मौत के 37 दिन बाद आया मैसेज, आप स्वस्थ हैं, आयुष्मान योजना पर उठे सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- मौत के बाद आया स्वस्थ होने का मैसेज
- मृत आरक्षक को रिकॉर्ड में जिंदा दिखाया
- आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड पर सवाल
- 42 दिन भर्ती दिखाने से मचा हड़कंप
- पत्नी ने मांगी पूरे मामले की जांच
Ambikapur। जशपुर जिले के एक आरक्षक की मौत के बाद आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरक्षक की मौत के 37 दिन बाद उसके मोबाइल पर आयुष्मान सारथी योजना का मैसेज पहुंचा। मैसेज में लिखा था कि मरीज स्वस्थ होकर घर लौट रहा है। जबकि परिवार के मुताबिक आरक्षक की मौत अस्पताल में भर्ती होने के पांचवें दिन ही हो चुकी थी।
मृत आरक्षक की पत्नी ने इस मैसेज को देखकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पति की मौत के बाद ऐसा संदेश मिलना बेहद दुखद है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
26 जून को अस्पताल में भर्ती हुए थे आरक्षक
जशपुर जिले के कटंगखार गांव निवासी देवनारायण राम पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर तैनात थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें 26 जून 2026 को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल में उनका इलाज आयुष्मान योजना के तहत शुरू हुआ। इलाज के दौरान 30 जून को उनकी मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल की ओर से उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। परिवार के लिए मामला यहीं खत्म हो गया था। कुछ दिन बाद जब आरक्षक के मोबाइल पर आयुष्मान सारथी योजना का संदेश आया तो सभी हैरान रह गए।
मैसेज में लिखा था- स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं
आरक्षक की पत्नी सीमा कुजूर ने बताया कि उनके पति की मौत 30 जून को हो चुकी थी। इसके बाद भी मोबाइल पर ऐसा संदेश आया जिसमें लिखा था कि मरीज स्वस्थ होकर घर लौट रहा है।
मैसेज में अस्पताल में भर्ती होने की तारीख और डिस्चार्ज की तारीख भी दर्ज थी। रिकॉर्ड के मुताबिक मरीज को 6 अगस्त तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया था। सीमा कुजूर ने कहा कि अगर यह सिर्फ तकनीकी गलती है तो भी इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई है।
42 दिन तक भर्ती दिखाने पर उठे सवाल
परिवार का आरोप है कि आरक्षक को आयुष्मान योजना के तहत करीब 42 दिन तक भर्ती बताया गया। जबकि वास्तविकता में वह सिर्फ कुछ दिन ही अस्पताल में इलाजरत थे। पत्नी ने कहा कि ऐसे मामलों से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन ने बताई तकनीकी वजह
मेडिकल कॉलेज अंबिकापुरके सीएस आरसी आर्या ने मामले पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह संदेश ऑटो जनरेटेड सिस्टम से भेजा गया है। अस्पताल की तरफ से ऐसा कोई मैसेज नहीं भेजा गया।
उन्होंने बताया कि आरक्षक का आयुष्मान कार्ड 30 जून को ही ब्लॉक कर दिया गया था। मरीज आईसीयू में भर्ती था और केवल पांच दिन का ही बिल कार्ड से जमा हुआ है।
सीएस ने कहा कि इस तरह के मैसेज परिवार के लिए भावनात्मक रूप से परेशान करने वाले होते हैं। मामले की जानकारी संबंधित विभाग रायपुर को भेजी जाएगी, ताकि ऐसी तकनीकी समस्या को ठीक किया जा सके।
अब जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति
फिलहाल मामला आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड और ऑटोमेटिक मैसेज सिस्टम से जुड़ा बताया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन इसे तकनीकी गलती बता रहा है, जबकि परिवार ने जांच की मांग उठाई है। अब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही पता चलेगा कि यह सिर्फ सिस्टम की गलती थी या रिकॉर्ड में किसी तरह की लापरवाही हुई।
FAQ
- आयुष्मान सारथी से मृत आरक्षक के मोबाइल पर क्या मैसेज आया था?
आरक्षक की मौत के 37 दिन बाद मैसेज आया कि वह स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। - आरक्षक को आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में कितने दिन भर्ती दिखाया गया?
रिकॉर्ड में आरक्षक को करीब 42 दिन तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया। - अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले पर क्या सफाई दी है?
अस्पताल प्रबंधन ने इसे ऑटो जनरेटेड मैसेज बताया और कहा कि आयुष्मान कार्ड मौत के दिन ही ब्लॉक कर दिया गया था।
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