महादेव ऐप से लेकर कोल लेवी तक: 8 महाघोटालों में 5 हजार 378 करोड़ की संपत्ति जब्त

Aishwarya Dwivedi | Jul 24, 2026, 10:05 IST
अटैच की गई संपत्तियों के घोटाले और नीलामी की प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ में 10 हजार 933 करोड़ रुपए के 8 बड़े घोटालों की जांच जारी है। ईडी और सीबीआई ने अब तक 5 हजार 378 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। दोष साबित होने पर यह नीलाम होगी।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ सालों में आठ बड़े घोटाले सामने आए हैं। इन मामलों में कुल 10,933 करोड़ की गड़बड़ी की जांच चल रही है। जांच एजेंसियों ने अब तक 5,378 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। इन संपत्तियों में आईएएस अफसरों और नेताओं के नाम शामिल हैं। अदालत में अपराध सिद्ध होने पर यह संपत्ति सरकार की हो जाएगी।



भ्रष्टाचार पर जांच तेज

छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों की जांच जारी है। केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इसमें प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (ED – Enforcement Directorate) शामिल है। इसके अलावा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI – Central Bureau of Investigation) भी जांच कर रही है। राज्य की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू (EOW – Economic Offences Wing) भी लगी हुई है। इन सभी एजेंसियों ने मिलकर बड़ी कार्रवाई की है।



संपत्ति अटैच, बिक्री पर रोक

जांच के दौरान करोड़ों रुपए की संपत्ति अटैच की गई है। इसमें आईएएस (IAS – Indian Administrative Service) अधिकारी शामिल हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर भी जांच के दायरे में हैं। कई बड़े कारोबारी और राजनीतिक रूप से असरदार लोग फंसे हैं। घोटाले की काली कमाई से खरीदी गई संपत्ति को जब्त किया गया है।



अंतिम अदालती फैसला आने तक इन संपत्तियों पर रोक रहेगी। आरोपी इन्हें बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकते हैं। इन पर कोई नया निर्माण भी नहीं किया जा सकता है। अगर अदालत में दोष साबित हो जाता है तो संपत्ति सरकार की होगी। इसके बाद सरकार इन्हें नीलाम करेगी। नीलामी से मिला पैसा सरकारी खजाने में जमा किया जाएगा।



जानिए किस घोटाले में कितनी जब्ती

राज्य में सबसे बड़ा मामला महादेव ऐप का है। इस घोटाले में करीब 6,000 करोड़ की गड़बड़ी की बात सामने आई है। इसमें एजेंसियों ने 3,800 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। दूसरा बड़ा मामला आबकारी घोटाले का है। आबकारी मामले में 3,200 करोड़ की गड़बड़ी का अनुमान है। इसमें 1,200 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।



कोल लेवी घोटाला भी काफी चर्चा में रहा है। इसमें 540 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। एजेंसियों ने 273 करोड़ की संपत्ति पर ताला लगाया है। डीएमएफ (DMF – District Mineral Foundation) घोटाले में 575 करोड़ की गड़बड़ी मानी गई है। इस मामले में 21 करोड़ 47 लाख की संपत्ति जब्त हुई है।



सीजीएमएससी (CGMSC – Chhattisgarh Medical Services Corporation) घोटाले में 411 करोड़ की जांच जारी है। इसमें 40 करोड़ की संपत्ति अटैच की गई है। कस्टम मिलिंग मामले में 175 करोड़ का घोटाला सामने आया था। इसमें 19 लाख 38 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की गई है। भारतमाला परियोजना में 32 करोड़ के घोटाले का आरोप है। इसमें 23 करोड़ 35 लाख की संपत्ति रोकी गई है। सीजीपीएससी (CGPSC – Chhattisgarh Public Service Commission) मामले में एक करोड़ की संपत्ति अटैच हुई है।



छत्तीसगढ़ घोटाला


प्रमुख लोगों की अटैच संपत्तियां

महादेव सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर पर बड़ा एक्शन हुआ है। दुबई के बुर्ज खलीफा और दुबई हिल्स में उसकी संपत्ति अटैच हुई है। बिजनेस बे में भी उसकी प्रॉपर्टी रोकी गई है। सौरभ चंद्राकर की कुल 1,700 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई है। विकास गर्ग की 940.77 करोड़ की संपत्ति अटैच की गई है। हरिशंकर तिबरेवाल की 388 करोड़ की संपत्ति पर ताला लगा है। रवि उप्पल की 21.45 करोड़ की संपत्ति रोकी गई है।



कोल लेवी मामले में सूर्यकांत तिवारी की संपत्ति अटैच हुई है। उसके करीबियों की 150 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया की 23 करोड़ की संपत्ति रोकी गई है। निलंबित आईएएस रानू साहू की 5.52 करोड़ की संपत्ति अटैच है। आईएएस समीर विश्नोई की 4 करोड़ की संपत्ति रोकी गई है।



संपत्ति जब्ती की कानूनी प्रक्रिया

जब भी कोई एजेंसी भ्रष्टाचार की जांच करती है तो वह अवैध कमाई खोजती है। उस कमाई से खरीदे गए मकान या जमीन को चिन्हित किया जाता है। इसके बाद एजेंसी संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच करती है। फिर 30 दिनों के भीतर मामला एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी भेजा जाता है। नई दिल्ली स्थित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी इस पर विचार करती है।



अथॉरिटी के फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है। इसके लिए 45 दिनों का समय मिलता है। पीड़ित पक्ष पीएमएलए (PMLA – Prevention of Money Laundering Act) अपीलीय न्यायाधिकरण जा सकता है। वहां से राहत न मिलने पर हाई कोर्ट का रुख किया जा सकता है। इसके लिए 60 दिनों का समय निर्धारित है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी जा सकता है।



मुख्य केस की सुनवाई विशेष पीएमएलए कोर्ट में होती है। अंतिम फैसला इसी अदालत का माना जाता है। आरोपी को अपनी आय का वैध स्रोत साबित करना होता है। अगर वह निर्दोष साबित होता है तो संपत्ति वापस मिल जाती है। निर्दोष खरीदार या बैंक भी अपना दावा पेश कर सकते हैं।



FAQ

  1. पीएमएलए (PMLA) कानून क्या है और इसके तहत संपत्तियां कब अटैच की जाती हैं?
    उत्तर: PMLA यानी धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 में लागू हुआ था। यह कानून अवैध कमाई को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) से रोकता है। जांच एजेंसी भ्रष्टाचार या अपराध से अर्जित काली कमाई से खरीदी गई संपत्तियों को इसके तहत अटैच करती है।
  2. ईडी (ED) और ईओडब्ल्यू (EOW) में क्या मुख्य अंतर है?
    उत्तर: ईडी (Enforcement Directorate) एक केंद्रीय जांच एजेंसी है, जो पूरे देश में वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करती है। वहीं ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) राज्य पुलिस की विशेष शाखा होती है, जो केवल राज्य के भीतर आर्थिक घोटालों की जांच करती है।
  3. किसी भी घोटाले में अटैच संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया कब शुरू होती है?
    उत्तर: संपत्ति अटैच होने के तुरंत बाद नीलाम नहीं होती है। पहले मामला एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी और विशेष पीएमएलए कोर्ट में चलता है। जब अदालत में आरोपी पर दोष सिद्ध (Convict) हो जाता है, तब सरकार संपत्ति जब्त कर उसकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू करती है।

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