News Strike: एक कचौड़ी दो समोसा...’ शिवराज ने क्यों दोहराया वायरल नारा, क्या BJP में फिर उठे उपेक्षा के सवाल?

Harish Divekar | Oct 06, 2026, 07:00 IST
शिवराज सिंह चौहान, वायरल नारा और BJP में उपेक्षा के सवाल
News Strike:एक कचौड़ी दो समोसा… इस वायरल नारे से शिवराज सिंह चौहान का क्या ताल्लुक है। एक बात तो माननी पड़ेगी जेन जी के नारे इन दिनों इतना वायरल होते हैं कि आम लोगों से लेकर राजनेता तक उन नारों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार इस चक्कर में असल मुद्दा पीछे छूट जाता है और डायलॉग लाइमलाइट में आ जाते हैं।

शिवराज की भूमिका पर फिर उठे सवाल

शिवराज सिंह चौहान का नाम प्रदेश का बच्चा-बच्चा जानता हैं। लगातार 18 साल वो सीएम रहे तो तमाम वर्गों के लाड़ले बने रहे। पर हर राजनेता को एंटीइंकबेंसी का सामना करना ही पड़ता है। ये एंटी इंकंबेंसी पार्टी पर भारी न पड़ जाए इसलिए इस बार पार्टी ने प्रदेश का चेहरा बदल दिया।



उसके बाद से ही ये खबरें अक्सर सतह पर आती हैं कि शिवराज सिंह चौहान अपनी ही पार्टी में उपेक्षित हैं। जब वो मात्र विधायक थे। तब ये अटकलें जोरों पर थीं कि अब शिवराज सिंह चौहान हाशिए पर हैं। उन्हें कैबिनेट में भी जगह नहीं मिली और पार्टी ने संगठन स्तर पर उन्हें दक्षिण भारतीय राज्यों की जिम्मेदारी सौंप दी।



हालांकि, शिवराज का सितारा ज्यादा दिन अस्त नहीं रहा। लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिला वो जीते और मोदी कैबिनेट में कृषि मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बीजेपी में सबसे प्रचलित शेर है कि पानी उतरता देख मेरे किनारों पर घर मत बना लेना। मैं समंदर हूं लौटकर आऊंगा। ये शेर कई नेताओं ने सुना और सुनाया, लेकिन शिवराज पर सबसे ज्यादा खरा उतरा।



क्यों फिट बैठते हैं शिवराज पर ये डायलॉग

ऐसे बहुत से शेर और डायलॉग हैं जो शिवराज पर खरे ही उतर रहे हैं। इसे आप इत्तेफाक कह सकते हैं या टाइमिंग का खेल। पर आप भी हमारी बात पर यकीन करने को मजबूर हो जाएंगे। एक मिसाल तो हम पेश ही कर चुके हैं। जो शेर नरोत्तम मिश्रा की जुबानी हिट हुआ। पर फबता ज्यादा शिवराज पर है।



इसके बाद एक डायलॉग प्रदेश की राजनीति में प्रचलित हुआ। टाइगर अभी जिंदा है। सलमान खान के इस हिट डायलॉग को शिवराज सिंह चौहान ने भी मंच से कहा और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कहा। ये साल 2020 के आसपास की ही बात है। आप तब से अब तक पॉलिटिकल ग्राफ देखें तो ये डायलॉग भी आपको शिवराज पर ही ज्यादा फिट नजर आएगा।



दिल्ली यूनिवर्सिटी के नारों ने खींचा ध्यान

अब बात करते हैं नए नारे की। नारा है एक कचौड़ी दो समौसा इन मर्दों का क्या भरोसा। पहले इस नारे का संदर्भ आपको समझा देते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में महिसा सुरक्षा और यौन हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। और जिस तरह से जेन जी के प्रोटेस्ट में उनके नारे फेमस हुए थे। उसी तरह इस विरोध प्रदर्शन के नारे भी जबरदस्त तरीके से हिट हुए। कुछ और नारों की बानगी भी देखिए।



  • मेरे सर में दर्द है,

इसका कारण मर्द है।



  • समोसा कचौरी गरम करो,

मर्द जात शर्म करो।



  • एक जीरा दो अजवाइन,

मर्द समाज दो रिजाइन।



  • एक सुत्ता दो चाय,

मर्द जात हाय हाय।



  • दो कबाब एक बिरयानी,

हर मर्द की अलग कहानी।



  • दो कुलचे एक बिरयानी,

इन मर्दों की खत्म कहानी।



वायरल नारे से जुड़ा शिवराज का कनेक्शन

ऐसे और भी तमाम नार थे, लेकिन एक कचौड़ी दो समोसा वाला नारा सोशल मीडिया यूजर्स को कुछ ज्यादा ही पसंद आ गया। इस नारे पर इतने मीम्स वायरल हुए हैं कि पूछिए मत। आप नारा लिखकर वो सारे मीम्स चैक कर सकते हैं।



