शंकराचार्य और रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में इलाज बैन, राज्य के 16 अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों पर चला सरकारी डंडा

VINAY VERMA | Nov 03, 2026, 14:37 IST
स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन: आयुष्मान योजना में धांधली मिलने पर 16 निजी अस्पताल सस्पेंड
Chhattisgarh Health Department removes 16 hospitals from the Ayushman Bharat scheme following investigations that revealed irregularities in patient treatment.
रायपुर। आयुष्मान योजना में मरीजों के इलाज के नाम पर गड़बड़ी करना प्रदेश के 16 अस्पतालों को भारी पड़ गया है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद इन अस्पतालों को आयुष्मान योजना से बाहर कर दिया है। इनमें शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज अस्पताल, रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल और सुयश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।

इनमें से पांच अस्पतालों को तीन साल तक योजना से बाहर रखने की कार्रवाई की गई है। बाकी अस्पतालों पर भी एक साल तक आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने पर रोक रहेगी।



19 अस्पतालों की हुई थी जांच

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुछ दिन पहले प्रदेश के 19 अस्पतालों की जांच की थी। इसमें तीन अस्पतालों को छोड़कर बाकी 16 में गड़बड़ियां मिलीं। बिलासपुर के मेहता चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, रायपुर के विजन सेंटर आई हॉस्पिटल और सरगुजा के डीएचटी हॉस्पिटल को छोड़कर बाकी सभी अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। यानी जांच में शामिल करीब 84 फीसदी अस्पताल कार्रवाई की जद में आ गए।



तीन साल तक आयुष्मान योजना के तहत इलाज पर रोक

तीन साल के लिए योजना से बाहर किए गए अस्पतालों में भिलाई का श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, रायपुर का रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल, वरदान हॉस्पिटल, श्री अनंत साईं अस्पताल और श्रीनिवास हॉस्पिटल शामिल हैं।



इन अस्पतालों में अब आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग की नोटशीट में इन्हें तीन साल तक योजना से बाहर रखने की सिफारिश की गई है। इसके लिए हर साल अलग-अलग आदेश जारी करने की व्यवस्था बनाई गई है। विभाग का तर्क है कि इससे कार्रवाई को चुनौती देने की गुंजाइश कम होगी। हालांकि, इस मामले में अंतिम आदेश और उसकी अवधि को लेकर संबंधित आदेश ही निर्णायक होंगे।



मेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर भी सवाल

इस कार्रवाई का असर सिर्फ आयुष्मान योजना तक सीमित नहीं रह सकता। शंकराचार्य और रावतपुरा जैसे मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों पर कार्रवाई के बाद उनकी मान्यता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।



मेडिकल कॉलेज चलाने के लिए अस्पताल में मरीजों के इलाज, जरूरी बेड, क्लीनिकल सुविधाओं और मेडिकल छात्रों की ट्रेनिंग की व्यवस्था होना जरूरी है। ऐसे में अस्पतालों में इलाज प्रभावित होने पर मेडिकल कॉलेजों की पढ़ाई और मान्यता से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, आयुष्मान योजना से बाहर होने का मतलब अपने आप मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होना नहीं है। इसके लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों के तहत अलग जांच की जरूरत होगी।



इन 16 अस्पतालों पर हुई कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में रायपुर के श्री अनंत साईं अस्पताल, एसके केयर हॉस्पिटल, महावीर हॉस्पिटल, श्रीनिवास हॉस्पिटल, वरदान हॉस्पिटल, सुयश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, हेरिटेज हॉस्पिटल और रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल शामिल हैं।



इसके अलावा दुर्ग का पल्स हॉस्पिटल और श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, कोंडागांव का नेताम हॉस्पिटल, कोरबा का हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल, बस्तर का स्वामी चंद्रशेखरानंद हॉस्पिटल, कबीरधाम का जय जगन्नाथ हेल्थ केयर और बिलासपुर के अशोक प्रसूति मंदिर व केयर एंड केयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर भी कार्रवाई की गई है।



दो और अस्पतालों पर गिरी गाज

इन 16 अस्पतालों के अलावा दो दिन पहले रायपुर के मेडिलाइफ और लोटस अस्पताल को भी आयुष्मान योजना से बाहर किया गया है। यानी सरकारी कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि जिन अस्पतालों में मरीजों के इलाज में गड़बड़ी मिली है, वहां आम मरीजों की जेब से होने वाली वसूली रोकने और इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग आगे क्या कदम उठाता है।

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