News Strike: राजेंद्र भारती आउट, नरोत्तम मिश्रा इन! क्या यही है बीजेपी की रणनीति? मोहन कैबिनेट पर पड़ेगा क्या असर?
News In Short
- राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द, दतिया में उपचुनाव होगा।
- नरोत्तम मिश्रा की विधानसभा वापसी की संभावना।
- बीजेपी के फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए।
- चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार है।
- क्या राजेंद्र भारती का मामला लोधी जैसा साबित होगा?
News In Detail
मध्य प्रदेश | न्यूज स्ट्राइक। News Strike:राजेंद्र भारती की रवानगी होगी तो क्या नरोत्तम मिश्रा की एंट्री विधानसभा में तय है। अगर ऐसा हुआ तो मोहन कैबिनेट का स्वरूप कितना बदलेगा। क्या एक और दिग्गज नेता को टेकल करने की स्थिति में है बीजेपी सरकार का मंत्रिमंडल।
देर रात कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने से कई सवाल उठ रहे हैं। सब पर बात होगी। कुछ पुराने मुद्दे भी बताएंगे। जिन पर पहले कभी इतनी तेजी में फैसला नहीं लिया गया। जो ये इशारा करता है कि इस बार इस फैसले से यूटर्न लेना मजबूरी बन सकता है।
सवाल ये भी है कि जब राजेंद्र भारती पर विधानसभा में तेजी से कार्रवाई हुई है तो नरोत्तम मिश्रा पर अब तक क्यों नहीं हुई।
विधानसभा की कार्यवाही से राजनीतिक उबाल
देर रात अचानक अदालतों का खुलना और कार्यवाही करना सुर्खियों में होता है। जब किसी सदन में भी देर रात तक पॉलिटिकल अफरा तफरी होती है और काम चलता है तो सुर्खियां और अक्सर कंट्रोवर्सी भी बन ही जाती है।
मध्यप्रदेश की शांत और सुस्त सी राजनीति में भी विधानसभा में देर रात की कार्यवाही ने उबाल ला दिया है। राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है। कांग्रेस टेंशन में है आरोपों का पुलिंदा खोल चुकी है और बीजेपी सांसत में है कि जो किया वो सही किया या नहीं और अब आगे क्या किया जाए।
राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त, उपचुनाव तय
मामला कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती से जुड़ा हुआ है। कुछ घंटो पहले ये बात कहता तो राजेंद्र भारती को विधायक कहता पर दो और तीन अप्रैल की दरम्यानी रात को विधानससभा अध्यक्ष ने उन्हें पद से हटाने का फैसला सुना दिया।
वैसे तो मामला इस कदर छाया हुआ है कि आप सब इसके बारे में जानते ही होंगे। फिर भी थोड़ा शॉर्ट में मामला समझा देता हूं। राजेंद्र भारती पर एफडी मामले में धोखाधड़ी का आरोप है। उस पर आरोप है कि एक पूर्व कैशियर के साथ मिलकर उन्होंने साल 1998 से 2011 के बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी की और अवैध तरीके से ब्याज हासिल किया।
इस मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली की एमपी एमएलए कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी और एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद उन्हें जमानत भी मिल गई। जेल जाने की नौबत तो नहीं आई, लेकिन राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता जरूर छिन गई। यानी कि दतिया सीट अब खाली हो चुकी है। वहां उपचुनाव होंगे।
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राजेंद्र भारती मामले में बीजेपी पर सवाल
जाहिर है इस फैसले का विरोध होना ही था। जब राजेंद्र भारती को जमानत मिल चुकी थी और वो बडी अदालत में जाने का फैसला कर चुके थे। तब इतनी जल्दी में मध्यप्रदेश विधानसभा में उन्हें हटाने का फैसला क्यों लिया गया। बीजेपी क्यों इतनी डेस्पेरेट होकर ये कार्यवाही करने पर मजबूर हुई। फैसला रातोंरात क्यों लिया गया।
सुबह उठकर सरकारी समय पर दफ्तर खुलने और विधानसभा खुलने का इंतजार क्यों नहीं किया गया। बीजेपी को आखिर किस बात का डर था। ये सारे सवाल बीजेपी से पूछे जाना तय ही थे और पूछे गए भी। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और ये सारे सवाल मीडिया के सामने रखे और चंद आरोप भी लगाए।
जीतू पटवारी के सवाल, बीजेपी पर निशाना
जीतू पटवारी के सवालों को दरकिनार भी नहीं किया जा सकता। जो विधानसभा अब तक निर्मला सप्रे पर कोई फैसला नहीं ले पाई है। जो कांग्रेस में रहते हुए बीजेपी को समर्थन दे चुकी हैं। इस बात को डेढ़ साल का समय हो चुका है। तब विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने रातोंरात विधानसभा में आकर ये फैसला क्यों लिया।
ये जवाब तो मिलना ही चाहिए। क्या ये गेम सिर्फ राज्यसभा के लिए है। अगर हां तो भी इसकी कोई दरकार नहीं थी। बीजेपी किसी एक नए चेहरे को मैदान में उताकर कांग्रेस का खेल खराब कर ही सकती थी। फिर अलोकतांत्रिक कार्रवाई करने जैसे इल्जाम अपने सिर क्यों लिए।
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नरोत्तम मिश्रा की होगी विधानसभा वापसी?
