किराए की बिल्डिंग में नहीं चलेंगी आंगनबाड़ी, स्कूल शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला

VINAY VERMA | May 22, 2026, 14:50 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने भवन विहीन आंगनबाड़ियों को स्कूलों में संचालित करने का फैसला लिया। खाली कक्षों का उपयोग कर बच्चों को बेहतर शिक्षा और पोषण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

छत्तीसगढ़ सरकार ने भवन विहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को आदेश जारी कर कहा है कि जिन स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष या अनुपयोगी भवन उपलब्ध हैं, वहां आंगनबाड़ी केंद्रों को संचालित करने की अनुमति सुनिश्चित की जाए। सरकार का मानना है कि इससे भवन विहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को राहत मिलेगी और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।



CS की बैठक के बाद आदेश जारी:

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था। बैठक में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के बाद खाली पड़े कमरों और भवनों के उपयोग पर चर्चा हुई। इसके बाद तय किया गया कि जिन जगहों पर स्कूलों में अतिरिक्त जगह उपलब्ध है, वहां आंगनबाड़ी केंद्रों को संचालित किया जाएगा। इसी निर्णय के पालन में विभाग ने आदेश जारी किया है।



कलेक्टरों को दिए गए निर्देश:

विभागीय आदेश में प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे स्कूलों की पहचान करें, जहां अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध हैं। इन भवनों में भवन विहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थानांतरित कर संचालन सुनिश्चित किया जाए। सरकार चाहती है कि स्कूल और आंगनबाड़ी एक ही परिसर में संचालित हों, ताकि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा और पोषण सुविधाओं का बेहतर लाभ मिल सके।



महिला एवं बाल विकास विभाग से होगा समन्वय:

सरकार के इस फैसले में महिला एवं बाल विकास विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। आदेश की प्रतिलिपि विभाग के प्रमुख सचिव समेत लोक शिक्षण संचालनालय को भी भेजी गई है। माना जा रहा है कि दोनों विभागों के समन्वय से प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों को राहत मिलेगी, जो अब तक किराए या अस्थायी भवनों में संचालित हो रहे हैं।



शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ेगा असर:

सरकार के इस निर्णय को स्कूल युक्तियुक्तकरण से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हाल ही में कई स्कूलों के समायोजन और छात्र संख्या के आधार पर पुनर्गठन के बाद अनेक भवनों में अतिरिक्त कमरे खाली पड़े हैं। अब इन कमरों का उपयोग आंगनबाड़ी संचालन में किया जाएगा। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होने की संभावना जताई जा रही है।



ग्रामीण क्षेत्रों को मिल सकती है राहत:

ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र भवन के अभाव में संचालित हो रहे हैं। कई जगहों पर केंद्र पंचायत भवन, गार्डन के सांस्कृतिक केंद्र और किराए के मकानो में चल रहे हैं। ऐसे में स्कूल परिसरों में जगह मिलने से बच्चों को सुरक्षित वातावरण, पेयजल, शौचालय और अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी संचालन में सुविधा होगी। हालांकि इस आदेश के बाद यह सवाल भी उठता है कि महिला एंव बाल विकास विभाग हर साल बिल्डिंग पर करोड़ों खर्च करता है। नए आंगनबाडी बनाने के आदेश जारी होते हैं, उसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग की मदद क्यों लेनी पड़ रही है।



विपक्ष उठा सकता है सवाल:

हालांकि सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है। विपक्ष इसे स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के बाद खाली हुए भवनों को सही ठहराने की कोशिश बता सकता है। वहीं सरकार इसे संसाधनों के बेहतर उपयोग और बच्चों के हित में लिया गया फैसला बता रही है।



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