अमित जोगी के खिलाफ FIR दर्ज, पीएम मोदी और ज्ञानेश कुमार के वीडियो पर माफी के बाद भी नहीं टली मुश्किलें

Harrison Masih | Nov 04, 2026, 10:25 IST
अमित जोगी के विवादित वीडियो पर रायपुर में FIR दर्ज, पीएम मोदी और ज्ञानेश कुमार से जुड़ा है मामला
Amit Jogi booked for sharing a controversial video involving PM Modi and Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar; BJP files complaint in Raipur.
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी मुश्किलों में घिर गए हैं। उनके खिलाफ रायपुर के सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज की गई है।

मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े एक विवादित वीडियो का है। अमित जोगी ने यह वीडियो कथित वोट चोरी के मुद्दे पर राजनीतिक व्यंग्य करते हुए शेयर किया था। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। विवाद बढ़ने पर अमित जोगी ने पोस्ट हटा दी और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग ली। हालांकि, इसके बावजूद मामला पुलिस तक पहुंच गया।



वोट चोरी के मुद्दे पर शेयर किया था वीडियो

दरअसल, अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। यह वीडियो कथित वोट चोरी के मुद्दे पर आधारित था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े प्रतीकात्मक किरदार दिखाए गए थे। वीडियो की प्रस्तुति और सामग्री को लेकर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई।



भाजपा नेताओं का कहना था कि राजनीतिक विरोध के लिए मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है। किसी भी मुद्दे पर असहमति जताई जा सकती है, लेकिन तरीका सही होना चाहिए।



विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने अपना वीडियो हटा दिया। इसके बाद उन्होंने दूसरी पोस्ट के जरिए सफाई दी। उन्होंने माना कि राजनीतिक विचार रखने के लिए अपनाया गया तरीका उचित नहीं था। साथ ही वीडियो से आहत लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।




राजेश मूणत के नेतृत्व में थाने पहुंचे भाजपा नेता

इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में भाजपा नेता और कार्यकर्ता सिविल लाइंस थाने पहुंचे। यहां उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी और अमित जोगी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।



भाजपा नेताओं का कहना था कि राजनीतिक दलों के बीच विचारधारा और नीतियों को लेकर मतभेद होना सामान्य बात है। हर दल को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन विरोध जताने के लिए भाषा और तरीके की मर्यादा बनाए रखना भी जरूरी है।



भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर फैलाने वाले अन्य लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग भी की।




इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमित जोगी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 352, 353(2) और 356(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 भी लगाई गई है।



रिपोर्ट्स के अनुसार, शिकायत भाजपा के रायपुर जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर की ओर से की गई थी। हालांकि, FIR की आधिकारिक प्रति के आधार पर शिकायतकर्ता और धाराओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।



भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी

इस विवाद पर भाजपा के कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए भी नाराजगी जाहिर की। छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास ने भी अमित जोगी की पोस्ट पर आपत्ति जताई।



भाजपा नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक आलोचना के नाम पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को लेकर ऐसी सामग्री साझा करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध और आलोचना की जगह है, लेकिन इसके लिए मर्यादित तरीका अपनाना चाहिए।




अब पुलिस जांच पर टिकी नजरें

FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस की जांच अहम हो गई है। पुलिस वीडियो की सामग्री, उसे तैयार करने की प्रक्रिया और सोशल मीडिया पर उसके प्रसार से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है। यह भी देखा जा सकता है कि वीडियो बनाने और फैलाने में किन लोगों की भूमिका रही।



फिलहाल अमित जोगी की गिरफ्तारी या अदालत की ओर से किसी नई कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। अमित जोगी वीडियो हटाकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। इसके बावजूद FIR दर्ज होने से प्रदेश की राजनीति में विवाद तेज हो गया है।



अब सभी की नजर पुलिस की जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। आने वाले दिनों में यह मामला छत्तीसगढ़ की सियासत में और चर्चा का विषय बन सकता है।




यह खबर क्यों जरूरी है

यह मामला सार्वजनिक मंच पर राजनीतिक व्यंग्य की सीमा से जुड़ा है। एक तरफ विरोध और कानूनी शिकायत का अधिकार है, दूसरी तरफ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर किस हद तक टिप्पणी हो सकती है, यह सवाल भी उठता है। यह जानना जरूरी है कि शिकायत किस बात पर है और आरोप अभी किस स्तर पर हैं।

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