सिंहस्थ 2028: उज्जैन में 92.25 करोड़ रुपए से बनेंगे नौ भव्य प्रवेश द्वार, 18 महीने में निर्माण का लक्ष्य
उज्जैन प्रवेश द्वार क्यों होंगे खास
उज्जैन सिंहस्थ की तैयारी में ये द्वार शहर की पहली झलक बनेंगे। सिंहस्थ कुंभ 2028 में भारी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। उन्हें सबसे पहले यही उज्जैन प्रवेश द्वार दिखेंगे।
तीन भागों में बंटी है योजना
यूडीए ने पूरी परियोजना को तीन भागों में बांटा है। हर भाग में तीन द्वार बनेंगे।
पहले भाग में कौन से द्वार बनेंगे?
पहले भाग में त्रिशूल द्वार, विक्रमादित्य द्वार और डमरू द्वार प्रस्तावित हैं। शुरुआती दो द्वार कौन से होंगे, यह अभी साफ नहीं है।
दूसरे और तीसरे भाग में क्या होगा?
दूसरे भाग में अमृत द्वार, पंचजन्य द्वार और गज द्वार बनाए जाएंगे। तीसरे भाग में कालगणना द्वार, उज्जैनी द्वार और सिंहस्थ द्वार शामिल हैं। यानी तीनों भागों में तीन-तीन द्वार हैं। नौ द्वार और 18 महीने की समय-सीमा।
उज्जैन के नए गेट कैसे दिखेंगे
उज्जैन के नए गेट पीले, गुलाबी और सफेद पत्थरों से बनेंगे। इन पर सनातन परंपरा, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को दर्शाया जाएगा। खगोल कालगणना भी इन द्वारों पर उकेरी जाएगी।
खगोल कालगणना यानी तारों और ग्रहों की चाल से समय गिनने की परंपरा। बंसी पहाडपुर और जैसलमेर के पत्थरों पर कलात्मक नक्काशी होगी। इसी नक्काशी से द्वारों को भव्य स्वरूप दिया जाएगा।
लेकिन असली कहानी सिर्फ सजावट की नहीं है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को उज्जैन की परंपरा की जानकारी भी मिलेगी। पर्यटकों और आगंतुकों को विरासत की जानकारी देना भी लक्ष्य है।
सिंहस्थ कुंभ 2028 में श्रद्धालुओं को क्या मिलेगा
श्रद्धालु जब शहर में आएंगे, तो उन्हें पहले द्वार दिखेंगे। द्वारों पर सिंहस्थ संस्कृति और सनातन परंपरा की झलक होगी। खगोल कालगणना की जानकारी भी पत्थरों पर देखने को मिलेगी। योजना श्रद्धालुओं को उज्जैन की धार्मिक पहचान से परिचित कराएगी। सांस्कृतिक पहचान की झलक भी मिलेगी।
नौ प्रमुख स्थानों पर बनेंगे द्वार
यूडीए ने शहर के नौ प्रमुख स्थानों को चुना है। इन स्थानों के नाम अभी सामने नहीं आए हैं। खबर के साथ नौ द्वारों की डिजाइन की 6 तस्वीरें भी दी गई हैं।
92.25 करोड़ रुपए का औसत हिसाब
92.25 करोड़ रुपए में नौ द्वार बनेंगे। औसतन हर द्वार पर करीब 10.25 करोड रुपए खर्च आएगा। यह औसत सिर्फ हिसाब से निकला है।
क्या समय पर तैयार होंगे द्वार?
सिंहस्थ में अब समय कम बचा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि द्वार समय पर तैयार हो पाएंगे या नहीं। 18 महीने की गिनती कार्यादेश जारी होने के बाद शुरू होगी। ऐसे में शुरुआती दो द्वारों का काम अहम हो जाता है। क्या ये दोनों द्वार वक्त पर तैयार होंगे?
पांच साल तक कौन संभालेगा रखरखाव?
निर्माण एजेंसियों को द्वार बनाने के साथ रखरखाव भी करना होगा। यह जिम्मेदारी पांच साल तक रहेगी। यानी निर्माण के बाद भी एजेंसियों का काम खत्म नहीं होगा। रखरखाव यानी द्वारों की देखरेख और मरम्मत। पत्थर की नक्काशी को लंबे समय तक देखभाल चाहिए। निर्माण का काम एजेंसियों को दिया जाएगा। यूडीए ही इस परियोजना को पूरा करवाएगा।
FAQs:
- उज्जैन में नए प्रवेश द्वार क्यों बनाए जा रहे हैं?
उज्जैन में नए प्रवेश द्वार इसलिए बनाए जा रहे हैं क्योंकि वे सिंहस्थ कुंभ 2028 में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शहर की पहली झलक होंगे। इन द्वारों पर सिंहस्थ संस्कृति और सनातन परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। - उज्जैन के नए प्रवेश द्वार किस प्रकार के होंगे?
उज्जैन के नए प्रवेश द्वार पीले, गुलाबी और सफेद पत्थरों से बनेंगे, जिन पर सनातन परंपरा, सिंहस्थ संस्कृति और खगोल कालगणना की जानकारी उकेरी जाएगी। - उज्जैन के नए प्रवेश द्वारों का निर्माण कब तक पूरा होगा?
उज्जैन के नए प्रवेश द्वारों का निर्माण 18 महीने के भीतर पूरा होना है, जिसके बाद रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसियों पर होगी।