छत्तीसगढ़ में कॉपियों के मूल्यांकन के लिए एआई तकनीक की शुरुआत
समझें क्या है पूरा मामला
- AI से होगी यूनिवर्सिटी की कॉपियों की जांच
- बिलासपुर में उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन का नया तरीका
- 80 हजार कॉपियों की जांच में AI की मदद
- ऑनलाइन सिस्टम से तेज होगा परीक्षा मूल्यांकन
- AI सुझाव देगा, अंतिम फैसला शिक्षक करेंगे
Bilaspur : तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अब शिक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बिलासपुर स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत छात्रों की कॉपियों की जांच ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस नई व्यवस्था से कॉपियों की जांच में लगने वाला समय कम होगा और परीक्षा परिणाम भी जल्दी जारी किए जा सकेंगे। हालांकि, AI सिर्फ शिक्षकों की मदद करेगा, अंतिम मूल्यांकन और अंक देने का फैसला शिक्षक ही करेंगे।
50 हजार से ज्यादा छात्रों की कॉपियों में AI की मदद
विश्वविद्यालय में 19 जुलाई को प्री बीएड और प्री डीएलएड प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 54 हजार 498 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की चुनौती सामने आई।
लगभग 80 हजार से अधिक कॉपियों की जांच में ज्यादा समय लगने की संभावना थी। ऐसे में विश्वविद्यालय ने AI आधारित सॉफ्टवेयर का उपयोग शुरू किया। अब केवल प्रवेश परीक्षाओं की ही नहीं, बल्कि यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कॉपी की हार्ड कॉपी भेजने की जरूरत नहीं
नई व्यवस्था में उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन करके डिजिटल फॉर्म में बदला जाता है। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन सिस्टम में अपलोड किया जाता है। शिक्षक अपने कंप्यूटर या लैपटॉप से कॉपी देखकर सीधे सॉफ्टवेयर में ही अंक दर्ज कर सकते हैं।
इससे कॉपियों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। विश्वविद्यालय के अनुसार इससे समय के साथ-साथ परिवहन खर्च में भी कमी आएगी।
उत्तर समझने में AI करेगा शिक्षकों की सहायता
AI सॉफ्टवेयर में संबंधित विषयों की अध्ययन सामग्री और संदर्भ पुस्तकों को भी जोड़ा गया है। अगर किसी उत्तर को समझने या उसका मूल्यांकन करने में शिक्षक को परेशानी आती है, तो वह AI की मदद ले सकते हैं।
हालांकि, AI के सुझाव के आधार पर सीधे अंक नहीं दिए जाएंगे। शिक्षक उत्तर की जांच करने के बाद अपनी समझ के अनुसार अंतिम अंक तय करेंगे। विश्वविद्यालय का दावा है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
तीन मिनट में एक कॉपी जांचने का लक्ष्य
विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन मूल्यांकन के लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार कराया है। इसमें जांच के लिए शिक्षकों की अलग-अलग आईडी बनाई गई हैं। उत्तर पुस्तिकाएं तय संख्या में संबंधित शिक्षकों को ऑनलाइन भेजी जाती हैं।
एक कॉपी जांचने के लिए करीब तीन मिनट का समय निर्धारित किया गया है। अगर किसी कारण से कोई शिक्षक तय समय में कॉपी जांच नहीं पाता है, तो सिस्टम उसे दूसरे शिक्षक की आईडी में ट्रांसफर कर देता है।
AI सिर्फ सहायक, फैसला शिक्षक का रहेगा
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि AI को मूल्यांकन की जगह नहीं दी गई है। यह केवल शिक्षकों के काम को आसान बनाने वाली तकनीक है। अंतिम अंक शिक्षक के मूल्यांकन के आधार पर ही तय होंगे।
पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीके सारस्वत ने बताया कि ऑनलाइन मूल्यांकन व्यवस्था से समय की बचत होगी और परीक्षा परिणाम समय पर जारी करने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि भविष्य में शिक्षा क्षेत्र में ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।
FAQ
- क्या अब यूनिवर्सिटी की सभी उत्तर पुस्तिकाएं AI ही जांचेगा?
नहीं, AI सिर्फ शिक्षकों की सहायता करेगा। अंतिम मूल्यांकन और अंक देने का फैसला शिक्षक ही करेंगे। - AI से उत्तर पुस्तिका जांचने का क्या फायदा होगा?
AI आधारित व्यवस्था से कॉपियों की जांच तेजी से होगी, समय और खर्च दोनों की बचत होगी। इससे परीक्षा परिणाम भी जल्दी जारी किए जा सकेंगे। - बिलासपुर विश्वविद्यालय में AI मूल्यांकन कैसे काम करेगा?
उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन कर सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक ऑनलाइन कॉपी देखकर अंक दर्ज करेंगे और जरूरत पड़ने पर AI की मदद ले सकेंगे।
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