15 अगस्त सम्मान सूची पर विवाद, संविदाकर्मियों ने खोला मोर्चा
समझें क्या है पूरा मामला
Dantewada। दंतेवाड़ा में 15 अगस्त पर उत्कृष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने की तैयारी शुरू होते ही नया विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश में साफ कर दिया गया कि संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नाम पुरस्कार के लिए प्रस्तावित नहीं किए जाएंगे। आदेश सामने आते ही एनएचएम कर्मचारियों समेत संविदाकर्मियों में नाराजगी फैल गई। उनका कहना है कि सरकार काम तो बराबर कराती है, लेकिन सम्मान देने की बारी आती है तो उन्हें बाहर कर दिया जाता है। सवाल यह है कि क्या सरकार की यह मंशा पूरे प्रदेश भर मैं सेवा दे रहे संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए है।
आदेश से बढ़ा विवाद
कार्यालय कलेक्टर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा की आदिवासी विकास शाखा ने 30 जुलाई को सभी विभाग प्रमुखों को पत्र जारी किया है। इसमें 15 अगस्त 2026 के अवसर पर उत्कृष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम भेजने को कहा गया है। लेकिन इसी पत्र में स्पष्ट निर्देश है कि संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नाम प्रस्तावित नहीं किए जाएं। यही शर्त अब विवाद की सबसे बड़ी वजह बन गई है।
एनएचएम कर्मचारियों का विरोध
आदेश के बाद एनएचएम कर्मचारियों ने नाराजगी जताई है। छत्तीसगढ़ संविदा कर्मचारी संघ के प्रवेश प्रवक्ता पूरन दास ने कहा है कि अस्पतालों में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी संविदा कर्मचारी निभा रहे हैं। महामारी हो, आपदा हो या दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं, हर मोर्चे पर संविदाकर्मी डटे रहते हैं। इसके बावजूद उत्कृष्ट कार्य करने के बाद भी उन्हें सम्मान की पात्रता से बाहर कर देना अन्यायपूर्ण है।
दो नाम भेजने की सीमा
शासन ने प्रत्येक विभाग और कार्यालय से अधिकतम दो कर्मचारियों के नाम भेजने की अनुमति दी है। इसके साथ यह भी कहा गया है कि जिन कर्मचारियों को पहले सम्मान मिल चुका है, उनके नाम दोबारा नहीं भेजे जाएं। चयनित कर्मचारियों के उत्कृष्ट कार्यों का पूरा विवरण और विभागीय जांच या आपराधिक प्रकरण लंबित नहीं होने का प्रमाण-पत्र भी अनिवार्य किया गया है।
10 अगस्त तक समय
सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि प्रस्तावित नामों की सूची 10 अगस्त 2026 की शाम 5:30 बजे तक अनिवार्य रूप से जमा करें। तय समय के बाद प्राप्त प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा। इससे विभागों में नामों के चयन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।
सम्मान या भेदभाव?
संविदाकर्मियों का सवाल है कि जब जिम्मेदारियां समान हैं, काम का दबाव समान है और कई बार नियमित कर्मचारियों से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, तो फिर सम्मान से वंचित क्यों रखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उत्कृष्ट कार्य का पैमाना सेवा का प्रकार नहीं बल्कि प्रदर्शन होना चाहिए।
बढ़ सकता है मामला
दंतेवाड़ा से शुरू हुआ यह विवाद अब दूसरे जिलों के संविदा कर्मचारियों के बीच भी चर्चा का विषय बन सकता है। यदि यही नियम पूरे प्रदेश में लागू हुआ तो 15 अगस्त के सम्मान समारोह से पहले सरकार को संविदाकर्मियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। सवाल अब यही है कि सरकार उत्कृष्ट काम का सम्मान करेगी या नियुक्ति के प्रकार के आधार पर कर्मचारियों में फर्क करती रहेगी?
FAQ
- विवाद किस बात पर है?
आदेश में संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को सम्मान के लिए अयोग्य बताया गया है। - संविदा कर्मचारी क्यों नाराज हैं?
उनका कहना है कि समान काम करने के बावजूद उन्हें सम्मान से वंचित किया जा रहा है। - नाम भेजने की अंतिम तारीख क्या है?
10 अगस्त 2026, शाम 5:30 बजे।
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