छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा बनी शहरी और ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण का नया जरिया
योजना के तहत केंद्र सरकार की सब्सिडी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार भी अतिरिक्त आर्थिक सहायता दे रही है। इससे परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर लगाना आसान हुआ है। कई परिवारों का बिजली बिल शून्य तक पहुंच रहा है, वहीं कुछ परिवार अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली बनाकर उसे ग्रिड में भेज रहे हैं।
डबल सब्सिडी से सोलर प्लांट लगाना हुआ आसान
छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जा रही है। 1 किलोवाट के सोलर संयंत्र पर केंद्र सरकार से 30 हजार रुपए और राज्य सरकार से 15 हजार रुपए, यानी कुल 45 हजार रुपए तक की सब्सिडी मिलती है। 2 किलोवाट के सिस्टम पर केंद्र की 60 हजार रुपए और राज्य की 30 हजार रुपए की सहायता मिलाकर कुल 90 हजार रुपए तक सब्सिडी उपलब्ध है। वहीं 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले संयंत्र के लिए केंद्र सरकार से 78 हजार रुपए और राज्य सरकार से 30 हजार रुपए, यानी कुल 1.08 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिलती है। इस दोहरी मदद से सोलर प्लांट लगाने की शुरुआती लागत का बोझ काफी कम हो जाता है।
आसान लोन से बढ़ी सौर ऊर्जा तक पहुंच
सोलर संयंत्र लगाने के लिए पूरी रकम एक साथ जुटाना परिवारों के लिए मुश्किल न हो, इसके लिए आसान लोन की व्यवस्था भी की गई है। जनसमर्थ पोर्टल और विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को किफायती ब्याज दरों पर कोलैटरल-फ्री सोलर लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे ऐसे परिवार भी सौर ऊर्जा अपना पा रहे हैं, जो एकमुश्त बड़ी राशि लगाने की स्थिति में नहीं थे।
शून्य बिजली बिल से बढ़ रही परिवारों की बचत
रूफटॉप सोलर का सीधा असर परिवारों के बिजली खर्च पर दिखाई दे रहा है। घर की जरूरत पूरी करने के बाद बची बिजली को नेट-मीटरिंग के जरिए ग्रिड में भेजा जा सकता है। इससे बिजली बिल कम या शून्य हो सकता है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने पर परिवार को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है। यानी घर की छत पर लगा सोलर प्लांट बिजली खर्च कम करने के साथ अतिरिक्त आय का रास्ता भी खोल रहा है।
मार्च 2027 तक 5 लाख घरों का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य तय किया है। इस योजना के जरिए प्रदेश में 4,000 मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य भी रखा गया है। सरकार ने वर्ष 2030 के लिए भी बड़े लक्ष्य तय किए हैं। इसके तहत हर ब्लॉक में कम से कम 1,000 सोलर छतें, हर गांव में कम से कम एक सामुदायिक सोलर यूनिट और छत्तीसगढ़ को ऊर्जा निर्यातक राज्य के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। इसके लिए सोलर पैनल निर्माण इकाइयों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
एक किलोवाट से 120 यूनिट बिजली हर महीने
योजना के तहत 1 किलोवाट का सोलर संयंत्र हर महीने करीब 120 यूनिट बिजली पैदा कर रहा है। इससे सामान्य परिवार की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा किया जा सकता है। जिन परिवारों के सोलर संयंत्र उनकी खपत से ज्यादा बिजली पैदा कर रहे हैं, वे अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज रहे हैं। इस तरह बिजली खरीदने वाले परिवार बिजली बनाने वाले परिवार की भूमिका में भी आ रहे हैं।
सौर ऊर्जा से छत्तीसगढ़ को बड़े फायदे
- घर की छत पर सोलर पैनल लगने से परिवार अपनी बिजली जरूरत का बड़ा हिस्सा खुद पूरा कर पा रहे हैं। कई परिवारों का मासिक बिजली बिल शून्य तक पहुंच गया है। इससे हर महीने घरेलू बजट में सीधी बचत हो रही है।
- यदि सोलर संयंत्र परिवार की जरूरत से ज्यादा बिजली बनाता है, तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है। इससे परिवार बिजली इस्तेमाल करने के साथ बिजली पैदा करने की भूमिका भी निभा सकता है।
- सोलर पैनल लगाने और उनकी देखरेख से स्थानीय स्तर पर काम के अवसर बढ़ रहे हैं। प्रदेश की महिला स्व-सहायता समूहों की बहनें भी सोलर वेंडर के रूप में आगे आ रही हैं और हितग्राहियों के घरों में सोलर संयंत्र लगाने का काम कर रही हैं।
- हर ब्लॉक में 1,000 सोलर छतों और हर गांव में सामुदायिक सोलर यूनिट का लक्ष्य पूरा होने पर प्रदेश की सौर ऊर्जा क्षमता बड़े स्तर पर बढ़ेगी। वर्ष 2030 तक छत्तीसगढ़ को ऊर्जा निर्यातक राज्य बनाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।
केस 1: छत से हर महीने करीब 5 हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छिंद गांव के लोकनाथ साव के लिए सौर ऊर्जा बिजली खर्च से राहत के साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया बन गई है। सितंबर 2025 से पहले लोकनाथ के घर का बिजली बिल करीब 1,500 रुपए प्रतिमाह आता था। यह उनके घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ था। सारंगढ़ में एक शासकीय बैठक के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने का फैसला किया। सोलर संयंत्र लगने के बाद उनके बिजली बिल में तेजी से कमी आई और अब उनका मासिक बिजली बिल शून्य हो चुका है। लोकनाथ साव के अनुसार, अप्रैल महीने में उनकी छत पर लगे सोलर पैनल से करीब 1,000 यूनिट बिजली पैदा हुई। घरेलू इस्तेमाल के बाद बची बिजली से उन्हें करीब 5 हजार रुपए की अतिरिक्त आमदनी हुई।
केस 2: 15 दिन में लगा 3 किलोवाट का सोलर प्लांट
धमतरी शहर के महात्मा गांधी वार्ड निवासी डॉ. भूपेन्द्र साहू ने भी प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर की छत पर सोलर प्लांट लगवाया है। डॉ. साहू ने योजना की जानकारी मिलने के बाद विद्युत विभाग में आवेदन किया। उनके अनुसार प्रक्रिया सरल और पारदर्शी रही और मात्र 15 दिनों के भीतर उनके घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कर दिया गया। अब उनके घर का बिजली बिल लगभग शून्य हो चुका है। इससे उन्हें हर महीने आर्थिक राहत मिल रही है। डॉ. साहू के अनुसार, पहले बढ़ते बिजली बिल की चिंता रहती थी। अब सौर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरत पूरी हो रही है। अतिरिक्त बिजली को नेट-मीटरिंग के जरिए ग्रिड में भेजकर भविष्य में अतिरिक्त आय की संभावना भी बनी है। योजना के तहत 30 हजार से 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सोलर प्लांट लगाना आसान हुआ है। शेष राशि के लिए कम ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है।
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