News Strike: सोशल मीडिया पर एक्टिव कांग्रेस, जमीन पर गायब, ऐसे लड़ेगी आदिवासी-किसानों की लड़ाई?
News Strike | न्यूज स्ट्राइक:सोचिए अगर लोग आपस में बात करना बंद करके सिर्फ इस तरह मेल मुलाकात करते रहें। वैसे ऐसा अब होने भी लगा है। क्या ऐसी मेल मुलाकात, आमने सामने मिलने से ज्यादा असरदार हो सकती है। पर आम लोगों का तो चलता है, लेकिन क्या पॉलिटिकल पार्टीज सिर्फ मोबाइल की स्क्रिन तक सिमट कर धरना, आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और समर्थन देने का काम कर सकती हैं।
अक्सर बीजेपी पर इवेंट बेस राजनीति का आरोप लगाने वाली कांग्रेस खुद क्या कर रही है। आपने नोटिस किया है। कांग्रेस खुद सोशल मीडिया प्रोटेस्ट तक सिमट कर रह गई है। किसानों को समर्थन देने की बात हो या आदिवासियों से हमदर्दी दिखाने की बात हो कांग्रेस बस सोशल मीडिया पर एक्टिव नजर आ रही है।
कांग्रेस नेताओं की ट्विटर चुप्पी
आप अगर कांग्रेस की विचारधारा को सपोर्ट करते हैं। किसी जमाने में कांग्रेस के वोटर रहे हैं या कांग्रेस के शुभचिंतक रहे हैं। तो जरा एक दिन सुबह उठिए। अपना मोबाइल या लैपटॉप लीजिए और ट्विटर ओपन करिए।
कुछ चुनिंदा कांग्रेस नेताओं हैंडल्स को फॉलो करना शुरू कर दीजिए। दो तीन दिन उनके ट्विटर हैंडल को वॉच भी कीजिए। उसके बाद प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की इन पोस्ट का आंकलन भी कीजिए। वो क्या कहती हैं।
आपको लगेगा कि कांग्रेस के तमाम बड़े नेता किसी रोजमर्रा के नियम के तहत अपना ट्विटर अकाउंट ओपन करते हैं। उस पर किसानों से जुड़ी या किसी मुद्दे से जुड़ी कोई पोस्ट डालते हैं और फिर बस गायब हो जाते हैं। हम आपको इसके दो तीन ताजा उदाहरण बताते हैं।
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सिंगरौली में आदिवासी की पिटाई
सिंगरौली में आदिवासी बैगा की पिटाई का मामला बेहद गंभीर है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इस वीडियो में आप देख सकते हैं एक शख्स को सुरक्षाकर्मी बुरी तरह पीट रहे हैं। जो शख्स पिट रहा है वो है अन्ने लाला बैगा। अन्ने लाल बैगा सिंगरौली में रहते हैं। उम्र है चालीस साल और ये दर्दनाक नजारा सिंगरौली के उत्तरी कोलफील्ड्स लिमिटेड के निगाही कोल हैंडलिंग प्लांट का है।
जहां अन्ने लाल बैगा लकड़ियां बीनने चले गए थे। ये बात सुरक्षाकर्मी को इस कदर नागवार गुजरी कि उसने हॉकी स्टिक से अन्ने लाल बैगा की पिटाई शुरू कर दी। ये घटना कुछ दिन पुरानी है, लेकिन चंद घंटे पहले ही वायरल हुई है। इस वीडियो में अन्ने लाल बैगा बार-बार मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन वो तब से लेकर अब तक अनसुनी ही रह गई।
आदिवासी से सुरक्षाकर्मियों की बर्बरता
ये एक आम घटना नहीं है। आप गौर से वीडियो देखिए जब अन्ने लाल बैगा को पीटा जा रहा है तो एक आवाज भी सुनाई दे रही है कि सिर छोड़ो पैरों पर मारो। यानी कि एक आदिवासी शख्स को मारने के लिए किस तरह उकसाया जा रहा है। कुछ और खराब भाषा में सुरक्षाकर्मी को ऐसे ही उकसाने की कोशिश कर रहे हैं।
ये एक वीडियो इस बात की गवाही दे रहा है कि प्रदेश में आदिवासी समाज का क्या हाल है। सच्चाई तो इससे भी ज्यादा कड़वी और दर्दनाक है। क्योंकि अन्ने लाल बैगा ने अपनी आपबीती बताने के बाद ये भी बताया है कि सिंगरौली में अक्सर आदिवासियों के साथ ऐसा ही सलूक होता है। अन्ने ने पुलिस को बताया कि वो अपनी पत्नी के साथ लकड़ी बीनने गया था, लेकिन सुरक्षाकर्मियों को शक हुआ कि वो कबाड़ चोरी कर रहा है। इसलिए उसे पीट दिया।
ये घटना जिस तेजी से वायरल हुई उसी तेजी से कांग्रेस के अलग-अलग हैंडल से इस घटना की तीखी निंदा की गई। इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो वायरल हुआ।
इस वीडियो में पटवारी के हाथ में मोबाइल दिखाई देगा। वो खुद कार में बैठे हैं और मोबाइल पर एक वीडियो कॉल पर बात कर रहे हैं। पहले वो अन्ने लाल बैगा की पिटाई का पूरा वीडियो प्ले करते हैं और फिर वीडियो कॉल पर अन्ने लाल बैगा से बात करते हुए नजर आते हैं।
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कांग्रेस की सिस्टमेटिक पहल: वीडियो कॉल