क्या ये सारा सियासी चक्रव्यूह सिर्फ नरोत्तम मिश्रा को विधानसभा में लाने के लिए हुआ है। शायद हां, क्योंकि नरोत्तम मिश्रा प्रदेश के दिग्गज नेता है। ये बात अलग है कि वो 2018 का चुनाव भी हारते-हारते जीते थे और 2023 के चुनाव में हार ही गए। वो राजेंद्र भारती ही तो हैं जिन्होंने दतिया सीट से नरोत्तम मिश्रा को हराया और खुद विधानसभा पहुंचे।
अब उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई है तो नरोत्तम मिश्रा को विधानसभा लाने का रास्ता भी साफ हो चुका है। क्योंकि ये तो मुश्किल ही है कि बीजेपी दतिया में नरोत्तम मिश्रा की जगह किसी और को टिकट दे, लेकिन नरोत्तम मिश्रा का दामन भी पाक साफ नहीं है। जीतू पटवारी ने उन पर भी सवाल उठाए हैं। नरोत्तम मिश्रा पर भी पेड न्यूज का आरोप लगा है। उसे उठाते हुए पटवारी ने नरेंद्र सिंह तोमर पर निशाना साधा।
बड़ा सवाल: नरोत्तम मिश्रा को मिलेगा मंत्री पद?
बीजेपी की सारी कवायद नरोत्तम मिश्रा को सदन में दोबारा लाने की नजर आ रही है। अगर ये सच है तो अब आगे क्या-क्या हो सकता है। ये तय है कि नरोत्तम मिश्रा जैसे कद का नेता अगर सत्ता में लौटा तो उसे मंत्री पद भी देना ही होगा।
ये भी हो सकता है कि बीजेपी उन्हें चुनाव से पहले ही मंत्री पद दे दे। क्योंकि चुनाव तो सीट खाली होने के छह माह के भीतर होना चाहिए। अबकी जो चुनाव हुए तो नरोत्तम मिश्रा की जीत भी पहले के मुकाबले आसान हो सकती है।
तो नरोत्तम मिश्रा मंत्री बने तब क्या होगा। मंत्रिमंडल में पहले ही कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल जैसे कद्दावर और सीनियर मंत्री मौजूद हैं। जिनकी सीएम से पटरी न बैठने की खबरें आती ही रहती हैं। क्या ऐसे हालात में एक और सीनियर मंत्री को ये कैबिनेट टेकल कर पाएगा। या नरोत्तम मिश्रा के लिए जगह बनाने के लिए किसी सीनियर मंत्री की कैबिनेट से छुट्टी कर दी जाएगी।
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क्या विधानसभा अध्यक्ष फैसले पर लेंगे यूटर्न?
ये सारे सवाल तो वक्त के साथ जवाब हासिल करेंगे, लेकिन एक और संशय अभी ही नजर आता है। वो ये कि क्या विधानसभा अध्यक्ष अपने फैसले पर यूटर्न लेने को मजबूर होंगे। क्योंकि अदालत ने राजेंद्र भारती को साठ दिन की मोहलत दी है। इस बीच वो हायर कोर्ट में जाकर स्टे ला सकते हैं या नप भी सकते हैं।
पर, स्टे मिल गया तो क्या होगा। तब उन्हें अयोग्य कैसे घोषित किया जा सकेगा। एक और भी वजह है जो तोमर के फैसले पर सवाल उठा रही है। वो है प्रहलाद लोधी से जुड़ा मामला।
राजेंद्र भारती का मामला भी लोधी जैसा होगा?
ये मामला कुछ साल पुराना है। प्रहलाद लोधी पवई से विधायक थे। उन पर तहसीलदार से मारपीट का आरोप था। जिसके मद्देनजर स्पेशल कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी। उस मामले में फैसला लेने में विधानसभा ने करीब सात दिन का समय लिया था।
सोचसमझ कर फैसला लिया गया और लोधी को अयोग्य घोषित कर दिया गया। बाद में लोधी हाईकोर्ट से स्टे ले आए। नतीजा ये हुआ कि उनकी सदस्यता को दोबारा बहाल कर दिया गया। क्या राजेंद्र भारती का ये मामला भी वैसा ही साबित होगा।
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अब... चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार
राजेंद्र भारती पर फैसला लेने के बाद मप्र विधानसभा ने गेंद चुनाव आयोग के पाले में डाल दी है। फिलहाल देश के कई राज्यों में चुनाव है। जिन्हें देखकर लगता है कि चुनाव आयोग भी फैसला लेने में थोड़ा वक्त तो लेगा ही।
तब तक राजेंद्र भारती स्टे लाने की कोशिश करेंगे और बीजेपी शायद अपने इस फैसले को पुख्ता करने का रास्ता तलाशे। आगे जो भी होगा वो न सिर्फ दतिया का सियासी भविष्य तय करेगा बल्कि, मोहन कैबिनेट का हाल क्या होगा ये भी तय करेगा।