सुशासन में लगा घूसखोरी का कीड़ा, काम के बदले घूस मांगने में राजस्व, स्कूल शिक्षा और गृह मंत्रालय आगे

Arun Tiwari | Oct 29, 2026, 12:52 IST
रिश्वतखोरी में राजस्व विभाग सबसे आगे
Chhattisgarh Revenue Department tops bribery cases, with 193 officials caught
रायपुर। सरकारी दफ्तर में जमीन का काम हो या भुगतान से जुड़ी फाइल। कई बार लोगों को अपना काम कराने के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत करनी पड़ती है। छत्तीसगढ़ में भी ऐसे मामले लगातार सामने आए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के आंकड़े इसकी जानकारी देते हैं। वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक प्रदेश में रिश्वतखोरी के 154 मामलों में ट्रैप कार्रवाई की गई।

इन मामलों में 193 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए। इस दौरान कुल 51 लाख 67 हजार 540 रूपए की रिश्वत राशि पकड़ी गई।



इन आंकड़ों में राजस्व विभाग सबसे आगे है। जमीन से जुड़े कामों में रिश्वत मांगने की शिकायतें सबसे ज्यादा दर्ज हुईं। इसके बाद स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और गृह विभाग का स्थान रहा। आंकड़े बताते हैं कि सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी रोकना अब भी बड़ी चुनौती है। हालांकि, सरकार का कहना है कि सख्त कार्रवाई के कारण ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।



राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी के मामले

एसीबी के आंकड़ों के अनुसार, पांच साल से अधिक की इस अवधि में राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा ट्रैप कार्रवाई हुई। यहां रिश्वत लेते पकड़े जाने के 56 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 67 अधिकारी और कर्मचारी पकड़े गए।



राजस्व विभाग में जमीन से जुड़े कई कामों के लिए रिश्वत मांगने की शिकायतें सामने आईं। इनमें जमीन की खरीद-बिक्री, नामांतरण और सीमांकन जैसे काम शामिल हैं। राजस्व रिकॉर्ड में सुधार कराने के लिए भी रिश्वत मांगने के मामले सामने आए।



स्कूल शिक्षा विभाग इस सूची में दूसरे स्थान पर रहा। यहां 20 मामलों में 25 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 14 मामले दर्ज हुए। इनमें 15 कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए।



गृह यानी पुलिस विभाग में रिश्वतखोरी के 10 मामले सामने आए। इन मामलों में 13 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। वहीं, न्याय प्रशासन एवं विधिक सेवा विभाग में सात मामले दर्ज हुए। इनमें 10 लोकसेवकों को पकड़ा गया।



इन आंकड़ों से पता चलता है कि रिश्वतखोरी की शिकायतें अलग-अलग विभागों में सामने आई हैं। सरकारी सेवाओं से जुड़े कई कामों में लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा है।



वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा ट्रैप कार्रवाई

साल के हिसाब से आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई। इस साल रिश्वतखोरी के 60 मामलों में ट्रैप लगाया गया। इन कार्रवाइयों में 71 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी पकड़े गए।



वर्ष 2021 में रिश्वतखोरी के 13 मामले दर्ज हुए थे। उस साल 14 लोकसेवक पकड़े गए। वर्ष 2022 में भी 13 मामले सामने आए। इस दौरान 18 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए।



वर्ष 2023 में दर्ज ट्रैप प्रकरणों की संख्या शून्य रही। इस साल कोई लोकसेवक भी नहीं पकड़ा गया। इसके बाद वर्ष 2024 में कार्रवाई बढ़ी। इस साल 44 मामले दर्ज किए गए। इनमें 57 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए।



वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा मामले सामने आए। वहीं, वर्ष 2026 में 28 मई तक 24 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए। इस दौरान 33 लोकसेवक पकड़े गए।



इन आंकड़ों में वर्ष 2025 सबसे आगे रहा। इस साल मामलों की संख्या के साथ पकड़े गए कर्मचारियों की संख्या भी सबसे ज्यादा थी।



