आधार कार्ड में नाम कैसे बदलें, जानिए गजट नोटिफिकेशन के नए नियम
समझें क्या है पूरा मामला
आधार कार्ड में नाम सुधरवाना अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। केंद्र सरकार के नए नियम के तहत राजपत्र यानी गजट में अधिसूचना जरूरी कर दी गई है। सरकारी शुल्क सिर्फ 1100 रुपए है। लेकिन वकीलों की मदद के बिना यह काम पूरा नहीं होता। इसमें छह महीने तक का समय और हजारों रुपए का खर्च आ रहा है। रायपुर सहित प्रदेशभर में आम लोग इस नई प्रक्रिया से परेशान हैं। छोटी सी स्पेलिंग गलती सुधारने के लिए भी अब लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।
क्यों जरूरी हुआ राजपत्र प्रकाशन
केंद्र सरकार के नियम के अनुसार अगर नाम सुधार के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं तो राजपत्र में प्रकाशन कराना अनिवार्य है। पूरी तरह नाम या सरनेम बदलने पर भी यही नियम लागू होता है। राजपत्र में प्रकाशन के लिए बनाया गया मुख्यालय राजनांदगांव में है। यह बात कई आवेदकों को हैरान करती है, क्योंकि उन्हें इसके लिए दूर तक भागदौड़ करनी पड़ती है।
आवेदन में आ रहा भारी खर्च
आवेदन, शपथ पत्र और सार्वजनिक सूचना जैसे कामों के लिए वकील मोटी रकम मांग रहे हैं। यह रकम 10 हजार से 20 हजार रुपए तक पहुंच रही है। इतनी बड़ी रकम चुकाने के बाद भी काम तुरंत नहीं होता। पूरी प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम छह महीने का समय लग रहा है।
स्पेलिंग सुधार में भी लगे 12 हजार
रजबंधा मैदान इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति को अपने बच्चे के आधार कार्ड में स्पेलिंग सुधारनी थी। आधार सेंटर पहुंचने पर उन्हें सीधे वकील के पास भेज दिया गया। वकील ने बताया कि राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद ही सुधार संभव होगा। इसके लिए छह महीने का समय और 12 हजार रुपए की मांग की गई।
सरनेम बदलवाने में मांगे गए 18 हजार
संजय नगर की एक गृहिणी ने तलाक के बाद दोबारा शादी की थी। उन्हें पहली शादी से हुए बच्चे का नाम और सरनेम बदलवाना था। आधार सेंटर ने उनसे राजपत्र की कॉपी मांगी। वकील से संपर्क करने पर 18 हजार रुपए तक के खर्च की बात कही गई। साथ ही छह महीने पहले कागज मिलने की कोई गारंटी नहीं दी गई।
किन मामलों में जरूरी है प्रकाशन
अगर कोई व्यक्ति बिना किसी कानूनी आधार के अपना सरनेम पूरी तरह बदल रहा है तो राजपत्र प्रकाशन जरूरी है। धर्म परिवर्तन या कोर्ट के आदेश पर नाम बदलने पर भी यही नियम लागू होता है। नाबालिग, तलाक के बाद नाम बदलने और बच्चे का नाम बदलने के लिए भी अलग-अलग सरकारी शुल्क तय किया गया है। हर श्रेणी के लिए क्षेत्रीय कार्यालय की अनुमति भी अनिवार्य कर दी गई है।
जीवनकाल में सिर्फ दो बार मौका
नियमों के अनुसार एक व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में आधार कार्ड में केवल दो बार ही नाम सुधरवा सकता है। यह सीमा पार करने के बाद नाम बदलना 'अपवाद' माना जाता है। ऐसी स्थिति में गजट नोटिफिकेशन के साथ क्षेत्रीय कार्यालय की अनुमति लेना भी जरूरी हो जाता है। इससे प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है।
FAQ
- आधार कार्ड में नाम सुधरवाने के लिए राजपत्र प्रकाशन क्यों जरूरी है?
अगर नाम सुधार के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं तो राजपत्र प्रकाशन अनिवार्य है। यह केंद्र सरकार का नया नियम है। इसके बिना नाम परिवर्तन संभव नहीं है। - आधार कार्ड में नाम सुधार में कितना खर्च आता है?
सरकारी शुल्क सिर्फ 1100 रुपए है। लेकिन वकीलों की फीस 10 हजार से 20 हजार रुपए तक जा रही है। पूरी प्रक्रिया में छह महीने तक का समय लग सकता है। - जीवनकाल में कितनी बार आधार कार्ड में नाम बदला जा सकता है?
नियम के अनुसार एक व्यक्ति केवल दो बार ही नाम सुधार सकता है। इसके बाद नाम बदलना अपवाद माना जाता है। ऐसे मामलों में गजट नोटिफिकेशन जरूरी हो जाता है।
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