NEWS STRIKE: बंडा शराब कांड के बीच राई डांस पर विवाद, बीजेपी नेता की माफी
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जहरीली शराब से हुई मौतों पर बीजेपी नेता का नंगा नाच, आज मुझे मेरे शब्दों के लिए माफ कीजिएगा। लेकिन इस दिल दहला देने वाली घटना का जिस तरह से बीजेपी नेता के बर्थडे पर माखौल उड़ा है, उसे देखकर इससे हल्के शब्दों का चयन करना मेरे लिए मुश्किल हो रहा है। आप भी ये वीडियो देखेंगे तो शायद गुस्सा रोक नहीं पाएंगे और ऐसा ही कोई रिएक्शन देंगे। बीजेपी नेता जिनका ताल्लुक बुंदेलखंड से ही है, जिनसे कुछ दूरी पर ही जहरीली शराब ने तीन दर्जन लोगों की जान ले ली। उन्होंने अपने बर्थडे का जश्न बड़ा ही खुलकर मनाया। और, इस जश्न में इस ट्रेजेडी का खूब मजाक भी उड़ा। बवाल हुआ तो बीजेपी नेता ने बड़े भोलेपन से माफी भी मांग ली।
नमस्कार
सागर की गंभीर घटना आपको याद ही होगी। तकरीबन सात या आठ दिन पहले की इस घटना से पूरा प्रदेश सकते में आ गया था। सागर जिले में जहरीली शराब से मौत का मामला सामने आया। शुरूआत में मौत का आंकड़ा कुछ अंकों तक सिमटा रहा। औऱ, फिर धीरे धीरे मौत का आंकड़ा बढ़ता ही गया।
ताजा खबरों के मुताबिक जहरीली शराब की वजह से मरने वालों की संख्या अब 37 तक पहुंच गई है। यानी कि तीन दर्जन से भी ज्यादा। इस घटना के बाद तीस आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, और बीजेपी के बड़े बड़े नेताओं से इस मामले के तार जुड़ रहे हैं। इस गंभीर घटना पर हमने पूरा एक सेगमेंट तैयार किया था और ये सवाल भी पूछे थे कि आखिर मप्र में जहरीली शराब बिकी कैसे। इस राज्य में शराब बिक्री पर कोई बैन नहीं है। शराब धड़ल्ले से बिकती है और पी भी जाती है, फिर जहरीली शराब की नौबत कैसे आई। उस पर भी हद तब हुई जब सरकारी महकमों के हवाले से ही सोशल मीडिया पर असली शराब पहचानने के तरीके बताती डिटेल शेयर की गई। इस पूरे मुद्दे को जानना समझना चाहते हैं तो आप डिस्क्रिप्शन में दी गई लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।
खैर अब बात इससे आगे की करते हैं. इस घटना पर एक बीजेपी नेता ने जो किया, उसे देखकर कोई भी शर्मसार हो जाएगा। बीजेपी नेता का बर्थडे था और उन्होंने बकायदा डांस का प्रोग्राम अरेंज किया. जैसा आमतौर पर बुंदेलखंड के इलाकों में होता है।
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बुंदेलखंड के राई डांस का बदल दिया अंदाज
आपने राई डांस का नाम जरूर सुना होगा। ये एक डांस फोर्म है, जिसे कई मौकों पर खासतौर पर शुभ समय पर राई डांस किया जाता है। बुंदेलखंड में राई डांस और राई डांसर्स को खासी तवज्जो मिलती है और सम्मान भी मिलता है। लेकिन समय समय के साथ साथ कई डांसर्स ने इसे मॉडिफाई किया है और इसे अलग तरह से पेश करना शुरू किया है। जिस वजह से कई बार राई डांस पारंपरिक डांस से ज्यादा जश्न में किया जाने वाला या लुभाने वाला डांस लगने लगता है। बीजेपी नेता ने भी कहने को तो राई डांस और राई पेशकश भी करवाई, लेकिन उसे पेश करने का तरीका बिलकुल अलग था।
मैं आपको विजुअल्स दिखाता हूं। कॉपीराइट नियमों का पालन करते हुए जितने वीडियो प्ले हो सकते हैं। वो आप देखिए और अंदाजा लगाइए कि इस डांस के बारे में आप क्या कहेंगे। आपको मंच पर माइक पकड़ कर एक सिंगर गाते हुए दिखाई देगा. और उसके आसपास कुछ डांसर्स नजर आएंगी। नृत्यांगनाओं ने बेशक घूंघट डाला हुआ है लेकिन उनकी पोशाक पारंपरिक राई डांस की पोशाक से ज्यादा मॉर्डन डांस वाला लिबास ज्यादा नजर आती है, जिसे पहन कर वो मंच पर भरी सभा में डांस कर रही हैं। शब्दों पर गौर न करें तो शायद आप इस पेशकश पर फिदा भी हो सकते हैं। क्योंकि पेशकश वाकई शानदार है। सिंगर भी माहौल बनाने में कामयाब रहा है, लेकिन शब्दों पर गौर करना भी जरूरी है। क्योंकि शब्दों पर ही सारा बवाल है। कोशिश कीजिए आप एक बार सुन सकें कि ये सिंगर क्या गा रहा है।
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वीडियो का ऑडियो
अगर आप न समझें हो मैं कुछ शब्दों को दोहरा देता हूं। पाऊ ना पीयू घने घने.. बंडा में मर गए केयू जने. जिसका मोटा मोटा अर्थ ये है कि ज्यादा मत पियो। इसकी वजह से बंडा में लोग मर गए हैं। अब आप इस पेशकश के बारे में क्या कहेंगे। जिस घटना को अभी बमुश्किल दस दिन हुए हैं, उस गंभीर घटना पर गाना बन भी गया। उस पर डांस भी तैयार हो गया, और बेहद रिवीलिंग ड्रेसेस पहन कर डांसर्स ने उस पर पफोर्म भी कर दिया, और जिस तरह का माहौल है उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि सुनने वालों ने जम कर तालियां भी जरूर पीटी होंगी।