इस ट्रेंडिंग नारे से इंप्रेस हुए प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान। अब हम आपको बताता हैं नारे और शिवराज का कनेक्शन। शिवराज सिंह चौहान भोपाल में एक कार्यक्रम में थे। जहां उन्होंने अपने भाषण में इस नारे का इस्तेमाल किया।



अमित शाह के मंच से गैरमौजूदगी से बढ़े सवाल

वैसे तो शिवराज सिंह चौहान ने इस नारे का इस्तेमाल शिवराज सिंह चौहान ने वाकई महिला सुरक्षा के मद्देनजर किया था, लेकिन इसके कई मायने निकाले गए। राजनीति में हर बात उस समय, जगह और मौके को देखकर आंकी और परखी जाती है।



शिवराज ने ये नारा उस समय कहा जब वो खुद भोपाल में थे और उसी समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी भोपाल में थे। जिस वक्त अमित शाह सीएम मोहन यादव के साथ मंच पर खड़े होकर श्वेत क्रांति का झंडा बुलंद कर रहे थे। उसी समय कुछ ही दूरी पर शिवराज सिंह चौहान एक सभा में ये नारा दोहरा रहे थे। यही टाइमिंग कई सवाल खड़े कर रही है।



अमित शाह के साथ मंच पर प्रदेश के सीएम, डिप्टी सीएम, मंत्री सब थे। जब उसी समय केंद्रीय कृषि मंत्री भोपाल में थे। तो अमित शाह के साथ मंच पर क्यों नहीं थे। अब अगर ये तर्क दिया जाए कि सम्मेलन गौ पालकों का था किसानों का नहीं तो ये बिलकुल ही बेमानी कारण है। क्योंकि अधिकांश किसान गौ पालक भी हैं।



इस लिहाज से शिवराज का मंच पर न होना एक खटकने वाली बात है और यहीं से ये अटकलें तेज हो चुकी हैं कि क्या शिवराज सिंह चौहान की अनदेखी की गई। क्या प्रदेश के मुद्दों से उन्हें दूर करने की कोशिश की जा रही है।



प्रोटोकॉल पर शिवराज की नाराजगी आई सामने

असल में इसके पीछे एक वजह और भी है। अमित शाह के दौरे से कुछ ही दिन पहले हुई कोर कमेटी की बैठक में शिवराज सिंह चौहान प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठा चुके थे। उन्होंने बैठक में प्रोटोकॉल के फॉलो न होने पर भी सवाल उठाए थे। उस वक्त भी इसे शिवराज सिंह चौहान की टीस के रूप में देखा गया।



शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में बताया कि वो बतौर केंद्रीय मंत्री जिस भी जिले में जाते हैं वहां के कलेक्टर और एसपी प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते। नियम ये कहते हैं कि कोई भी केंद्रीय मंत्री किसी जिले में जाएगा तो जिले के सभी प्रशासनिक प्रमुखों को भी वहां मौजूद रहना होगा।



अफसरशाही पर मंत्रियों के भी उठे सवाल

बैठक की अंदर की खबर ये है कि शिवराज सिंह चौहान ने ये मुद्दा उठाया तो कई और मंत्रियों ने भी उनकी हां में हां मिलाई। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और सीनियर मिनिस्टर कैलाश विजयवर्गीय ने भी अधिकारियों के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए।



बैठक से जुड़ी ये अटकलें वायरल हुईं तो विपक्ष को भी हमलावर होने का मौका मिला और सरकार पर अफरशाही के नीचे दबे होने के आरोप भी लगे। बाकी मंत्रियों और शिवराज सिंह चौहान की बात अलग है।



शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के 18 साल सीएम रहे। प्रदेश की आधी सरकारी मशीनरी वही है जो कभी उनके हुक्म पर चला करती थी। उन्हें मुखिया की गद्दी से उतरे भी महज तीन ही साल हुए हैं। इतनी जल्दी अगर अफसरशाही उन्हें दरकिनार कर रही है तो ये वाकई सोचने वाली बात है।



सियासत में किसका क्या भरोसा...?

कहते हैं राजनीति में सिर्फ उगते सूरज को सलाम करते हैं। क्या केंद्रीय मंत्री के पद पर रहना और सीएम की कुर्सी छिन जाना। सूरज के गिरने का संकेत है। अगर ऐसा है तो शिवराज को नारा कुछ यूं कहना चाहिए। एक कचौड़ी दो समोसा, राजनीति में किसका क्या भरोसा। News Strike, न्यूज स्ट्राइक

Tags:
  • News Strike
  • न्यूज स्ट्राइक
  • शिवराज सिंह चौहान
  • वायरल नारा
  • अमित शाह
  • राजनीतिक उपेक्षा
  • Shivraj Singh Chouhan
  • Viral Slogan
  • BJP Politics
  • भोपाल