सिंहासन छत्तीसी : प्रदेश में गुपचुप काम कर रही है अमित शाह की टीम, बाबू के इशारे पर चल रहा काम

Arun Tiwari | Oct 25, 2026, 12:14 IST
सिंहासन छत्तीसी
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजनीति का पारा इन दिनों बहुत गर्म है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टीम गुपचुप तरीके से छत्तीसगढ़ में काम कर रही है। इसी टीम की रिपोर्ट से अगले चुनाव की पूरी रणनीति तय होगी। यह टीम मंत्री और अफसरों का पूरी जन्म कुंडली तैयार कर रही है। निशाने पर वह लोग हैं जिनकी कमाई खूब हो रही है।

वहीं एक निगम में कंप्यूटर (Singhasan Chhattisi) ऑपरेटर के इशारे पर अफसर नाच रहे है। यह वही कंप्यूटर ऑपरेटर है जिसके पास सभी काले पीले का हिसाब मालूम है। खबर ये भी है कि पुलिस मुख्यालय बाबूओं के हिसाब से चल रहा है।



इनके ही मौखिक आदेश पर कर्मचारी अफसरों की तीमारदारी में लगे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनुसनी खबरों को जानने के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।



प्रदेश में तैनात शाह की टीम

छत्तीसगढ़ के अगले विधानसभा चुनावों को लेकर दिल्ली अभी से सक्रिय हो गई है। खबर है कि प्रदेश में (Amit Shah Secret Team) केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की एक टीम काम कर रही है। न यह टीम राजनीति से है और न ही प्रशासन से।




इस टीम की जानकारी सरकार और नौकरशाही दोनों को नहीं है। (Chhattisgarh Ministers Report) सूत्र बताते हैं कि इस टीम को कमीशन वाले मंत्री और अफसरों की रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। वे मंत्री और अफसर जो खूब कमाई कर रहे हैं उनका काला चिट्ठा निकालने का काम भी इस टीम को सौंपा गया है।



साथ ही इस टीम से यह भी कहा गया है कि वे उन लोगों को भी तलाशें जो आगे कैबिनेट का हिस्सा बनने के लायक हैं। यानी कैबिनेट के प्रस्तावित फेरबदल में इस रिपोर्ट का बड़ा हाथ रहने वाला है।



इस रिपोर्ट के आधार पर ही कैबिनेट से मंत्री बाहर होंगे और नए चेहरे अंदर आएंगे। वहीं अफसरों की कमाई की पूरी कुंडली भी यही टीम तैयार कर रही है। इसमें उन अफसरों की भी निगरानी की जा रही है जो पिछली भूपेश सरकार के करीबी माने जाते रहे हैं।




अब शाह की जमावट भी इसी टीम की रिपोर्ट के आधार पर रहने वाली है। यह टीम पूरी तरह से गुपचुप और लाइमलाइट से दूर रहकर काम कर रही है।



कंप्यूटर ऑपरेटर चला रहा निगम

छत्तीसगढ़ का एक ऐसा निगम जो अति आवश्यक वस्तुओं की खरीद फरोख्त करता है (छत्तीसगढ़ के भ्रष्ट अधिकारी) उसे एक डाटा इंट्री ऑपरेटर चला रहा है। कहा जाता है कि इसी के इशारों पर अफसर काम कर रहे हैं।



दरअसल ऐसा इसलिए है क्योंकि इस कर्मचारी के पास इस निगम में हुए सारे काले पीले का हिसाब है। इस काले पीले की इंट्री यही करता रहा है। कौन कितना कमीशन लेता है, किसको खरीदी का ठेका दिया जाता है और किससे कितने की डील है, यह सभी बातें इसको पता हैं।




कहीं ये राज सबके (Chhattisgarh Political Inside Story) सामने न आ जाए इसलिए अधिकारी भी इसके सामने मुंह नहीं खोलते। यह उन सब ठेकों का चश्मदीद गवाह रहा है जिन्होंने छत्तीसगढ़ में करोड़ों का हेर फेर कर खूब काली कमाई की गई है।



ऐसा नहीं है कि यह सब बंद हो गया है। यह खेल तो आज भी जारी है। यही वजह है कि एक डाटा इंट्री आपरेटर पूरा निगम ऑपरेट कर रहा है। हैरानी की बात ये है कि यह आउटसोर्स कर्मचारी है। मंत्री के कहने के बाद भी इसको नहीं हटाया गया है।



पीएचक्यू में बाबुओं का जलवा

वर्दी वालों के महकमे में बिना लिखित आदेश के ड्यूटी का ऐसा मॉडल, जहां तैनाती कहीं, हाजिरी कहीं और वेतन मुख्यालय से। सवाल यह कि पुलिस मुख्यालय नियमों से चलता है या रसूख और सुविधा के अपने अलग संविधान से।



पुलिस महकमे का नाम आते ही अनुशासन, आदेश और नियम-कायदों की तस्वीर उभरती है। यहां एक सिपाही की गैरहाजिरी पर सवाल उठ सकते हैं, ड्यूटी में लापरवाही पर कार्रवाई हो सकती है और आदेश की अनदेखी का हिसाब भी देना पड़ सकता है।




लेकिन जब बात पुलिस मुख्यालय की हो, (Chhattisgarh Corruption Allegations)तो क्या नियमों की वर्दी थोड़ी ढीली पड़ जाती है। कम से कम वहां की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल तो कुछ ऐसा ही इशारा करते हैं। चर्चा है कि छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में बाबुओं का जलवा चल रहा है उनके मौखिक आदेश से बड़े बड़े काम हो रहे हैं।



कई कर्मचारी बिना किसी लिखित आदेश के वर्षों से पसंदीदा आईपीएस अधिकारियों के साथ बाहर सेवाएं दे रहे हैं। ड्यूटी कहीं और, हाजिरी का हिसाब कहीं और और वेतन की व्यवस्था मुख्यालय से! सरकारी व्यवस्था में लिखित आदेश की अपनी अहमियत होती है।



आखिर फाइलें इसलिए ही तो चलती हैं, (Chhattisgarh Political News) ताकि कल को कोई पूछे कि किसे, कब, क्यों और किस अधिकार से भेजा गया, तो जवाब कागज पर मौजूद हो। लेकिन अगर सालों तक कोई व्यवस्था मौखिक सहमति के सहारे चलती रहे, तो सवाल उठना लाजिमी है कि फाइलों की जरूरत आखिर किसके लिए है।



सरकारी दफ्तरों में बाबुओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। फाइलों की आवाजाही से लेकर सेवा संबंधी रिकॉर्ड तक, प्रशासनिक मशीनरी उन्हीं के काम पर काफी हद तक निर्भर करती है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब व्यवस्था में किसी कर्मचारी की भूमिका और अधिकारों को लेकर पारदर्शिता के बजाय रहस्य ज्यादा नजर आने लगे।

Tags:
  • singhasan chhattisi
  • सिंहासन छत्तीसी
  • छत्तीसगढ़ की राजनीति
  • अमित शाह की गुप्त टीम
  • मंत्रियों की कमीशनखोरी
  • छत्तीसगढ़ के भ्रष्ट अधिकारी
  • Chhattisgarh Political News
  • Chhattisgarh Political Inside Story
  • Amit Shah Secret Team