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जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता पटेल के पति का मना था जन्मदिन
अब ये जान लेते हैं कि इस फूहड़ पेशकश के आयोजक कौन थे या किस नेता के बर्थडे पर ये डांस और गाना फुल ऑन एनर्जी के साथ पेश किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता पटेल के पति गौरव पटेल के जन्मदिन की पार्टी में ये डांस और गाना हुआ। गौरव पटेल खुद बीजेपी के नेता हैं और जहां जहां पत्नी का नाम बतौर जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में लिखा दिखता है।
उनमें से अधिकांस जगह पर गौरव पटेल का नाम भी साथ ही में नजर आता है। खबरों के मुताबिक 12 सितंबर को गौरव पटेल के जन्मदिन का जश्न मना। जगह थी दमोह पथरिया मार्ग पर स्थित कक्कू ढाबा और मैरिज गार्डन, यहां पर बुंदेली सिंगर महिपाल ठाकुर को बुलाया गया था। मंच पर संभवतः वही परफोर्म करते नजर आ रहे हैं। अपनी बाकी पेशकश के साथ महिपाल ठाकुर ने बंडा की घटना पर भी गाना गाया।
अब बात करते हैं सुनने वालों की। खबरों में दावा किया गया है कि इस कार्यक्रम में सांसद राहुल सिंह, राज्य मंत्री लखन पटेल और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया मौजूद थे। इसके अलावा भी कई और बीजेपी नेता की वहां मौजूदगी बताई है।
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जश्न पर उठे गंभीर सवाल
अब आप ही सोचिए कि जहरीली शराब से मौतें हुई सागर के बंडा में। उससे कुछ ही दूरी पर है दमोह। यानी कि जो नेता हैं उनका ताल्लुक बुंदेलखंड से ही है। क्या वो मात्र एक हफ्ते में ही भूल गए कि उनके इलाके में कितनी गंभीर घटना हो चुकी है। तीस से ज्यादा लोग मर चुके हैं और जो जिंदा हैं उनमें से कई अपनी आंखें गंवा चुके हैं। उसके बीच ऐसा जश्न करना क्या बीजेपी नेताओं को शोभा देता है या ये नेता अपनी सरकार की मस्ती में इतने चूर हो चुके हैं कि आम लोगों की मौत पर जश्न मनाना भी इन्हें खलता नहीं है या इन आम लोगों का दर्द इन्हें इस लायक लगता ही नहीं है कि उस पर गौर किया जाए।
गौरव पटेल ने घटना पर माफी मांगी!
कुछ स्थानीय खबरों में ये दावा भी किया गया है कि गौरव पटेल ने घटना पर माफी भी मांगी और कहा कि सिंगर शराब पीने की खामियां बता रहा था। उस वक्त उन्होंने खुद गाने के बोल पर गौर नहीं किया था। इसे सुनकर किसी को बुरा लगा हो तो वो माफी मांगते हैं। अब बताइए ये भला क्या बात हुई. बीजेपी नेता के जन्मदिन का जश्न क्या इतना जरूरी था कि वो इस घटना को ही भूल गए। या उन्हें लगा कि कार्रवाई करना सरकार का काम है और वो कर भी रही है. तो फिर भला उन्हें जश्न टालने की क्या जरूरत। वो इतना भी सब्र नहीं कर पाए कि उनके ही इलाके में जिन घरों में मौते हुईं हैं कम से कम उनके आंसू सूख जाएं। कम से कम वो लोग डिस्चार्ज हो जाएं जो इस जानलेवा घटना में किसी तरह बच गए हैं।
ताज्जुब तो इस बात का है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के पति के जन्मदिन के ऐसे फूहड़ जश्न में बीजेपी के कुछ बड़े और जिम्मेदार नेता भी पहुंच गए। उन्होंने क्या सोचा था किसी को पता नहीं चलेगा और जश्न भी मन जाएगा। सोशल मीडिया के दौर में अगर उनके ख्याल ऐसे हैं तो इस भोलेपन पर हम वारे जाएं और क्या कह सकते हैं।
जब इन नेताओं ने जश्न में शामिल होने का फैसला किया होगा और जब ये लाइनें सुनी होंगी तब भी ये अहसास नहीं हुआ कि वो कितने मतदाताओं के घर के बुझे चिराग पर जश्न मनाकर तालियां पीट रहे हैं. मेरा सवाल बीजेपी के उन नेताओं से भी है जो नैतिकता की बात करते नहीं थकते. क्या वो अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं की ऐसी हरकत देखकर जवाब तलब करेंगे. एक्शन ले सकें तो बढ़िया मैसेज दे सकेंगे वर्ना इतना तो किया ही जा सकता है कि जश्न मनाने वाले नेताओं को ये ताकीद किया जाए कि जरा सब्र करना सीखें. नहीं तो पार्टी की भद्द सरेआम पिटेगी और क्या पता जनता की याददाश्त जरा तगड़ी हो जाए और चुनाव तक वो इन बातों को भुला न सके तो खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।
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