सिंहासन छत्तीसी : बीजेपी में किसके टूटे अरमान, संगठन के अंदरखाने जारी हो रहे नए-नए फरमान, पॉवरफुल मंत्री बनेंगे जनरल सेक्रेटरी

Arun Tiwari | Apr 19, 2026, 11:26 IST
singhasan-chhattisi-bjp-internal-rift-powerful-minister-general-secretary
छत्तीसगढ़ में बीजेपी मीडिया में कलह, फरमानों की राजनीति और एक मंत्री के राष्ट्रीय महासचिव बनने की चर्चा तेज है। आज के सिंहासन छत्तीसी पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...

Raipur. छत्तीसगढ़ में बीजेपी के मीडिया विभाग में घमासान मचा हुआ है। जाहिर है प्रदेश में सरकार है और जिसकी सरकार होती है उसके संगठन में तो इस तरह बातें तो चलती रहती हैं। इस घमासान में मीडिया से जुड़े लोग आपस में जूझ रहे हैं। अपने नंबर बढ़ाने और दूसरे के नंबर कम करने के लिए नए नए फरमान जारी हो रहे हैं। जब से कुछ की छुट्टी और कुछ नेताओं की इंट्री हुई है तब से यह कलह मची हुई है।



वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के एक तेज तर्रार मंत्री को राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी मिलने की चर्चा बड़े जोरों पर है। वे नितिन नबीन की टीम का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं कमीशन के चक्कर में एक मेडम ने ही चीरहरण कर डाला। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।



बीजेपी में मची कलह

Discord Within the BJP


बीजेपी में इन दिनों कलह मची हुई है। इस कलह का असर संगठन से लेकर सरकार तक से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है। बात यहां पर हम सिर्फ मीडिया से जुड़े लोगों की कर रहे हैं। बीजेपी ने जब नया संगठन बना था तो प्रवक्ताओं और मीडिया पैनलिस्ट की सूची जारी हुई। इस सूची में जो नाम थे वे चुनिंदा लोगों की पसंद के थे। जाहिर है वे चुनिंदा लोग कुछ सरकार से जुड़े हैं तो कुछ संगठन में जिम्मेदार पद पर हैं। कुछ महीने बीतने के बाद संगठन को ये फीडबैक मिला कि इस पसंदीदा सूची में शामिल लोग तो चैनलों पर पार्टी की भद पिटवा रहे हैं।



संगठन ने नई सूची जारी की जिसमें पुराने प्रवक्ताओं और मीडिया पैनलिस्टों को वापस बुलाया गया। यह लोग बीजेपी मीडिया के जिम्मेदार लोगों को पसंद नहीं आए। मीडिया की कमान संभालने वाले लोगों ने एक फरमान जारी कर दिया। फरमान ये था कि इन लोगों को प्रेस कान्फ्रेंस में शामिल नहीं किया जाएगा और ना ही इनके नाम के प्रेस नोट जारी होंगे। इसके बाद एक और घटना हो गई। एकात्म परिसर में एक प्रवक्ता का जन्मदिन मना लिया गया और केक भी कट गए।



अब फिर मीडिया के भाईसाहब नाराज हो गए। उन्होंने दूसरा फरमान जारी कर दिया कि अब पार्टी कार्यालय में किसी का जन्मदिन नहीं मनाया जाएगा। अब नाराज होने की बारी उन लोगों की है जो लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि बाहर से आकर कुर्सी पाने वाले हम पर यूं धौंस नहीं जमा सकते। अब देखते हैं कि किसकी धौंस किस पर चलती है। खैर यह तो कांग्रेस का मर्ज था जो सत्ता के साथ बीजेपी में आ गया है।



मंत्री बनेंगे जनरल सेक्रेटरी

Minister Set to Become General Secretary


छत्तीसगढ़ के एक पॉवरफुल मंत्री के संगठन में नेशनल जनरल सेक्रेटरी बनने की बड़ी चर्चा है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बीजेपी के नए मुखिया नितिन नबीन अपनी टीम बनाएंगे। इस टीम में वे अपना जनरल सेक्रेटरी छत्तीसगढ़ के एक पॉवरफुल मंत्री को बना सकते हैं। मंत्रीजी भी इस चर्चा को लेकर उत्साहित हैं।



उनके करीबी लोग भी इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे। मंत्रीजी युवा हैं, अच्छे वक्ता हैं, सक्रिय हैं, और क्या चाहिए नितिन नबीन को। मंत्रीजी इसलिए उत्साहित हैं क्योंकि इससे उनको नेशनल एक्सपोजर मिल जाएगा। बड़े नेताओं को कांटेक्ट बनेंगे। और यह सब काम आएगा जब ढाई साल बाद छत्तीसगढ़ में चुनाव होंगे। हो सकता है मंत्रीजी की लॉटरी लग जाए।



कमीशन पर चीरहरण :

Disrobing over commission


छत्तीसगढ़ में इन दिनों साड़ी को लेकर बड़ा बवाल मचा है। सूत्र कहते हैं कि यह चीरहरण विभाग की एक बड़ी मेडम ने ही किया है। जांच तो चल रही है लेकिन क्या जांच निष्पक्ष हो पाएगी इसको लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं। सवाल इसलिए हैं क्योंकि जिन ताकतवर मेडम के इस पूरे मामले में शामिल होने की चर्चा हो रही है वे क्या उसी जगह पर रहते हुए जांच को प्रभावित नहीं करेंगी।



प्रारंभिक जांच में ही कई चौंकाने वाले संकेत सामने आ रहे हैं, जिससे मामले में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। विभागीय सूत्रों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं और अब मेडम की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं।



सूत्रों का यह भी कहना है कि कथित तौर पर सप्लायरों से बड़े पैमाने पर कमीशन लेने के बाद ही वर्क ऑर्डर जारी किए गए। बताया जा रहा है कि पहले यह कमीशन करीब 35 प्रतिशत तक था, जिसे हाल के वर्षों में बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया। ऐसे में लागत बढ़ने और गुणवत्ता से समझौता होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते निम्न स्तर की साड़ियों की आपूर्ति की गई। तो हो गया न कमीशन पर चीरहरण।



द सूत्र पर पढ़िए सिंहासन छत्तीसी के अन्य कॉलम...

सिंहासन छत्तीसी : IPS अफसर ने रसूख का इस्तेमाल कर कौड़ियों में खरीदी करोड़ों की जमीन, मंत्री के पावर से रुक गया डीजीपी का ऑर्डर



सिंहासन छत्तीसी: वर्दी वाली मेडम मना रही हैं मौज, इन मेडम पर आखिर कौन है मेहरबान, एक कारोबारी बना अफसरों का राजदार



सिंहासन छत्तीसी: कौन हैं कलेक्टर साहिबा के करन-अर्जुन जो करवा रहे हैं कमाई, धड़ल्ले से चालू है 50 फीसदी कमीशन वाली नकली दवाई



सिंहासन छत्तीसी : सीएस के पास पहुंची है किस आईपीएस की शिकायत, एक बंगला है जिस पर दो माननीयों का आया है दिल





Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • बीजेपी
  • विधानसभा चुनाव
  • द सूत्र पर पढ़िए सिंहासन छत्तीसी
  • नितिन नबीन