व्यापारी नेता की बढ़ीं मुश्किलें: यौन शोषण पीड़िता के चरित्र पर उठाए थे सवाल, अब थाने में दर्ज हुआ संगीन धाराओं में केस
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) और 353(2) के साथ एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पहले यौन दुर्व्यवहार का मामला हुआ था दर्ज
इस पूरे विवाद की शुरुआत एक पुराने मामले से हुई। आरोप है कि 11 अगस्त को अंबिकापुर शहर की एक दुकान में एक आदिवासी महिला के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार हुआ था। इस मामले में महिला की शिकायत पर सिटी कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी।
इसके बाद व्यापारी संगठन कैट के सरगुजा पदाधिकारी भी मामले में सामने आए। संगठन के पदाधिकारियों ने एसएसपी को ज्ञापन दिया। इसमें पहले दर्ज मामले को खत्म करने की मांग की गई थी।
ज्ञापन के बाद बयान देने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि एसएसपी को ज्ञापन सौंपने के बाद रविंद्र तिवारी ने सार्वजनिक रूप से महिला के बारे में टिप्पणी की। आरोप है कि उन्होंने महिला के चरित्र पर सवाल उठाते हुए यह दावा किया कि संबंधित महिला पहले भी शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में इसी तरह का मामला कर चुकी है। सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सुनीहा सोनहा ने इस बयान पर आपत्ति जताई। उनकी ओर से अजाक थाने में शिकायत दी गई।
शिकायत में कहा गया कि किसी महिला की शिकायत की जांच पूरी होने से पहले उसके चरित्र पर इस तरह सार्वजनिक टिप्पणी करना गलत है। इससे न केवल महिला की सामाजिक छवि प्रभावित होती है बल्कि पुलिस जांच पर भी असर पड़ सकता है।
आदिवासी समाज को लेकर टिप्पणी पर भी आपत्ति
मामला सिर्फ महिला को लेकर की गई टिप्पणी तक सीमित नहीं है। शिकायत में आदिवासी समाज को लेकर दिए गए कथित बयान का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि रविंद्र तिवारी ने कहा कि आदिवासी समाज के लोग शासन से मिलने वाली राशि के लालच में एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामले दर्ज करवाते हैं।
इसी कथित बयान को लेकर आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई है। शिकायत में कहा गया कि इस तरह की टिप्पणी से पूरे आदिवासी समाज की गरिमा को ठेस पहुंची है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी एक मामले को आधार बनाकर पूरे समाज को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
अजाक थाने में दर्ज हुआ मामला
शिकायत मिलने के बाद अजाक थाने में भाजपा नेता रविंद्र तिवारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) और 353(2) के साथ एससी-एसटी एक्ट की धाराएं लगाई हैं।
अब पुलिस यह जांच करेगी कि सार्वजनिक रूप से दिए गए कथित बयान वास्तव में किस संदर्भ में दिए गए थे। इसके साथ ही उपलब्ध वीडियो और ऑडियो सामग्री की भी जांच की जा सकती है।
वीडियो और ऑडियो जब्त करने की मांग
शिकायत में पुलिस से रविंद्र तिवारी के कथित बयान से जुड़े वीडियो और ऑडियो जब्त करने की मांग की गई है। कहा गया है कि इनकी जांच से यह साफ हो सकेगा कि सार्वजनिक रूप से क्या कहा गया था और बयान का पूरा संदर्भ क्या था।
इसके अलावा शंकरगढ़ थाने के रिकॉर्ड की जांच करने की भी मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह सत्यापित किया जाना चाहिए कि संबंधित महिला के खिलाफ या उसकी ओर से पहले ऐसा कोई मामला दर्ज था या नहीं।
पुराने मामले के सबूत सुरक्षित रखने की मांग
शिकायत में पहले दर्ज यौन दुर्व्यवहार के मामले से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इसमें महिला का पूरक बयान दर्ज करने की मांग शामिल है। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
आदिवासी समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि सार्वजनिक बयान देकर मूल मामले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि फिलहाल ये सभी बातें शिकायत और दर्ज प्रकरण में लगाए गए आरोप हैं। आरोपों की सत्यता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब जांच पर टिकी नजर
अंबिकापुर में सामने आया यह मामला अब दो अलग पहलुओं से जुड़ गया है। पहला मामला कथित यौन दुर्व्यवहार से संबंधित है। दूसरा मामला उस प्रकरण को लेकर की गई सार्वजनिक टिप्पणियों से जुड़ा है।
अजाक थाना अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगा। पुलिस वीडियो, ऑडियो और संबंधित थानों के रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित बयान किस परिस्थिति में दिए गए थे
और उनमें कानूनी कार्रवाई के लिए जरूरी आधार कितना मजबूत है। फिलहाल भाजपा नेता रविंद्र तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद अंबिकापुर में यह प्रकरण राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा में आ गया है।
FAQ
1. अंबिकापुर में किस भाजपा नेता पर SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है?
भाजपा नेता और कैट के प्रदेश उपाध्यक्ष रविंद्र तिवारी पर केस दर्ज हुआ है।
2. रविंद्र तिवारी पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
उन पर महिला के चरित्र और आदिवासी समाज को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
3. रविंद्र तिवारी के खिलाफ मामला किस थाने में दर्ज हुआ है?
उनके खिलाफ अंबिकापुर के अजाक थाने में मामला दर्ज किया गया है।