अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में 448 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने रद्द करने का फैसला किया निरस्त
कोर्ट ने भर्ती रद्द कर व्यापम से नई भर्ती कराने के शासन के फैसले को मनमाना मानते हुए निरस्त कर दिया।
इसके लिए 20 जुलाई 2022 को जारी विज्ञापन और बाद में जारी संशोधित विज्ञापन को आधार बनाया जाएगा। अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया करनी होगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- मामला राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर की भर्ती का है।
- तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी।
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रद्द करने का फैसला निरस्त कर दिया है।
- प्रक्रिया 20 जुलाई 2022 के विज्ञापन और बाद के संशोधित विज्ञापन पर बहाल होगी।
- आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने में पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि भर्ती प्रक्रिया को वहीं से दोबारा शुरू किया जाए, जहां उसे रोका गया था। कोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 की बैठक में भर्ती रद्द करने के फैसले को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही 19 जून 2025 को जारी संबंधित पत्र भी निरस्त कर दिया गया है।
अब अधिकारियों को पहले अभ्यर्थियों की पात्रता जांचनी होगी। उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद सभी योग्य अभ्यर्थियों की तुलनात्मक मेरिट तैयार होगी।
जिन उम्मीदवारों को पात्र और चयन के योग्य पाया जाएगा, उन्हें लागू भर्ती नियमों के अनुसार नियुक्ति दी जाएगी। यानी अब पुरानी भर्ती प्रक्रिया को ही आगे बढ़ाना होगा।
कोर्ट ने कितना समय दिया?
हाईकोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया के लिए तीन महीने का समय दिया है। यह समय आदेश की प्रति मिलने के बाद शुरू होगा। इस दौरान दस्तावेजों की जांच, पात्रता का सत्यापन और मेरिट सूची तैयार करने का काम पूरा करना होगा।
भर्ती रद्द करने का फैसला कब और क्यों हुआ?
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद चयन प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी। अभ्यर्थियों की मेरिट सूची भी तैयार हो गई थी।
इसके बाद उम्मीदवारों को 23 अगस्त 2023 को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था। लेकिन इस बीच 23 अप्रैल 2025 को हुई सामान्य सभा की बैठक में भर्ती रद्द करने का फैसला लिया गया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि अब नई भर्ती छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम के माध्यम से कराई जाएगी।
भर्ती रद्द करने के पीछे बड़ी संख्या में आवेदन आने और चयन प्रक्रिया में ज्यादा समय लगने का तर्क दिया गया था। इसी फैसले को अभ्यर्थियों ने चुनौती दी थी।
आवेदनों के आंकड़ों में क्या अंतर आया?
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में आवेदन की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, कॉलेज के डीन ने 19 जून 2025 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को एक पत्र भेजा था।
इस पत्र में बताया गया था कि कुल 448 पदों के लिए 55,335 आवेदन मिले थे।
इनमें 63 तृतीय श्रेणी के पदों के लिए 10,374 आवेदन आए थे। वहीं, 385 चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए 44,961 आवेदन मिले थे।
लेकिन भर्ती रद्द करने वाली बैठक में एक लाख से ज्यादा आवेदन आने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दोनों आंकड़ों के अंतर पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि आवेदन की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए गए।
राज्य शासन ने क्या दलील दी?
राज्य शासन ने हाईकोर्ट में अपने फैसले का बचाव किया। शासन की ओर से कहा गया कि किसी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने या दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए जाने से उम्मीदवार को नौकरी मिलने का पक्का अधिकार नहीं मिल जाता।
शासन का कहना था कि प्रशासनिक सुविधा और संस्थान के हित को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किया जा सकता है। अधिकारियों को जरूरत के अनुसार भर्ती का तरीका बदलने का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने माना कि सरकार हर विज्ञापित पद पर नियुक्ति करने के लिए बाध्य नहीं है। उचित कारण होने पर भर्ती प्रक्रिया रद्द भी की जा सकती है।
लेकिन इस मामले में अधिकारियों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पुरानी भर्ती प्रक्रिया में क्या कमी थी। यह भी नहीं बताया गया कि पहले से चल रही प्रक्रिया को पूरा करना संभव क्यों नहीं था।
कोर्ट ने यह भी माना कि नई भर्ती शुरू होने से पुराने अभ्यर्थियों की उम्र संबंधी पात्रता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में पहले से चल रही भर्ती को रोकने के लिए ठोस वजह होनी चाहिए थी।
अनुच्छेद 14 और 16 का जिक्र क्यों?
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का भी जिक्र किया। ये दोनों अनुच्छेद सरकारी व्यवस्था में समानता और रोजगार के अवसरों से जुड़े हैं।
कोर्ट के मुताबिक, भर्ती रद्द करने के फैसले के समर्थन में पर्याप्त तथ्य और कानूनी आधार नहीं दिए गए। इसलिए यह कार्रवाई निष्पक्षता और समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी।
इसी आधार पर कोर्ट ने भर्ती रद्द करने के फैसले को निरस्त कर दिया।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की पुरानी भर्ती प्रक्रिया फिर शुरू होगी। अधिकारियों को अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और पात्रता की जांच करनी होगी। इसके बाद तुलनात्मक मेरिट सूची तैयार की जाएगी।
पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद पात्र उम्मीदवारों को भर्ती नियमों के अनुसार नियुक्ति दी जाएगी।
अब अभ्यर्थियों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। देखना होगा कि तय समय में भर्ती प्रक्रिया पूरी होती है या नहीं। वहीं, राज्य शासन इस फैसले को आगे चुनौती देगा या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
- हाईकोर्ट ने अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भर्ती पर क्या फैसला दिया?
हाईकोर्ट ने भर्ती रद्द करने का फैसला निरस्त कर दिया। कोर्ट ने पुरानी भर्ती प्रक्रिया बहाल करने का निर्देश दिया है। भर्ती उसी चरण से शुरू होगी, जहां रुकी थी। - भर्ती प्रक्रिया कितने समय में पूरी करनी होगी?
कोर्ट ने आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। - अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भर्ती कितने पदों के लिए थी और कितने आवेदन आए थे?
डीन के 19 जून 2025 के पत्र के मुताबिक 448 पदों के लिए 55,335 आवेदन आए थे। इनमें 63 तृतीय श्रेणी और 385 चतुर्थ श्रेणी पद थे।