब्रश करने में करते हैं आलस, तो किडनी हो सकती है खराब; जानें मुंह की सेहत से जुड़े राज
लेकिन मुंह में लंबे समय तक संक्रमण और सूजन रहने से शरीर प्रभावित हो सकता है। इसलिए ओरल हेल्थ यानी मुंह की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रोजाना दांत साफ करें और मसूड़ों की देखभाल करें। परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना भी जरूरी है।
मसूड़ों की बीमारी से किडनी का क्या संबंध?
मसूड़ों की बीमारी और किडनी का रिश्ता क्यों बनता है? नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, इम्यून सिस्टम इसमें भूमिका निभाता है। खून के बहाव से जुड़ी प्रक्रिया की भी भूमिका है। रिसर्च में मसूड़ों की गंभीर बीमारी और किडनी की बीमारी के बीच संबंध मिला। मसूड़ों की इस गंभीर बीमारी को पेरियोडोंटाइटिस कहा जाता है।
मसूड़ों में बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया हों, तो शरीर उनसे लड़ता है। इस दौरान शरीर में सूजन पैदा होती है। थोड़े समय की सूजन शरीर की सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो दूसरे अंगों पर असर पड़ सकता है। किडनी भी प्रभावित हो सकती है।
मसूड़ों की बीमारी सीधा कारण क्यों नहीं?
रिसर्च में दोनों समस्याओं के बीच जुड़ाव देखा गया है। इससे साबित नहीं होता कि यह किडनी की बीमारी का सीधा कारण है। यानी जुड़ाव और कारण में फर्क है।
दांतों का संक्रमण बढ़ा सकता है मुश्किल
दांतों का संक्रमण कुछ लोगों में दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी कर सकता है। संक्रमण से ब्लड प्रेशर नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। यह उन लोगों के लिए अहम है, जिन्हें किडनी की बीमारी पहले से है।
डायलिसिस मरीज और मुंह की देखभाल
डायलिसिस मरीज और मुंह की देखभाल पर खास ध्यान जरूरी है। डायलिसिस (खून साफ करने की मशीनी प्रक्रिया) कराने वालों के लिए यह सलाह है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद कुछ दवाएं इम्यून सिस्टम को कमजोर करती हैं। ऐसे लोगों में संक्रमण से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। सर्जरी या ट्रांसप्लांट के दौरान दांतों और मसूड़ों का संक्रमण मुश्किल बढ़ा सकता है।
नोट-इन लक्षणों को हल्के में न लें। मसूड़ों से खून आए, तो इसे नजरअंदाज न करें। दांतों में दर्द रहे या मुंह में बार-बार परेशानी हो, तब भी नहीं। ऐसे में समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
रोजाना सफाई पर डॉ. घोटेकर की सलाह
डॉ. घोटेकर के मुताबिक, दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना उनकी सफाई जरूरी है। दिन में दो बार ब्रश करें, सुबह और रात को सोने से पहले। रात में, खासकर सोने से पहले, मीठा खाने से बचें। दांतों के दर्द को नजरअंदाज न करें। मुंह में छाले हों या परेशानी बनी रहे, तो चिकित्सकीय सलाह लें। पान मसाला और गुटखा न खाएं। शराब से भी दूरी रखें।
किडनी की सेहत के लिए पूरी नींद जरूरी
मुंह की सफाई के साथ अच्छी नींद भी जरूरी है। किडनी शरीर की रोजमर्रा की प्रक्रियाओं और नींद के चक्र से जुड़ी है। हर रात 7 से 8 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है। पर्याप्त नींद ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। ब्लड ग्लूकोज (खून में शुगर का स्तर) भी इससे काबू में रहता है। ये दोनों किडनी की सेहत के लिए अहम हैं।
कुछ अध्ययनों में बहुत कम या ज्यादा नींद किडनी की बीमारी से जुड़ी दिखी। इसमें यूरिन में प्रोटीन आने का खतरा भी शामिल है। क्रोनिक किडनी डिजीज यानी लंबे समय की किडनी की बीमारी। अध्ययन यह साबित नहीं करते कि कम नींद उसकी सीधी वजह है।
क्या सिर्फ ब्रश करना काफी है?
मुंह की सफाई सेहत का जरूरी हिस्सा है। लेकिन सिर्फ ब्रश करने से किडनी की बीमारी से बचाव की गारंटी नहीं मिलती। किडनी की सेहत पर कई चीजों का असर पड़ता है। इनमें ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और पहले से मौजूद बीमारियां शामिल हैं। इसलिए दांतों और मसूड़ों की सफाई के साथ पूरी सेहत का ध्यान रखें। डायलिसिस चल रहा हो या ट्रांसप्लांट हुआ हो, तो डॉक्टर की सलाह मानें।
FAQs
- क्या मसूड़ों की बीमारी से किडनी खराब हो जाती है?
यह साबित नहीं हुआ है। रिसर्च में दोनों के बीच संबंध मिला है, पर सीधा कारण साबित नहीं हुआ है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक खतरा बढ़ सकता है। - किन लोगों को मुंह की सेहत पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए?
पहले से किडनी की बीमारी वालों, डायलिसिस कराने वालों और ट्रांसप्लांट के बाद इम्यून सिस्टम कमजोर करने वाली दवाएं लेने वालों को। इन लोगों में संक्रमण से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। - किडनी की सेहत के लिए कितनी नींद जरूरी है?
हर रात 7 से 8 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है। यह ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को काबू में रखने में मदद करती है। बहुत कम या ज्यादा नींद का संबंध किडनी की बीमारी के खतरे से दिखा है।