इस पूरे वीडियो से ये तो अंदाजा हो ही गया हो कि ये कोई रेन्डम कॉल नहीं था। सब कुछ सोचसमझ कर सिस्टमेटिक तरीके से किया गया है। वीडियो कॉल से पहले ही उसे रिकॉर्ड करने के सारे अरेंजमेंट कर लिए गए।
बहुत संभव है कि कॉल से पहले ही कोई कांग्रेसी अन्ने लाल बैगा के पास पहुंच चुका हो और उसे कॉल पर लिया हो। ये एक अच्छी पहल है। हम इसका विरोध नहीं करते।
एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष किसी मतदाता को कॉल करके उसका हाल चाल जानता है। इस पहल से भला कैसे इंकार किया जा सकता है। बल्कि, किसी का दर्द साझा करने का ये अच्छा तरीका है।
कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति
सवाल तो ये है कि कांग्रेस के लिए क्या सिर्फ कॉल करके उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करना काफी है। एक तर्क ये हो सकता है कि जैन जी वोटर्स को लुभाने के लिए सोशल मीडिया पर एक्टिव होना जरूरी है। जाहिर है बिलकुल जरूरी है। क्योंकि अब माइंडमेकअप करने के लिए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना और अपनी आवाज जुटाना बेशक जरूरी है।
पर जो जरूरी नहीं है वो ये है कि हर लाइक या फॉलोअलर वोटर में तब्दील नहीं हो सकता। वर्चुअल मीडिया पर थंम्स अप करने वाली भीड़ पोलिंग बूथ पर ईवीएम में आपके पार्टी सिंबल पर अगूंठा दबाएगी या नहीं कहना मुश्किल है। इसलिए वर्चुअल लड़ाई के साथ साथ जमीनी जंग भी लड़ते रहना जरूरी है।
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कांग्रेस की आदिवासी मुद्दे पर चुप्पी
तो कांग्रेस को ही ये बताना चाहिए कि इस पूरे मुद्दे पर उसकी क्या प्लानिंग है। क्या कांग्रेस का इतना करना काफी है कि वो अन्ने लाल बैगा से फोन पर बात करे और काम खत्म। आज का विरोध दर्ज करने का एजेंडा पूरा हो गया। आलाकमान तक पोस्ट पहुंच गया।
इस बात का हल्ला हो गया कि प्रदेशध्यक्ष ने एक ताजे मुद्दे पर कदम बढ़ाया और बात कर ली। क्या इतना काफी है। किसी समय प्रदेश में लगातार सत्ता में रही कांग्रेस अब 66 सीटों पर सिमटी पड़ी है। तब क्या एसी कार में बैठकर आदिवासी का दर्द साझा करने पर पीठ थपथपाई जा सकती है। वो भी तब जब आदिवासी कांग्रेस का ही कोर वोटर रहा है।
कांग्रेस की जमीन से दूर सोशल मीडिया
हो सकता है कि कोई कांग्रेसी या जीतू पटवारी खुद सिंगरौली जाकर अन्ने लाल बैगा से मुलाकात भी कर लें। तब क्या होगा। उसके बाद भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस धड़ाधड़ फोटो वीडियो शेयर करेगी और बस। बात खत्म।
किसानों की समस्याओं के मुद्दे पर भी कांग्रेस यही कर रही है। कभी कभार जमीन पर उतरती। बाकी हर रोज नियम से किसानों की समस्या से जुड़ा एक पोस्ट कुछ कांग्रेसी पोस्ट करते हैं। उनके जवाब में सीएम मोहन यादव एक दिन जमीन पर उतरते हैं, किसानों के बीच जाते हैं और मुद्दा खत्म कर देते हैं।
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सोशल मीडिया से बाहर आना होगा
हम फिर कहते हैं सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने में कोई बुराई नहीं है। ये नए जमाने के वोटर्स और पॉलिटिक्स की डिमांड है। पर सिर्फ इतनी ही डिमांड पूरी करके कांग्रेस चुनावी जंग में वापसी कर सकती है ये थोड़ा मुश्किल है। रोज के पोस्ट देखकर आलाकमान को इस भ्रम में डाला जा सकता है कि वो प्रदेश के मुद्दों पर कितने एक्टिव हैं, लेकिन वोटर्स को नहीं।
वोटर्स की लड़ाई जीतने के लिए कांग्रेस को खुद जमीन पर उतरना होगा। जमीनी नेता की तरह उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करना होगा। ये जैन जी की नहीं उन वोटर्स की डिमांड है जो बरसों बरस से कांग्रेस का साथ देते आ रहे हैं। सिंगरौली में इतना बड़ा मुद्दा सामने आने के बाद भी कांग्रेस सिर्फ ट्विटर पर बात करने के बाद उसे छोड़ देती है तो फिर जीत की आस भी छोड़ ही देना चाहिए।
होना तो ये चाहिए कि अन्ने लाल बैगा की तरह पीड़ित आदिवासियों को एकजुट किया जाए। उनका दर्द क्या है ये सुना जाए और लोगों तक उसे पहुंचाया जाए। इस जमीनी लड़ाई से ही तो कांग्रेस की जमीन और आधार दोनों मजबूत होंगे। वर्ना फोलोअर्स तो बढ़ते रहेंगे, लेकिन वोट्स की संख्या लड़खड़ाती रहेगी।