निजी कॉलेजों के 31 कोर्स की फीस अब AFRC तय करेगा, मंजूरी बिना काउंसलिंग-एडमिशन पर सरकार ने लगाई रोक
उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
फीस नहीं तो एडमिशन नहीं
सरकार ने इस बार सिर्फ फीस तय करने का आदेश नहीं दिया, बल्कि एडमिशन पर भी शिकंजा कसा है। जिन निजी संस्थानों ने संबंधित पाठ्यक्रमों की फीस AFRC से तय नहीं कराई है, उन्हें राज्य की काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। साफ है कि फीस की मंजूरी के बिना एडमिशन का रास्ता बंद रहेगा। इससे निजी संस्थानों पर फीस नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा।
31 कोर्स दायरे में
यह व्यवस्था सिर्फ कुछ चुनिंदा पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग के अधीन निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और संस्थानों में चल रहे 31 तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम इसके दायरे में रखे गए हैं। यानी इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, नर्सिग, लैब टैक्निशियन से जुड़े कोर्सेस हैंसमेत अलग-अलग प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। फीस कितनी होगी, इसका फैसला अब संस्थान नहीं, नियामक समिति करेगी।
आवेदन किया तो भी लगाम
जिन संस्थानों ने AFRC में फीस तय कराने के लिए आवेदन कर दिया है और प्रक्रिया अभी चल रही है, उन्हें भी पूरी छूट नहीं मिलेगी। ऐसे संस्थानों को तय प्रारूप में शपथ-पत्र और जरूरी प्रपत्र देने होंगे। इसके बाद ही उन्हें सशर्त प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति मिल सकती है। इतना ही नहीं, उन्हें छात्रों से ली जाने वाली संभावित फीस विभागीय पोर्टल पर दिखानी होगी।
वेबसाइट पर पूरा हिसाब
सरकार ने फीस को छिपाकर रखने की गुंजाइश भी कम कर दी है। AFRC के फीस आदेश के बाद हर संबंधित निजी संस्थान को अपनी वेबसाइट पर तय फीस अपलोड करनी होगी। प्रशासनिक विभाग की वेबसाइट पर भी इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। यानी छात्र और अभिभावक एडमिशन से पहले यह देख सकेंगे कि किस कोर्स की कितनी फीस तय हुई है।
एक-एक रुपये का हिसाब
सबसे अहम बात अतिरिक्त वसूली को लेकर है। संस्थानों को फीस की हर मद की जानकारी वेबसाइट पर देनी होगी। AFRC से तय शुल्क या दूसरी अनुमन्य फीस के अलावा कोई अनधिकृत रकम नहीं ली जा सकेगी। यानी एडमिशन के बाद अचानक डेवलपमेंट चार्ज, सुविधा शुल्क या किसी दूसरे नाम पर रकम जोड़ने की गुंजाइश सरकार ने सीमित करने की कोशिश की है।
सवाल कार्रवाई पर
आदेश में नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की बात कही गई है। लेकिन असली सवाल यही है कि निगरानी कितनी सख्त होगी। अगर किसी कॉलेज ने वेबसाइट पर एक फीस दिखाई और छात्रों से दूसरी रकम मांगी तो शिकायत के बाद कितनी जल्दी कार्रवाई होगी? फीस नियंत्रण का दावा तभी जमीन पर दिखेगा, जब नियम तोड़ने वालों पर भी कार्रवाई नजर आएगी।
कानून में भी पेंच
सरकार अब इस व्यवस्था को सिर्फ आदेश तक सीमित रखने के बजाय कानून में भी मजबूत करने की तैयारी कर रही है। तकनीकी शिक्षा विभाग के साथ हुई बैठक के आधार पर छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2005 में प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव मांगा गया है। यानी फीस पर सरकारी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी है।
छात्रों को राहत कितनी?
सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से निजी शिक्षा में पारदर्शिता आएगी और छात्रों-अभिभावकों को मनमानी फीस से राहत मिलेगी। लेकिन असली परीक्षा एडमिशन के समय होगी। 31 कोर्स की फीस तय होने, उसे वेबसाइट पर सार्वजनिक करने और अतिरिक्त वसूली रोकने के नियम कितने असरदार साबित होते हैं, यह निगरानी और कार्रवाई तय करेगी। फिलहाल निजी कॉलेजों के लिए संदेश साफ है, फीस में मनमानी की तो एडमिशन भी अटक सकता है।