पांच साल में 51.67 लाख रूपए की रिश्वत पकड़ी गई

एसीबी की कार्रवाई में रिश्वत के रूप में दी जा रही रकम भी पकड़ी गई। वर्ष 2021 में 2 लाख 47 हजार 500 रूपए बरामद हुए। वर्ष 2022 में यह राशि 3 लाख 82 हजार रूपए रही। वर्ष 2023 में कोई राशि दर्ज नहीं हुई।



वर्ष 2024 में रिश्वत के 11 लाख 52 हजार रूपए पकड़े गए। वहीं, वर्ष 2025 में 23 लाख 91 हजार 540 रूपए की राशि सामने आई। वर्ष 2026 में 28 मई तक 9 लाख 94 हजार 500 रुपये पकड़े गए।



इस तरह पूरी अवधि में कुल 51 लाख 67 हजार 540 रूपए की रिश्वत राशि पकड़ी गई। इसमें सबसे ज्यादा रकम वर्ष 2025 में मिली।



यह राशि उन मामलों की है, जिनमें एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की। यानी रिश्वत लेते हुए संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को पकड़ने के लिए कार्रवाई की गई।



निर्माण भुगतान और जमीन के कामों में भी रिश्वत

रिश्वत मांगने के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए हैं। इनमें निर्माण कार्यों के भुगतान से जुड़े मामले भी शामिल हैं।



निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भुगतान जारी कराने के लिए रिश्वत मांगने के 14 मामले दर्ज किए गए। वहीं, जमीन के सीमांकन के लिए रिश्वत मांगने के आठ मामले सामने आए। नामांतरण के लिए भी आठ मामले दर्ज हुए।



इसके अलावा मुआवजा राशि दिलाने के बदले रिश्वत मांगने के छह मामले सामने आए। पेंशन और ग्रेच्युटी जारी कराने के लिए रिश्वत मांगने के पांच मामले दर्ज किए गए।



इन आंकड़ों से साफ है कि जमीन से जुड़े कामों के साथ सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में भी रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आई हैं। पेंशन और मुआवजे जैसे जरूरी कामों में भी लोगों को परेशानी हुई है।



सूरजपुर में सबसे ज्यादा मामले दर्ज

जिलावार आंकड़ों में सूरजपुर सबसे आगे रहा। यहां रिश्वतखोरी के 16 मामले दर्ज किए गए। रायपुर में 13 मामले सामने आए। सरगुजा में 12 और रायगढ़ में 11 मामले दर्ज हुए।



मुंगेली और बिलासपुर में आठ-आठ मामले सामने आए। वहीं, दुर्ग, बलरामपुर और जांजगीर-चांपा में सात-सात मामले दर्ज किए गए।



इन आंकड़ों से अलग-अलग जिलों में हुई एसीबी की कार्रवाई की जानकारी मिलती है। हालांकि, ये आंकड़े केवल दर्ज ट्रैप प्रकरणों को दर्शाते हैं। इन्हें सभी तरह की भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की कुल संख्या नहीं माना जा सकता।



शिकायत मिलने पर एसीबी करती है कार्रवाई

एसीबी के अनुसार, रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर पहले उसकी जांच की जाती है। शिकायत की पुष्टि और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की जाती है। इसका उद्देश्य रिश्वत लेते हुए संबंधित लोकसेवक को पकड़ना होता है।



इस प्रक्रिया को Anti-Corruption Action कहा जाता है। इसका मकसद रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई करना और सरकारी कामकाज में जवाबदेही बढ़ाना है।



पांच वर्षों के आंकड़ों में राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा ट्रैप प्रकरण दर्ज हुए हैं। इसके बाद स्कूल शिक्षा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का स्थान रहा। वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा कार्रवाई की गई।



सरकार की ओर से कहा जाता है कि सख्ती के कारण रिश्वतखोरी के मामले सामने आ रहे हैं और कार्रवाई की जा रही है। वहीं, सरकारी सेवाओं को पारदर्शी बनाना भी जरूरी है। लोगों को बिना अवैध भुगतान के सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके लिए शिकायतों पर समय पर कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही अहम है।

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