अमित जोगी को सपने में दिखाई दे रही अदालत, बोले खुद को उस स्थिति में पाया जहां न्याय पूरी तरह से अप्राप्य लग रहा था

Arun Tiwari | Apr 17, 2026, 15:28 IST
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अमित जोगी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र, इन दिनों अपने जीवन के एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सपना साझा किया, जिसमें वे खुद को उस स्थिति में पा रहे थे जहां न्याय पूरी तरह से अप्राप्त था।

Raipur : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी इन दिनों सपने पर चिंतन कर रहे हैं। बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे अमित को इन दिनों सपने में भी अदालत नजर आ रही है।



अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सपने में खुद को उस स्थिति में देखा जहां न्याय अप्राप्त लग रहा था। न बोलने का मौका, न सुनवाई, अन्याय की अथाह गहराई। जाहिर ये बातें संकेत में हाईकोर्ट के उस फैसले की तरफ



इशारा कर रहीं थी जिसमें उनको जग्गी हत्याकांड में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अमित जोगी के इसी मामले में सुनवाई होनी है। यही तीन दिन की बेचैनी सपना बनकर आ रही है।



अमित जोगी जाएंगे या बचेंगे

23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को बिलासपुर हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। संभवत: 23 अप्रैल को उनकी सरेंडर की तारीख खत्म हो रही है।



हाईकोर्ट की इस सजा के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। सुप्रीम कोर्ट 20 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेगा। या तो सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी या फिर हाईकोर्ट की सजा पर सुप्रीम मुहर लगेगी।अमित जोगी यह कह चुके हैँ कि हाईकोर्ट ने उनको सुने बिना सजा मुकर्रर कर दी। यह उनके साथ अन्याय हुआ है।



सुप्रीम कोर्ट से उनको न्याय की पूरी उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में अमित जोगी की तरफ से मुकुल रोहतगी, कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा जैसे दिग्गज अधिवक्ता उतर रहे हैं। सतीश जग्गी का कहना है कि यह सब अमित जोगी के इशारे पर हुआ और अब उनकी 23 साल पुरानी इंसाफ की लड़ाई पूरी हुई है।



भगवान भरोसे जोगी

अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की। इस पोस्ट में उन्होंने एक सपने का जिक्र किया। जाहिर है उनके भाग्य के फैसले को तीन दिन ही बचे हैं इसलिए यह बेचैनी है। उन्होंने लिखा, एक सपने पर चिंतन, कल रात मैंने एक ऐसा सपना देखा जो अभी तक मेरे मन में गूँज रहा है।



सपने में मैं खुद को उस स्थिति में पाया जहाँ न्याय पूरी तरह से अप्राप्य लग रहा था । न बोलने का अवसर, न कोई निष्पक्ष सुनवाई। अन्याय की गहराई अथाह थी। फिर भी उस कठिनाई के बीच, मेरे भीतर कुछ अत्यंत सुंदर घटित हुआ। एक शांत लेकिन अत्यंत शक्तिशाली बल जाग उठा।



मैं शांति और अविचलित भाव से जागा, एक गहरी आंतरिक निश्चितता से बँधा हुआ। सत्य मेरे साथ है, मेरे भीतर है, और मेरा विवेक पूरी तरह निर्मल है। उस सपने ने मुझे याद दिलाया कि जब दुनिया उन लोगों को चुप कराने की कोशिश करती है जो सत्ता से सत्य बोलने का साहस करते हैं, तब भी हमारे भीतर का दिव्य प्रकाश कभी बुझ नहीं सकता।



कृपा और उद्देश्य हमेशा अपना रास्ता निकाल लेते हैं। मुझे बीआर अंबेडकर की उस संवैधानिक दृष्टिकोण से भी अपार बल मिला जो कानून के शासन पर आधारित है। एक पवित्र ढांचा जो सत्य बोलने वालों की रक्षा करता है और हर नागरिक को न्याय सुनिश्चित करता है।



सबसे ऊपर, मैं ईश्वर की परिपूर्ण और अंतिम न्याय में विश्वास रखता हूँ, जिसे कोई भी सांसारिक शक्ति कभी नहीं मिटा सकती। यही भाव सतनाम साहेब परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की शिक्षाओं में भी साकार है।



हर उस व्यक्ति से किसी भी धर्म का हो या बिना धर्म के जिसे लगता है कि उसका सत्य नहीं सुना गया, उसकी आवाज़ को नजरअंदाज कर दिया गया है। आशा मत छोड़ना।



तुम्हारी कहानी अभी बहुत दूर तक जाना बाकी है। तुम्हारे भीतर का प्रकाश किसी भी अंधेरे से कहीं अधिक शक्तिशाली है। सत्य अपने आप में एक अनुपम सुंदरता के साथ चमकने का तरीका जानता है। कृतज्ञता और शांति के साथ।



जग्गी हत्याकांड का पूरा मामला (Jaggi Murder Case)

4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।



31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले अमित जोगी के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया।



करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।



शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।



हालांकि उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन अब अमित जोगी को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।



जग्गी हत्याकांड की टाइमलाइन

2003- रायपुर में रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या


2003-04 - मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई


2004-05- सीबीआई ने अमित जोगी समेत 29 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट को सौंपी


ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी करार दिया और अमित जोगी को बरी कर दिया


सीबीआई ने अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा खोला गया


2026 में हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई,11 हजार पन्नों की चार्जशीट पर हुई सुनवाई अप्रैल 2026,हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश,आजीवन कारावास की सजा


अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट ने अपील की, 20 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई



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